ओमप्रकाश पार्ट-3: ओमप्रकाश ने की मेडिकल कालेज में विवादित की नियुक्ति। डाक्टरों ने दिए इस्तीफे

कुलदीप एस.राणा// क्यों इस्तीफा देने को मजबूर हुए श्रीनगर राजकीय मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल , कौन है डॉ.आई एस योग ! जिनकी कॉलेज में ज्वाइनिंग  से खफा एनेस्थीसिया विभाग के सभी प्रोफेसर्स और स्टाफ ने सामुहिक  इस्तीफा दिया!! सूबे को डॉक्टर्स की सौगात देने के बजाय अव्यस्थाओं का अड्डा बन चुके वीरचन्द्र सिंह गढ़वाली श्रीनगर […]

कुलदीप एस.राणा//

क्यों इस्तीफा देने को मजबूर हुए श्रीनगर राजकीय मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल ,

कौन है डॉ.आई एस योग ! जिनकी कॉलेज में ज्वाइनिंग  से खफा एनेस्थीसिया विभाग के सभी प्रोफेसर्स और स्टाफ ने सामुहिक  इस्तीफा दिया!!

सूबे को डॉक्टर्स की सौगात देने के बजाय अव्यस्थाओं का अड्डा बन चुके वीरचन्द्र सिंह गढ़वाली श्रीनगर राजकीय मेडिकल कालेज एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है

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अनियमिताओं और  विभागीय कर्मचारियों के उत्पीड़न के आरोप में वर्ष 2016 में कॉलेज के प्रिंसिपल पद से हटाई गई  डॉ आईएस योग को अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने कालेज में  पुनः नियुक्ति दे दी है।योग को नियुक्ति दिए जाने के बाद से कालेज में उनका विरोध शुरू हो गया है।

ओमप्रकाश ने आइ एस योग को नियुक्ति देने के लिए हाईकोर्ट की एक आदेश की आड़  लेते हुए योग को एक साल के लिए तैनात किया है।

हकीकत यह है कि वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में हटाई गई योग अपनी बहाली के लिए कोर्ट चली गई थी।

गौरतलब है कि योग को 16 जनवरी 2009 को सिर्फ एक साल की संविदा पर तैनात किया था। इसके बाद इनकी संविदा एक एक साल के लिए लगातार बढ़ाई जाती रही।

जब इनकी संविदा तमाम शिकायतों और अनियमितताओं के कारण समाप्त कर दी गई तो यह कोर्ट चली गई ।

शासन की मिलीभगत के चलते कोर्ट में ढंग से पैरवी नहीं की गई। इसके चलते हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि योग के विषय में 3 सप्ताह के अंदर स्पष्ट आर्डर किया जाए तथा तब तक के लिए इनकी सेवाएं समाप्त न की जाए।

बस फिर क्या था ओमप्रकाश को योग को नियुक्त करने का बहाना मिल गया और उन्होंने योग को एक साल के लिए संविदा पर फिर से तैनात कर दिया ।ओमप्रकाश चाहते तो उनके नियुक्ति आदेश में कोर्ट के अग्रिम आदेशों तक की नियुक्ति आदेश भी जारी कर सकते थे। अथवा हाईकोर्ट के आदेश के अगेंस्ट डबल बेंच में अथवा हायर कोर्ट में भी जा सकते थे।

किंतु जब मंसा ही साफ न थी तो फिर इससे बेहतर क्या तिकड़म हो सकती थी।

योग की दोबारा नियुक्ति से मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों में खासा आक्रोश है और उन्होंने अपने सशर्त इस्तीफे सौंप दिए हैं।

सितंबर 11, 2017 को ही ओम प्रकाश ने डॉ. योग को मेडीकल कालेज के एनेस्थीसिया विभाग में एक वर्ष के लिए  प्रोफेसर के पद पर पुनः नियुक्ति का आदेश दिया और उसी शाम को कालेज के  डॉ. सीएमएस रावत ने अपना इस्तीफा निदेशालय को सौंप दिया।

सितंबर 13, 2017 को डॉ.योग द्वारा श्रीनगर मेडिकल कालेज में  में ज्वाइनिंग  देते ही विरोध में  एनेस्थीसिया विभाग के 3 प्रोफेसर और समस्त स्टाफ ने प्रभारी प्रिंसिपल को सामूहिक इस्तीफा सौंप दिए हैं।

शुरुआत से ही विवादित रही है डॉ योग

वर्ष 2015-16 श्रीनगर मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल के पद पर नियुक्त रह चुकी डॉ योग को वित्तीय अनियमितताओं से लेकर संकाय कर्मचारियों के मानसिक शोषण करने के आरोप में शासन द्वारा प्रिंसिपल के पद से हटाते हुए कालेज से बाहर का रास्ता दिखाया दिया था।  जैसे ही चिकित्सा शिक्षा विभाग भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस की बात करने वाले मुख्यमंत्री के चहेते नॉकरशाह ओम प्रकाश के पास आया ,डॉ.योग की कालेज में वापसी हो गयी ।

ओमप्रकाश के ऐसे कदमों से न सिर्फ उत्तराखंड में काम करने का माहौल खराब हो रहा है ।बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं भी चरमरा रही है। इन सब का असर जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली भाजपा सरकार पर भी पड़ना बिल्कुल तय है।

पर्वतजन पत्रिका ने उत्तराखंड में अंधेर नगरी चौपट राज करने वाले ओमप्रकाश के भ्रष्टाचार खिलाफ जो सिरीज चलाई है। इसके जवाब में उन्होंने अपने कुछ चमचे पत्रकारों के द्वारा पर्वतजन के ही खिलाफ मुहीम छेड़ने का असफल प्रयास किया।

किंतु जब उन के चमचे पत्रकार भी फेल हो गए तो ओम प्रकाश स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए छुट्टी पर चले गए हैं।

किंतु लंबी छुट्टी पर जाते-जाते उन्होंने ऐसे कई विवादास्पद निर्णय ले लिए हैं जिनका खामियाजा उत्तराखंड को लंबे समय तक भुगतना पड़ेगा।

आने वाले अंको में हम आपकी जानकारी के लिए ओमप्रकाश के काले कारनामों को प्रकाश में लाते रहेंगे।

यदि आपके पास भी इनसे संबंधित कोई जानकारी हो तो हमारे WhatsApp नंबर 94120 56112 पर संपर्क कर सकते हैं।

आपका नाम पता गोपनीय रखा जाएगा। उत्तराखंड के भविष्य के लिए आपका योगदान जरूरी भी है

ओमप्रकाश वर्तमान सरकार का सबसे ताकतवर नौकरशाह है। और इनके भ्रष्टाचार के छींटे मुख्यमंत्री पर भी पड़ते रहे हैं ।

इसीलिए कोई भी ओमप्रकाश के खिलाफ ना जुबान खोल सकता है ना कलम चलाने की हिम्मत रखता है। पर्वतजन ने इसकी शुरुआत की है तो हम सभी का दायित्व बनता है कि इन के काले कारनामों को अधिक से अधिक पाठकों के संज्ञान में लाएं तथा इन खबरों को अधिक से अधिक शेयर करें। आपकी राय भी महत्वपूर्ण है।

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