मसूरी विधायक जोशी ने ठुकराया शिफनकोर्ट के बेघरों का मांगपत्र

मसूरी विधायक जोशी ने ठुकराया शिफनकोर्ट के बेघरों का मांगपत्र

मसूरी। शिफनकोर्ट से बेघर किये गए मजदूर परिवारों की आवासीय व्यवस्था यथाशीघ्र करने की माॅग वाला माॅग पत्र मसूरी विधायक गणेश जोशी ने कतई ठुकरा दिया। बड़ी मिन्नतों के बाद भी पत्र न लेने पर उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारी एवं कीर्तिनगर नागरिक विकास समिति के संयोजक प्रदीप भण्डारी का पारा चढ़ गया और उन्होंने विधायक जी को वहीं सामने ही सामने खूब खरी खोटी सुनाई। भण्डारी नें कहा कि, विधायक जोशी के होते हुए प्रशासन ने शिफनकोर्ट वासियों से उस कागज पर हस्ताक्षर करवाए जिस पर यह लिखा था कि वे अपनी बात कहने कहीं भी नहीं जाएंगे, यहां तक कि न्यायालय की शरण में भी नहीं जाएंगे। 22 अगस्त शनिवार को मजदूरों को बुला कर सोमवार 25 अगस्त को घर खाली करने को कहा गया, लाचार मजदूरों को कोर्ट में जाने तक का समय भी नहीं दिया गया।

आज नगर पालिका परिषद में शासन द्वारा नामित सभासदों के शपथग्रहण के बाद कीर्तिनगर नागरिक विकास समिति के संयोजक प्रदीप भण्डारी एवं अन्य सदस्य पालिका सभागार में ही मसूरी विधायक गणेश जोशी से मिले। समिति के सदस्यों का एक पत्र था जिसमें शिफनकोर्ट वासियों के स्थाही और अस्थाही आवास की व्यवस्था यथाशीघ्र करवाने का अनुरोध किया गया था। मगर तीन बार अनुरोध करने के बाद भी विधायक द्वारा पत्र लेने से साफ इंकार कर दिया गया। जिसे समिति का अपमान एवं शिफनकोर्ट वासियों की घोर उपेक्षा बताते हुए समिति के संयोजक और उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारी प्रदीप भण्डारी द्वारा भारी आक्रोश व्यक्त किया गया।

उधर से विधायक जोशी ने कहा कि, वे शिफनकोर्ट वासियों की व्यवस्था (विधायक) स्वयं कर रहे हैं, किसी की सलाह की जरूरत नहीं है। जिस पर भण्डारी का पारा चढ़ गया उन्होंने कहा कि ढ़ाई महीनें से भारी कोरोना काल में मजदूर परिवार के गरीब एवं अनुसूचित जाति वर्ग के लोग, मां बहिनें, मासूम बच्चे हवाघर व पार्किंग पर बैठै हैं। उन्हें शराबी छेड़ रहे हैं, लोग कई तरह की टिप्पणी कर रहे हैं। ठंड का प्रकोप और जंगली जानवरों का डर अलग से है। बच्चों की स्कूल की पढ़ाई खराब हो गई है। तब से इन दो महीनों में तो आपने एक भी मजदूर परिवार को नहीं बसाया। वे किस हालत में जी रहे हैं एक बार देखने तक नहीं गए।

भण्डारी ने विधायक के उस बयान पर भी घोर आपत्ति की जिसमें उन्होंने कहा था कि, पालिका बोर्ड ने मजदूरों के लिए आईडीएच क्षेत्र में कोई ज़मीन नहीं दी। उन्होने कहा कि क्या वे (विधायक) आईडीएच क्षेत्र में ज़मीन देखने स्वयं गए, देखकर आए या फिर मजदूरों को यूँही भड़का रहे हैं। भण्डारी ने कहा कि, यदि वे मजदूरों के घर बनाने के प्रति वास्तव में इमानदार हैं तो अभी चलिए आईडीएच क्षेत्र में और स्वयं निरीक्षण कीजिए कि वास्तव में वहां पालिका भूमि है या नहीं।

भण्डारी ने कहा कि, अब विधायक एक नया शिगूफा फूंक रहे हैं कि वे मसूरी के किसी सेठ से जमीन दान में ले रहे हैं, तथा उस पर मजदूरों के लिए आवास बनाऐंगे। भण्डारी ने कहा कि यदि वे वास्तव में मजदूरों के लिए घर बनाना चाहते हैं तो पालिका ने जो भूमि चयनित की है उस पर क्यों घर नहीं मजदूर आवास बना रहे हैं। मसूरी में कोई मजदूरों को यूँही पानी तक नहीं पिलाता, तो कोई सेठ जमीन दान कैसे दे सकता है। कम से कम अपनी ज़मीन तो नहीं दे सकता और देगा तो इसके पीछे क्या खेल है यह भी देखने का विषय होगा।

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