अंधेर : 250 कर्मचारियों से बिना वेतन महीनों काम लेकर नौकरी से निकाला। सरकार और एजेंसी दोनों ने झाड़ा पल्ला

नमन चंदोला

एक बार फिर कर्मचारियों का शोषण करती जीरो टॉलरेंस सरकार!
जीएसटी काटने से कई महिनों का मानदेय प्राप्त नहीं कर पाए आउटसोर्स कर्मचारी साथ ही नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा।
मामला यह है कि—-
प्रदेश में लगे 250 से ज्यादा कर्मचारियों का मानदेय के नाम पर शोषण तथा मानदेय के भुगतान से पहले ही नौकरी से हटा दिया गया है।
सरकार और एजेंसी दोनों ने झाड़ा पल्ला ।


सूत्रों के अनुसार अब सरकार अपना पल्ला झाड़ते हुए कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई कर सकती है।

 लगभग 250 कर्मचारियों को 15 सितंबर को नौकरी से बाहर किए जाने पर सरकार ने मौन धारण कर लिया है।
ये वे आउटसोर्स कर्मचारी हैं जो कोरोना काल में आफिस ड्यूटी के साथ कोरोना वारियर्स के रुप में भी काम कर रहे थे, लेकिन इन्हें जनवरी 2020 से वेतन/मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है।

इस संबंध में जब कर्मचारियों से बात की गई तो उनमें से कुछ ने बात कि जिसमें एक कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि दिसंबर तक मानदेय का पूरा भुगतान हुआ है लेकिन जनवरी माह के मानदेय को जीएसटी के कारण रोका गया जिसमें दिसंबर तक के मिले मानदेय से जीएसटी को कटा गया है मतलब जनवरी का पूरा मानदेय नियुक्ति से जनवरी तक जीएसटी को लागू करने के कारण समाप्त हो गया।
जनवरी के बाद सीधे अप्रैल व मई में कोरोनकाल के कारण पूरा मानदेय दिया गया व बताया गया कि इन दो माह में जीएसटी नहीं काटा जाएगा।
फ़रवरी मार्च व जून से सितंबर तक का मानदेय अभी तक नही मिला है व कंपनी द्वारा स्पष्ट बता दिया गया है कि कर्मचारियों की तनख्वाह से 18% जीएसटी काटा जाएगा।
जबकि नियुक्ति के समय 8.12% सर्विस टैक्स देने की बात कही गई थी जिससे अब कंपनी पूरी तरह मुकर चुकी है।
जबकि यहां आपको बता दें कि टीडीएस कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड को ब्लैकलिस्ट करने के कारण सितंबर 15 को कंपनी द्वारा नियुक्त 250 से अधिक कर्मचारियों को हटा दिया गया है।

एक अन्य कर्मचारी ने बताया कि नवंबर के बाद से उनके ईपीएफ एकाउंट में जमा की जाने वाली धनराशि को कंपनी ने जमा नहीं किया है। हमें पैसों और रोजगार दोनों की जरूरत है लेकिन दोनों ही हम से छीन लिए गए हैं।

अब ऐसे क्या कारण रहे हैं कि कंपनी द्वारा कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है यह तो जांच के बाद पता चलेगा।
लेकिन मानदेय न देना, कर्मचारियों के इपीएफ एकाउंट में नवंबर के बाद से राशि जमा न करना कंपनी को संदेह के घेरे में ला रहा है।

प्रदेश में आए दिन कर्मचारियों के शोषण की घटनाएं आम हो चुकी हैं लेकिन शासन सरकार का इस ओर ध्यान ना देना कहीं न कहीं इस तरह की कंपनियों को आश्रय देना कहलाएगा।

अब कंपनी व सरकार की इस लड़ाई में 250 से अधिक परिवारों पर रोजी रोटी का संकट आ चुका है।
अब देखना यह है कि यह सरकार जो कि माइनस एक प्रतिशत बेरोजगारी की बात करती है इन 250 से अधिक कर्मचारियों व उनके परिजनों की सुध लेती है या नहीं!

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