लॉकडाउन मे बेरोजगारी की फांस के चलते तीन दिन मे चार ने लगाई फांसी। पिछले माह 25 आत्महत्या 

कृष्णा बिष्ट 

लॉकडाउन मे बेरोजगारी की फांस के चलते तीन दिन मे चार ने लगाई फांसी। पिछले माह 25 आत्महत्या 

उत्तराखंड में लॉकडाउन के चलते बेरोजगारी बढ़ने से लोग मानसिक डिप्रेशन में आ गए हैं और भविष्य की चिंता और आर्थिक तंगियों के चलते आत्महत्या का रास्ता अख्तियार कर रहे हैं। पिछले 3 दिनों में चार ने इसी कारण आत्महत्या कर ली है। यह एक बहुत बड़ा संकेत है।

अल्मोड़ा में बेरोजगार युवक ने लगाई फांसी

अल्मोड़ा के चौखुटिया में 3 महीने पहले दिल्ली से लौटे युवक ने आत्महत्या कर ली। 33 वर्षीय दीप कुमार अल्मोड़ा चौखुटिया के फुलई गांव का रहने वाला था। दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करने वाला यह युवक 3 महीने से घर में ही खाली बैठा था।
 आर्थिक तंगी और बेरोजगारी से तंग आकर इसने अपने घर के पास ही दूसरे खाली कमरे को अंदर से बंद कर दिया और आत्महत्या कर ली।
 युवक के घर में दो पुत्र और एक पुत्री है युवक की मौत के बाद घर में उसके माता पिता और पत्नी का रो रो कर बुरा हाल है। दीप कुमार बुधवार दोपहर से ही घर से गायब था और घरवाले उसकी खोजबीन कर रहे थे।

पति की बेरोजगारी से तंग युवती ने लगाई फांसी।

वहीं दूसरी ओर देहरादून के रायपुर में भी जब महिला का पति लॉकडाउन के चलते खाली बैठा था तो महिला ने आत्महत्या कर ली।
 देहरादून के मयूर विहार एकता विहार कॉलोनी में 33 वर्षीय सरिता का पति शराब के ठेके पर काम करता था लेकिन तीन चार महीने से खाली बैठा था। मृतिका का एक 12 वर्षीय बेटा और 7 वर्षीय एक बेटी है।
रायपुर थाना पुलिस का कहना है कि मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करके मोर्चरी में रखवा दिया है।

कोटद्वार मे भी होटल की नौकरी छूटी तो फांसी

2 दिन पहले ही कोटद्वार में लॉकडाउन के कारण नौकरी जाने पर पटेल मार्ग निवासी एक व्यापारी के बेटे ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली । मृतक युवक महाराष्ट्र के पुणे में होटल में काम करता था। 19 वर्षीय करन नाम का यह युवक लॉक डाउन के बाद नौकरी छूटने से घर आ गया था। जब इसके पिता और भाई दुकान में गए थे तो करन ने घर में फांसी लगा दी।
 पुलिस ने बताया कि नौकरी जाने के बाद या युवक कुछ दिनों से परेशान चल रहा था।
कल भी कोटद्वार में एक 40 वर्षीय व्यक्ति ने फांसी लगाकर जान दे दी

मई मे जिंदगी पर मौत भारी

लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के चलते 22 मार्च से आत्महत्या अथवा आत्महत्या के प्रयास के मामले बहुत ज्यादा सामने आए हैं।
 डायल 112 के आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी से 31 जनवरी तक 12 लोगों ने आत्महत्या की। 1 फरवरी से 1 मार्च तक 11 लोगों ने आत्महत्या की। इसके बाद लॉकडाउन शुरू होने के 22 मार्च से लेकर 22 अप्रैल तक 30 लोगों ने आत्महत्या की।
 यह संख्या दोगुनी हो गई और 23 अप्रैल से 11 मई तक 25 लोगों के आत्महत्या के मामले दर्ज किए जा चुके थे। इस महीने के आंकड़े आने अभी बाकी हैं।

 आत्महत्या के मामले सीधे दोगुने हो गए हैं।

मनोचिकित्सकों के अनुसार भविष्य की चिंता को लेकर लोग डिप्रेशन में आकर आत्महत्या कर रहे हैं।
 डॉक्टरों का परिवार वालों को भी यह सुझाव है कि किसी को भी अकेला न रहने दें। सोशल डिस्टेंसिंग शब्द सही नहीं है, इसके बजाय फिजिकल डिस्टेंसिंग कहना ज्यादा उचित होगा। सोशल डिस्टेंसिंग का मतलब भावनात्मक दूरी कतई नहीं है।

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