अलर्ट : ग्राम प्रधानों के दस हज़ार पर मुनाफाखोरों की नज़र। महामारी में सैनीटाइज़रोनॉमी को बनाया भ्रष्टाचार का जरिया

मंजू राणा

पौड़ी जिले में भ्रष्टाचार के आदी हो चुके खिलाड़ियों ने कोरोना महामारी के इस दौर में भी जेब भरने का इंतज़ाम कर लिया है।
सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि प्रधानों को मिले 10 हज़ार की मामूली रकम पर भी धंधेबाज़ों की निगाहें लगी हैं..तो इन धंधेबाज़ों ने माननीय उच्च न्यायालय के एक आदेश की आड़ में ये खेल खेल दिया। जिले की एक हज़ार से अधिक ग्राम पंचायतों में सफाई के लिये एक किट देने का निर्णय लिया गया। इस खेल में पूरे जिले के लिए हैंड सेनिटाइजर, साबुन, ब्लिचिंग, टॉयलेट_क्लीनर, ब्रश इत्यादि एक किट बनाने के लिए कोटेशन माँगे गये। जिला पंचायतीराज अधिकारी के कार्यालय में 8 फर्मों ने कोटेशन डाले, जिसमें प्रति किट 8 हज़ार से अधिक के कोटेशन भरे गये।


जबकि आपदा में अपने गांव की सुरक्षा के लिये प्रधानों ने अपने स्तर से गांव मे आने वाले माइग्रेंट के लिये पहले ही सेनिटाइजर की व्यवस्था की हुई थी । इस सारे खेल में एक कंपनी ने 5400+500 रुपये के कोटेशन डाल दिये। इस रेट के पड़ने के बाद तय कर लिया गया कि इसी रेट पर 15 ब्लॉकों के गांवों को आपस मे बाँट कर बंदरबांट कर ली जाय।

उक्त कंपनी ने सारा माल उधम सिंह नगर की एक फर्म से खरीदा जा रहा है। जबकि और सब सामान श्रीनगर और ऋषिकेश की कई फर्मो में आसानी से उपलब्ध हो सकता था। बावजूद इसके यह सामान पौड़ी से करीब 300 किलोमीटर दूर उधम सिंह नगर से खरीदा जा रहा।

बताया जा रहा है कि इस सारे मामले में भाजपा के एक नेता ने अपने बेटे को भी एक कंपनी में सैट करवा दिया है। जबकि इससे पहले जिला पंचायत द्वारा अभी तक गांवों में 25 लाख से अधिक का छिड़काव किया जा चुका है और अब फिर से जिला पंचायत ने 80 सेनिटाइजर मशीन हाल ही में ख़रीदीं हैं जिनको फिर गांवों में सैनिटाइज के काम में लगाया जायेगा। इस पूरे खेल में जिला प्रशासन भी शामिल बताया जा रहा है।

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