एक्सक्लूसिव: मॉनसून ने पकड़ी रफ्तार, लोगों को सताने लगा आपदा का डर। पनियाली गदेरा लील चुका पहले भी कई जिंदगियाँ

मॉनसून ने पकड़ी रफ्तार, लोगों को सताने लगा आपदा का डर। पनियाली गदेरा लील चुका पहले भी कई जिंदगियाँ

रिपोर्ट- मनोज नौडियाल
कोटद्वार। पनियाली गदेरा कोटद्वार नगर क्षेत्र के आम पड़ाव, शिवपुर, मानपुर, सीताबपुर, सूर्या नगर, काशीरामपुर से होते हुए सुखरौ नदी में पहुंचता है। पहले इस गदेरे की चौड़ाई 70 से 80 फीट थी, लेकिन वर्तमान में अतिक्रमण से सिमटकर 10 से 12 फीट तक रह गया है। मॉनसून सीजन में गदेरा नाला उफान पर आता है। इस गदेरे के चलते कई लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन अतिक्रमण हटाना तो दूर ज्वाइंट सर्वे तक पूरा नहीं हुआ है। आपदा को लेकर प्रशासन कितना गंभीर है, इसका अंदाजा पनियाली गदेरे के किनारे हुए अतिक्रमण से लगाया जा सकता है। यहां कई बार अतिक्रमण के चलते बाढ़ की स्थति आ चुकी है। जिससे काफी जान-माल का नुकसान हो चुका है।हालांकि, प्रशासन ने बीते साल 2019 में आए आपदा के बाद में 143 से ज्यादा जगहों को चिह्नित किया था, लेकिन अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं हो पाई है।

जबकि, सूबे में मॉनसून अपनी रफ्तार पकड़ चुका है। लिहाजा, लोगों को अब आपदा का डर सताने लगा है।दरअसल, पनियाली गदेरा कोटद्वार नगर क्षेत्र के आम पड़ाव, शिवपुर, मानपुर, सीताबपुर, सूर्या नगर, काशीरामपुर से होते हुए सुखरौ नदी में पहुंचता है। पनियाली गदेरा करीब चार किलोमीटर का लंबा सफर कर नगर क्षेत्र के बीच से बहता है। पहले इस गदेरे की चौड़ाई 70 से 80 फीट थी, लेकिन वर्तमान में अतिक्रमण से सिमटकर 10 से 12 फीट तक रह गया है। अब स्थिति ये हो गई है कि, अतिक्रमण के कारण बरसात के समय बाढ़ के पानी को निकालने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती है। जिस कारण बाढ़ का पानी नगर क्षेत्र में घुसकर तबाही मचाता है।

वहीं, लगातार तीन सालों से आ रही बाढ़ के कारण कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। लेकिन प्रशासन फिर भी नींद से नहीं जाग रहा है। पनियाली गदेरे के चलते साल 1989-90 में दो लोगों की मौत हो गई थी। साथ ही भारी नुकसान भी हुआ था। जबकि, साल 1993-94 में नगर के निचले क्षेत्रों के घरों में पानी घुस गया था। तब लोगों का लाखों रुपये का नुकसान हुआ था। हालांकि, उस दौरान किसी तरह की जनहानि नहीं हुई थी। वहीं, साल 2012 में सूर्य नगर में भारी नुकसान हुआ था। लोगों के घरों में भारी मात्रा में पानी-मिट्टी घुस गई थी, तब पूरे नगर में लोगों का लाखों रुपये का नुकसान हुआ था। इसके अलावा 3 अगस्त 2017 को भी पनियाली गदेरे का रौद्र रूप देखने को मिला था। जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी। उस दौरान भी पनियाली गदेरे में आई बाढ़ का पानी आसपास के क्षेत्रों में घुस गया था और लोगों का लाखों रुपये का नुकसान हुआ था।

साल 2018 में पनियाली गदेरे में आई बाढ़ में एक भवन क्षतिग्रस्त हो गया था और एक महिला की मौत हो गई थी। तब भी निचले इलाकों में गदेरे में आई बाढ़ का पानी घुस गया था। बीते साल 2 जुलाई 2019 को गधेरे में आई बाढ़ के कारण आम पड़ाव में लोगों के घरों में पानी घुस गया था। निचले इलाकों के घरों में भी भारी मात्रा में गदेरे में आई बाढ़ का पानी व मिट्टी कीचड़ घुस गया था। जबकि, कौड़िया के पास घरों में घुसे पानी में करंट फैलने से तीन लोगों की मौत हो गई थी।

उक्त मामले में उप जिलाधिकारी योगेश मेहरा का कहना है कि, साल 2019 के अगस्त महीने में कुछ अतिक्रमण वहां पर चिह्नित किया गया था। उस दौरान हर विभाग ने अपने-अपने स्तर से पृथक अतिक्रमण को चिह्नित किया था। जबकि, इसमें एक सयुंक्त कार्रवाई होनी थी, इसलिए मामले के राजस्व विभाग, नगर निगम और सिंचाई विभाग को ज्वाइंट सर्वे के निर्देश दिए गए थे, लेकिन ज्वाइंट सर्वे नहीं हो पाया है। दूसरी ओर वहां पर एहतियातन के तौर पर जो नाले में मलबा था, उसे सिंचाई विभाग की ओर से हटवा दिया गया है। जो अति संवेदनशील स्थान हैं, उन्हें पहले दो बार नोटिस दिए जा चुके हैं। साथ ही खतरे की संभावना को देखते हुए सिंचाई विभाग को भी निर्देशित किया गया है।

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