उत्तरकाशी/नौगांव।3 नवंबर 2026
रिपोर्ट – नीरज उत्तराखंडी
यमुनाघाटी में किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए बनाई गई लिफ्ट सिंचाई योजनाओं की सुरक्षा, संचालन और रखरखाव व्यवस्था सवालों के घेरे में है। नौगांव, पुरोला और मोरी क्षेत्र में लघु डाल खंड की कुल 25 लिफ्ट सिंचाई योजनाएं संचालित हैं। इनमें अक्टूबर माह में 12 योजनाओं में चोरी हो चुकी है। प्रभावित योजनाओं में सात नौगांव और पांच पुरोला क्षेत्र की हैं। पंप हाउस के ताले तोड़कर मोटर, तार और विद्युत उपकरण चोरी किए गए। विभाग ने सभी मामलों की जानकारी पुलिस को दी है।
आठ से बढ़कर 12 तक पहुंचा आंकड़ा
अक्टूबर के पहले सप्ताह में आठ योजनाओं में चोरी सामने आई थी। इनमें नौगांव की कुआं, मंजियाली, सुनारा और बगासू तथा पुरोला की नेत्री, स्वील, हुडोली और पोरा योजनाएं शामिल थीं। तब प्रत्येक योजना में करीब चार से पांच लाख रुपये के उपकरण चोरी होने का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया था। आठ योजनाओं के लिए संभावित नुकसान 32 से 40 लाख रुपये बताया गया था, लेकिन अंतिम सरकारी आकलन विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। इसके बाद चोरी का आंकड़ा बढ़कर 12 योजनाओं तक पहुंच गया।
नौगांव की तुनालका, भंकोली और डामटा योजनाएं बाद की घटनाओं में चोरी की चपेट में आईं। लगातार घटनाओं के कारण बाकी योजनाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है।
बगासू ने खोली दूसरी तस्वीर
बगासू लिफ्ट सिंचाई योजना का मामला केवल चोरी तक सीमित नहीं है। मई में डांगा तोक की योजना का विद्युत ट्रांसफार्मर खराब होने से सिंचाई व्यवस्था ठप हो गई थी। क्षेत्र के किसान टमाटर, मटर, फ्रेंचबीन, खीरा और धान जैसी फसलों के लिए इसी लिफ्ट व्यवस्था पर निर्भर थे। उस समय विभागीय स्तर पर ट्रांसफार्मर दुरुस्त कर पानी उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। बाद में यही योजना चोरी की घटनाओं में भी शामिल हो गई।
अब जांच सिर्फ चोरी की नहीं
लगातार चोरी ने एक बुनियादी सवाल खड़ा किया है—सरकारी धन से बनाई गई इन परिसंपत्तियों की नियमित निगरानी, संचालन और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
जांच का दायरा प्रत्येक योजना की स्वीकृत लागत, निर्माण वर्ष, ठेकेदार, पंप-मोटर की खरीद, भुगतान, परिसंपत्ति रजिस्टर, बिजली कनेक्शन, ऑपरेटर व्यवस्था, मरम्मत खर्च और वास्तविक सिंचाई लाभ तक जाना चाहिए। खास तौर पर यह स्पष्ट होना जरूरी है कि जिन योजनाओं में चोरी हुई, उनमें चोरी से पहले अंतिम निरीक्षण कब किया गया था और उपकरणों का भौतिक सत्यापन किस स्तर पर हुआ था।
खेत तक पहुंचा पानी कितना?
लिफ्ट सिंचाई योजना की सफलता केवल पंप हाउस और मोटर लगाने से तय नहीं होती। असली कसौटी यह है कि योजना से कितने हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो रही है और वर्ष में कितने समय किसानों को पानी मिल रहा है।
यही वह बिंदु है जहां योजना-वार अभिलेख सबसे महत्वपूर्ण हो जाते हैं। स्वीकृत सिंचाई क्षेत्र और वास्तविक सिंचित क्षेत्र का तुलनात्मक रिकॉर्ड सामने आए बिना योजनाओं की वास्तविक उपयोगिता का निष्पक्ष आकलन संभव नहीं है।
चोरी की घटनाओं का पुलिस खुलासा जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी सरकारी परिसंपत्तियों के पूरे जीवन-चक्र का हिसाब है। मोटर कब लगी, कितने में लगी, कितने समय चली, कब खराब हुई, कितनी बार मरम्मत हुई, किसने संचालित की और खेत तक कितना पानी पहुंचा—इन सवालों के जवाब ही बताएंगे कि लिफ्ट सिंचाई योजनाएं कागज पर सफल हैं या जमीन पर।






