सिल्वर सिटी मॉल मर्डर: UPI पेमेंट से खुला राज, साजिश की परतें बेनकाब

देहरादून के थाना राजपुर क्षेत्र स्थित सिल्वर सिटी मॉल में 13 फरवरी को हुई झारखंड के गैंगस्टर विक्रम शर्मा की हत्या के मामले में उत्तराखंड एसटीएफ को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। जांच के दौरान जमशेदपुर के बागबेड़ा निवासी राजकुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया है। एसटीएफ की टीम आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर देहरादून ले आई है, जहां उसे न्यायालय में पेश किया जाएगा।

 

जांच एजेंसियों के अनुसार राजकुमार सिंह पर आरोप है कि उसने अपनी यूपीआई आईडी के माध्यम से हरिद्वार में किराए पर ली गई बाइक का भुगतान किया था। पुलिस को संदेह है कि इसी वाहन का इस्तेमाल शूटरों ने वारदात के दौरान किया।

 

घटना 13 फरवरी की सुबह की है, जब सिल्वर सिटी मॉल के जिम से बाहर निकलते समय विक्रम शर्मा पर दो हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उसकी मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों शूटर मौके से फरार हो गए और देहरादून से हरिद्वार की ओर निकल गए।

 

तफ्तीश में सामने आया कि हमलावर घटना से पहले हरिद्वार रेलवे स्टेशन के समीप एक होटल में ठहरे थे। बताया जा रहा है कि देहरादून पहुंचने के लिए उन्होंने हरिद्वार से ही स्कूटी और मोटरसाइकिल किराए पर ली थी। हत्या के बाद वही किराए के वाहन इस्तेमाल कर वे फरार हो गए।

 

एसटीएफ के एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की भूमिका आर्थिक लेन-देन से जुड़ी हुई पाई गई है। यूपीआई भुगतान के जरिए शूटरों की बाइक का किराया चुकाने के तथ्य सामने आए हैं, जिनकी पुष्टि के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।

 

इधर, हत्याकांड को अंजाम देने वाले दोनों शूटर अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। पुलिस कारोबारी राजकुमार सिंह के पुत्र यशराज सिंह को इस साजिश का मुख्य सूत्रधार मान रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि यशराज ने शूटरों को धनराशि उपलब्ध कराई और उनके भागने के लिए परिवहन की व्यवस्था की। बताया जाता है कि यशराज रेलवे से जुड़े ठेकेदारी कार्य से संबद्ध है और उसके झारखंड में आपराधिक संपर्क होने की आशंका जताई जा रही है।

 

इस बहुचर्चित हत्याकांड की परतें खोलने के लिए उत्तराखंड पुलिस की टीमें झारखंड, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में लगातार दबिश दे रही हैं। हालांकि, घटना के दस दिन बाद भी मुख्य हमलावर पुलिस गिरफ्त से दूर हैं। जांच एजेंसियां आर्थिक लेन-देन, कॉल डिटेल्स और आपसी संपर्कों की कड़ियां जोड़कर पूरे षड्यंत्र का खुलासा करने में जुटी हैं।

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