चमोली | बिजेंद्र राणा
उत्तराखंड की विश्वविख्यात मां नंदादेवी बड़ी जात / राज जात यात्रा 2026 को लेकर चमोली जिले के नंदादेवी सिद्धपीठ कुरुड़ में आयोजित बृहद बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में जनप्रतिनिधियों, बड़ी जात आयोजन समिति, विभिन्न डोलियों के अध्यक्षों तथा 484 गांवों से पहुंचे प्रतिनिधियों ने भाग लेकर यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप देने की दिशा में व्यापक चर्चा की।
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि 12 वर्षीय नंदादेवी बड़ी जात यात्रा 5 सितंबर 2026 से 30 सितंबर 2026 तक पूर्व निर्धारित पंचांग गणना के अनुसार ही आयोजित की जाएगी, जिससे पिछले कुछ समय से चल रही असमंजस की स्थिति समाप्त हो गई है।
कुरुड़ सिद्धपीठ में जुटे जनप्रतिनिधि और डोली प्रतिनिधि
नंदादेवी सिद्धपीठ कुरुड़ के पवित्र प्रांगण में आयोजित बैठक में कई प्रमुख जनप्रतिनिधि और आयोजन समिति के पदाधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में उपस्थित प्रमुख लोग
- भूपाल राम टम्टा – विधायक, थराली विधानसभा
- दौलत सिंह बिष्ट – जिला पंचायत अध्यक्ष, चमोली
- हीमा देवी – प्रमुख, नंदानगर
- कर्नल हरेंद्र सिंह रावत – अध्यक्ष, बड़ी जात आयोजन समिति
- नरेश गौड़ – अध्यक्ष, बधाण डोली
- सुखबीर रौतेला – अध्यक्ष, दसोली डोली
- अशोक गौड़ – अध्यक्ष, बंड डोली
- विपिन फर्स्वाण – जिला पंचायत सदस्य, पिलग वार्ड
इसके अलावा लाता भगवती समिति, दशम द्वार समिति के सदस्य तथा थराली, देवाल, लाता, फर्शवाणफाट, सुतोल, सोल घाटी और नंदाक पट्टी सहित 484 गांवों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
5 से 30 सितंबर 2026 तक चलेगी ऐतिहासिक यात्रा
बैठक में तय किया गया कि नंदादेवी बड़ी जात / राज जात यात्रा 2026 का आयोजन 5 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक किया जाएगा। यह यात्रा उत्तराखंड की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक पैदल यात्राओं में से एक मानी जाती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु और स्थानीय समुदाय सहभागी होते हैं।
यात्रा मार्ग, आवास, भोजन और सुरक्षा पर बनी कार्ययोजना
बैठक के दौरान यात्रा के विभिन्न पड़ावों और व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। प्रमुख विषय रहे:
- यात्रा मार्ग का निर्धारण
- श्रद्धालुओं के लिए आवास व्यवस्था
- भोजन एवं पेयजल प्रबंधन
- सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं
- यात्रा पड़ावों पर स्थानीय समितियों की जिम्मेदारियां
- स्वयंसेवक एवं प्रशासनिक समन्वय
आयोजन समिति ने सभी संबंधित क्षेत्रों को समयबद्ध तरीके से तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए।
मां के प्रांगण से यात्रा का बिगुल
बैठक में उपस्थित सभी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में मां नंदादेवी के प्रांगण से यात्रा के बिगुल की घोषणा की। इसे बड़ी जात 2026 की तैयारियों की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह यात्रा केवल एक तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि गढ़वाल और कुमाऊं की सांस्कृतिक एकता, लोक परंपरा और आस्था का महापर्व है।
असमंजस की स्थिति पर लगा विराम
पिछले कुछ समय से श्रद्धालुओं और विभिन्न क्षेत्रों में यात्रा की तिथि एवं आयोजन को लेकर असमंजस बना हुआ था। बैठक में स्पष्ट रूप से कहा गया कि:नंदादेवी बड़ी जात यात्रा पूर्व निर्धारित पंचांग गणना और परंपरागत धार्मिक विधान के अनुसार ही सम्पन्न होगी।
इस घोषणा के बाद श्रद्धालुओं और विभिन्न डोली समितियों में उत्साह का माहौल देखा गया।
जनप्रतिनिधियों ने दिया सहयोग का आश्वासन
विधायक भूपाल राम टम्टा और जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट ने यात्रा के विभिन्न पड़ावों की जिम्मेदारी लेते हुए श्रद्धालुओं को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और ऐतिहासिक स्वरूप में सम्पन्न कराने के लिए प्रशासन एवं स्थानीय संस्थाएं मिलकर कार्य करेंगी।
नंदादेवी राज जात को उत्तराखंड का हिमालयी कुंभ भी कहा जाता है। यह यात्रा राज्य की लोकसंस्कृति, देवी परंपरा, पर्वतीय आस्था और सामुदायिक सहभागिता का अद्भुत उदाहरण है। 12 वर्षों में एक बार आयोजित होने वाली यह यात्रा देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है।







