एक्सक्लूसिव:आयुर्वेद विश्वविद्यालय की मनमानी। मतलब निकल गया तो पहचानते नही।

कुलदीप एस राणा  उत्तखण्ड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय की धनवंतरी वैधशाला में पूर्व में कार्यरत रहे लगभग 35 कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर पिछले एक सप्ताह से विवि गेट पर धरना दे रहे हैं।  वर्ष 2016 में विवि प्रशासन व धनवंतरी वैधशाला संस्था के  मध्य हुए करार के उपरांत ही इन कर्मचारी  की विवि परिसर में नियुक्ति […]

कुलदीप एस राणा 
उत्तखण्ड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय की धनवंतरी वैधशाला में पूर्व में कार्यरत रहे लगभग 35 कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर पिछले एक सप्ताह से विवि गेट पर धरना दे रहे हैं।
 वर्ष 2016 में विवि प्रशासन व धनवंतरी वैधशाला संस्था के  मध्य हुए करार के उपरांत ही इन कर्मचारी  की विवि परिसर में नियुक्ति हुई थी। जिसके उपरांत  विवि परिसर में बीएएमएएस का प्रथम सत्र आरम्भ हुआ था।  29 मई 2018 को विवि प्रशासन द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के इन 35 कर्मियों को विवि से निष्कासित कर दिया गया । जिसके उपरांत विवि प्रशासन द्वारा रिक्त हुए पदों पर नियम विरुद्ध नियुक्ति करने जा रहा था।
 समचार पत्रों के माध्यम से नियम विरुद्ध तरीके से भर्तियां किये जाने के मामले का खुलासा होने पर वर्तमान में शासन द्वारा उक्त नियुक्तियों पर रोक लगा रखी है। विवि की इस प्रकार द्वषे पूर्ण नीति के विरुद्ध 13 ने से यह समस्त पूर्व कर्मचारी  आंदोलन कर रहे हैं व विवि के गेट पर ही धरने पर बैठे हैं।
धरना दे रहे पूर्व कर्मचारियों का कहना है कि विवि ने वर्ष 2016 मे मुख्य परिसर की सीसीआईएम के निरीक्षण एवं मान्यता के समय उनके शैक्षिक प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल कर उन्हें नियमित कर्मचारी दर्शाया था।  निरीक्षण के दौरान हुई फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी मे भी उन्हें शामिल रखा गया। जिसके उपरांत सीसीआईएम द्वारा परिसर में  बीएएमएस प्रथम वर्ष प्रारंभ करने की मान्यता दे दी गई।
21 मई 2018 में भी सीसीआईएम द्वारा तृतीय सत्र 2019 के लिए मान्यता हेतु विवि परिसर का निरीक्षण किया गया तब भी उन्हें  विवि का नियमीत कर्मचारी ही दर्शाया।
निरीक्षण हो जाने के  उपरांत विवि प्रशासन द्वारा दुर्भावना से ग्रसित होकर बिना किसी पूर्व सूचना के समस्त कर्मचारियों को 29 मई 2018 को विश्वविद्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया गया और विश्वविद्यालय की निजी सुरक्षाकर्मी हथियारबंद कर्मचारियों द्वारा धमकाया भी गया।
 निष्कासित हुए कर्मचारियों का कहना है कि वर्ष 2017 में विवि प्रशासन व धनवंतरी वेधशाला संस्था के मध्य करार खत्म होने के बावजूद भी वर्ष 2018 हुए निरीक्षण में  सीसीआईएम के समक्ष विवि प्रशासन उन्हें नियमित कर्मचारी दर्शा शैक्षणिक दस्तावेजों का भी इस्तेमाल करता रहा।
निरीक्षण  हो जाने के उपरांत बिना किसी पूर्व सूचना के 29 मई 2018 को इन समस्त कर्मचारियों को विवि से बाहर कर दिया गया। साथ ही करार खत्म हो जाने की बाद विगत 9 माह से कर्मचारियों को उनकी सेवाओं के बदले किसी भी प्रकार का मानदेय भी नही दिया गया। इसके उपरांत जब विश्वविद्यालय प्रशासन उन्हीं रिक्तियों पर नियम विरुद्ध तरीके से नियुक्तियां करने जा रहा था।
मीडिया में खबर आने की उपरांत जिन पर शासन द्वारा रोक लगा दी गई है।
उक्त प्रकरण पर धरना दे रही समस्त पूर्व कर्मचारियों ने राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को ज्ञापन के माध्यम से उक्त प्रकरण पर जां
च कराए जाने की मांग की है।

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