धर्म संकट मे शिक्षक : बिना पास के काॅलेज जा नही सकते। नही पंहुचे तो वेतन ले नही सकते !

लगता है उत्तराखंड में हमारे अध्यापकों की कोई इज्जत ही नहीं रह गई है।
 हर कोई शिक्षकों को अपने हिसाब से हांकना चाहता है।
उच्च शिक्षा विभाग ने डिग्री शिक्षकों के लिए फरमान सुनाया है कि यदि वे आज सोमवार 4 मई को ग्रीन जोन में स्थित अपने तैनाती मुख्यालयों में नहीं पहुंचे तो उनका वेतन आहरण रोक दिया जाएगा।
आजकल पूरी तरह से लॉकडाउन है और रेड जोन से ग्रीन जोन में जाने पर प्रतिबंध है। लेकिन इसके बावजूद उच्च शिक्षा विभाग ने लॉक डाउन के दौरान अपने-अपने घरों में फंसे डिग्री प्राचार्य और शिक्षकों को  ग्रीन जोन में स्थित तैनाती मुख्यालयों में पहुंचने का फरमान सुनाया है,  जबकि रेड जोन से ग्रीन जोन में जाने के लिए शिक्षकों के पास भी नहीं बन पा रहे हैं।
जिलाधिकारी कार्यालय में जब भी शिक्षक पास बनाने के लिए आवेदन कर रहे हैं तो इनकी सेवाओं को आवश्यक सेवा ना होने का कारण बताकर इनका ऑनलाइन पास भी नहीं उपलब्ध कराया जा रहा है।
तुगलकी फरमान : दोहरे रवैए से परेशान !
 शिक्षा विभाग द्वारा दिए गए आदेश की कॉपी जिला अधिकारी को देने के बावजूद शिक्षकों के पास नहीं बन रहे हैं।
 अब शिक्षा विभाग के एकतरफा फरमान से शिक्षकों में काफी आक्रोश पनप रहा है। एक तरफ तो जिला मंडल और राज्य स्तरीय काडर वाले शिक्षकों और प्रधानाचार्य से लेकर मुख्य शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों आदि को सरकार ने ऐसा कोई फरमान जारी नहीं किया है लेकिन केवल डिग्री कॉलेज के प्राचार्य और शिक्षकों के लिए यह फरमान जारी किया गया है। राज्य सरकार का यह दोहरा रवैया शिक्षकों में आक्रोश का कारण बन रहा है।
अध्यापकों मे आक्रोश 
 प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसोनी ने भी इसे एक तरफा फरमान बताते हुए शिक्षकों का उत्पीड़न करार दिया है, तथा सरकार से मांग की है कि वे अपने आदेश की समीक्षा करें।
शिक्षक संघ के सचिव डॉ योगेश राणा में उच्च शिक्षा मंत्री से लेकर सचिव और निदेशक उच्च शिक्षा तक से गुहार लगा दी है, लेकिन लगता है कि सरकार शिक्षकों को आंदोलन के लिए उकसाने का मन बनाए बैठी है।
फिर ऑनलाइन क्यों नही
 यह भी अपने आप में एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि शिक्षकों को ऑनलाइन क्लास लेने के लिए कोई भी संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, इसके बावजूद वे यथासंभव ऑनलाइन अध्यापन का दायित्व भी निभा रहे हैं।
 सबसे अहम पेंच इस मामले में यह है कि 21 मार्च को शनिवार था और 22 मार्च से अचानक लाॅकडाउन घोषित कर दिया गया था।
 सप्ताह के अंत की छुट्टी तथा होली अवकाश के लिए कई शिक्षक अपने अपने मुख्यालयों से दूर अपने घरों को आ गये थे। लॉक डाउन के बाद से वे लोग घरों में ही रह गए हैं।
 इन शिक्षकों को तत्काल मुख्यालय पहुंचने का फरमान सुनाया गया है।
 अब अहम सवाल यह है कि जब मुख्यालय से भी शिक्षकों ने ऑनलाइन क्लासेज ही लेनी है तो वह अपने घरों से भी ऑनलाइन क्लासेस ले सकते हैं।
 21 अप्रैल से प्राध्यापक अपना कार्य ऑनलाइन संपादित भी कर रहे हैं।
  अध्यापकों ने स्टुडेंट्स की पढ़ाई के लिए ऑनलाइन क्लासेज भी सुचारू रूप से चालू कर रखी हैं। इसके लिए बाकायदा व्हाट्सएप ग्रुप से लेकर यूट्यूब और अन्य एप्स का सहारा भी लिया जा रहा है, लेकिन शिक्षा विभाग ना तो शिक्षकों के पास बनाने के लिए जिला अधिकारी को कह रहे हैं और ना ही शिक्षकों की मजबूरी को समझने का प्रयास कर रहे हैं।
 एक तरफा वेतन कटौती का फरमान सुना देने के बाद शिक्षकों ने आंदोलन करने का मन बना लिया है। हालांकि उच्च शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की मांग को देखते हुए शासन को भी आदेश बदलने के लिए सिफारिश कर दी है लेकिन इस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है।
 लगभग 200 के करीबन प्राध्यापक और प्राचार्य अपने अपने वर्तमान स्थलों पर ही फंसे रह गए हैं।
 यह शिक्षक या तो सप्ताह के अंत की छुट्टी पर आए थे या फिर होली की छुट्टियों पर घर आए हुए थे।
कई शिक्षक तो उत्तराखंड से बाहर हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि शासन आज सोमवार को इस पर संवेदनशीलता से निर्णय जरूर देगा।

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