- उत्तरकाशी में 122 स्कूलों पर ताले, लेकिन विद्यालयों की सूची गायब
- पांच वर्षों में 25 प्राथमिक विद्यालय बंद, 2026 में चार और पर ताला; शिक्षा विभाग के आंकड़ों में पारदर्शिता पर सवाल
रिपोर्ट – नीरज उत्तराखंडी
उत्तरकाशी। पहाड़ों से पलायन और घटती छात्र संख्या का सबसे बड़ा असर अब सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। उत्तरकाशी जनपद में विद्यालयों की बंदी को लेकर सामने आए अलग-अलग सरकारी आंकड़े गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। मार्च 2024 में शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के हवाले से जिले के 122 सरकारी विद्यालयों में ताला लगने की जानकारी सामने आई थी। वहीं, वर्ष 2020 से 2025 के बीच 25 प्राथमिक विद्यालय बंद होने और वर्ष 2026 में तीन प्राथमिक तथा एक उच्च प्राथमिक विद्यालय बंद होने का आंकड़ा भी सामने आया है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग अब तक 122 विद्यालयों की नामवार सूची सार्वजनिक नहीं कर पाया है।
122 विद्यालयों का आंकड़ा, लेकिन नामवार विवरण नदारद
24 मार्च 2024 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा महानिदेशालय ने प्रदेश के सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों से बंद हो चुके विद्यालयों की जानकारी मांगी थी। जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर उत्तरकाशी के 122 विद्यालयों में ताला लगने की बात सामने आई थी। प्रदेश में ऐसे विद्यालयों की संख्या 1,671 बताई गई थी। लेकिन उत्तरकाशी के इन 122 विद्यालयों में कितने प्राथमिक, कितने उच्च प्राथमिक और कितने माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं, इसका स्पष्ट विवरण सार्वजनिक नहीं हुआ। विद्यालयों के नाम, बंदी का वर्ष और यूडीआईएसई कोड भी सामने नहीं आए हैं।
पांच वर्षों में 25 प्राथमिक विद्यालय बंद
विधानसभा में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर आधारित मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 से 2025 के बीच उत्तरकाशी में 25 प्राथमिक विद्यालय बंद हुए। यह आंकड़ा केवल प्राथमिक विद्यालयों का है। प्रदेश में इसी अवधि के दौरान 826 प्राथमिक विद्यालय बंद होने की जानकारी सामने आई थी। इससे स्पष्ट है कि जिले में प्राथमिक शिक्षा का संकट लगातार गहराया है।
2026 में चार विद्यालयों पर फिर लगा ताला
गढ़वाल मंडल की शिक्षा विभागीय रिपोर्ट पर आधारित जून 2026 की खबर के अनुसार, उत्तरकाशी में शून्य छात्र संख्या के कारण तीन प्राथमिक और एक उच्च प्राथमिक विद्यालय बंद हुए। यानी चार विद्यालयों की बंदी की जानकारी सामने आई। हालांकि, इन विद्यालयों का 2020-25 के आंकड़ों और 2024 की 122 वाली सूची से मिलान नहीं हो पाया है।
कुल विद्यालयों की संख्या में गिरावट, लेकिन बंदी का हिसाब अस्पष्ट
उत्तरकाशी जिला प्रशासन की वर्ष 2019-20 की सांख्यिकी रिपोर्ट में जिले में कुल 1,206 विद्यालय दर्ज थे। इनमें 770 प्राथमिक, 276 जूनियर हाईस्कूल और 160 उच्चतर माध्यमिक/इंटरमीडिएट विद्यालय शामिल थे। वहीं, वर्ष 2024-25 के यूडीआईएसई+ आंकड़ों में सरकारी विद्यालयों की संख्या 1,044 दर्ज है। दोनों आंकड़ों में 162 का अंतर है, लेकिन इसे सीधे 162 विद्यालयों की बंदी नहीं माना जा सकता। विद्यालयों के विलय, उच्चीकरण, पुनर्वर्गीकरण और अन्य प्रशासनिक बदलावों का हिसाब भी जरूरी है।
कम छात्र संख्या और विद्यालय बंदी में अंतर
पड़ताल में यह भी सामने आया कि वर्ष 2022 के आसपास उत्तरकाशी के 156 प्राथमिक और 46 जूनियर हाईस्कूलों में दस या उससे कम छात्र होने की जानकारी प्रकाशित हुई थी। लेकिन कम छात्र संख्या का अर्थ विद्यालय बंद होना नहीं है। इसी तरह शून्य नामांकन, वास्तविक बंदी और किसी दूसरे विद्यालय में विलय की स्थिति को अलग-अलग दर्ज किया जाना चाहिए। इन श्रेणियों को मिलाकर आंकड़े प्रस्तुत करना भ्रामक हो सकता है।
शिक्षा विभाग से पांच सवाल
1. मार्च 2024 में जिन 122 विद्यालयों के बंद होने की रिपोर्ट भेजी गई थी, उनकी नामवार सूची कहां है?
2. इनमें प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट विद्यालयों की अलग-अलग संख्या कितनी है?
3. वर्ष 2020-25 में बंद हुए 25 प्राथमिक विद्यालयों के नाम और यूडीआईएसई कोड क्या हैं?
4. वर्ष 2026 में बंद हुए चार विद्यालय कौन-कौन से हैं और उनके भवनों की वर्तमान स्थिति क्या है?
5. बंद विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों का कहां समायोजन किया गया और विद्यालयों की भूमि एवं भवनों का क्या उपयोग हो रहा है?
आंकड़ों से आगे जवाबदेही का सवाल
उपलब्ध दस्तावेजों से यह तो स्पष्ट है कि उत्तरकाशी में सरकारी विद्यालयों की बंदी गंभीर समस्या बन चुकी है, लेकिन राज्य गठन से अब तक बंद हुए विद्यालयों की वास्तविक कुल संख्या अभी प्रमाणित नहीं हो सकी है। वर्ष 2017 में नौगांव क्षेत्र के विद्यालयों की बंदी की खबरें भी सामने आई थीं, मगर उनके विभागीय आदेश और विद्यालयवार विवरण उपलब्ध नहीं हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिक्षा विभाग के पास 122 बंद विद्यालयों की रिपोर्ट थी, तो उनकी सूची सार्वजनिक करने में इतनी देरी क्यों? क्या विभाग ने कभी इन विद्यालयों के भवनों, भूमि और संसाधनों का ऑडिट कराया? क्या गांवों में बच्चों की संख्या घटने के कारणों और शिक्षा तक उनकी पहुंच पर कोई ठोस अध्ययन हुआ?
पहाड़ के गांवों में विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि गांव की सामाजिक और सामुदायिक व्यवस्था का भी आधार होते हैं। विद्यालयों पर ताले लगना महज प्रशासनिक आंकड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीण भविष्य और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा गंभीर सवाल है। अब शिक्षा विभाग को आंकड़ों की बाजीगरी से आगे बढ़कर विद्यालयवार वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।






