ब्रेकिंग न्यूज़(कमल जगाती, नैनीताल):-
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने केबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू की गिफ्तारी पर रोक और दर्ज मुक़दमे को निरस्त करने संबंधी याचिका में सभी पक्षो को सुनने के बाद निर्णय को सुरक्षित रख लिया गया। सुनवाई के दौरान मंत्री रेखा आर्य की तरफ से कहा गया कि उन्हें बदमान किया जा रहा है। गिरधारी लाल साहू ने सभी कम्पनियों से उन्हें हटा दिया गया और उनके 80% शेयर भी बेच दिए गए हैं। उनके राजनैतिक कैरियर को धूमिल किया जा रहा हैं। इसलिए याचिका को खारीज किया जाय।
वहीं गिरधारी की तरफ से कहा गया कि यह मुकदमा निरस्त करने योग्य है क्योंकि लगाए गए सभी आरोप गलत तथ्यों पर आधारित हैं। उनकी तरफ से गिरधारी को कभी भी डराया या धमकाया नहीं गया। सभी कम्पनियो में उनके शेयर आज तक जिंदा हैं और जिन कम्पनियों से उन्हें हटाया गया, उनकी सहमति से हटाया गया। कोई फर्जी हस्ताक्षर नहीं बनाये गए। उनके राजनैतिक कैरियर बनाने में उन्होंने पूरा सहयोग किया गया। आज मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ में हुई।
मामले के अनुसार गिरधारी लाल साहू ने याचिका दायर कर कहा कि दर्ज मुकदमे में उनके ऊपर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं। उन्हें गलत तरिके से फंसाकर झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया है। उनकी शादी वर्ष 2004 में हुई थी, तभी से वो पत्नी के साथ हैं। दर्ज मुकदमे में उनपर आरोप लगाया गया कि उनके द्वारा अपने को अविवाहित बताकर शादी की गई, जबकि वे शादी के वक्त मैरिड थे। उनके द्वारा जालसाजी रचकर उनके फर्जी हस्ताक्षर बना कर उन्हें कई कम्पनियो के निदेशक पद से हटा दिया गया। यही नहीं, उनके द्वारा उन्हें जान से मारने की धमकी और जाति सूचक अपशब्द भी कहे गए हैं।
जबकि याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि उनकी पत्नी रेखा आर्या के मंत्री बनने के बाद उनके द्वारा 210 करोड़ की अवैध सम्पति अर्जित की गयी। उन्होंने उच्च स्तरीय जाँच कराने को कहा है। साथ में यह भी कहा कि उनके खिलाफ यह मुकदमा नहीं बनता हैं। उनकी शादी को हुए 22 साल हो गए हैं। आज तक इस संबंधित में कोई उनके साथ उनका कोई मन मुटाव नहीं हुआ हैं। उनके खिलाफ गलत तथ्यों को जोड़कर मुकदमा दर्ज किया गया। जिसके विरुद्ध जाकर उनके खिलाफ यह झूठा मुकदमा दर्ज किया गया। याचिका में उनके द्वारा कोर्ट से प्रार्थना की है कि उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाय और दर्ज मुक़दमे को निरस्त किया जाय।






