विधायक ने की श्रम विभाग में हुई घोटालों की सीबीआई जांच की मांग, तब हरक सिंह थे श्रम मंत्री

रिपोर्ट- जगदम्बा कोठारी

विधानसभा चुनाव के बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं दिग्गज नेता हरक सिंह रावत की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। एक तो हरक सिंह रावत पहले ही सत्ता से बेदखल हैं दूसरी तरफ लैंसडाउन विधायक महंत दिलीप रावत ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

 लैंसडाउन से भाजपा के नवनिर्वाचित विधायक महंत दिलीप रावत ने वर्ष 2017-18 से वर्ष 2021 तक श्रम विभाग के अंदर हुए घोटाले की सीबीआई जांच की मांग करी है। 

विधायक ने गुरुवार को मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि वर्ष 2017-18 से वर्ष 2021 तक श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के लिए अनेक कार्यक्रम चलाए गए।‌ जिसमें सरकार द्वारा श्रमिकों को सिलाई मशीन, साइकिल, लाइटें, विभिन्न प्रकार के यंत्र एवं श्रमिकों की लड़कियों की शादी के लिए धनराशि दी गई। 

परंतु संज्ञान में आया है कि इनके आवंटन में भारी अनियमितताएं हुई हैं एवं मानकों के विपरित आवंटन किया गया है। साथ ही विधायक ने आरोप लगाया है कि नियमों को ताक पर रखकर कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं को मनमाने तरीके से धन का आवंटन किया गया और वास्तविक पात्र लोगों को योजना का लाभ ही नहीं दिया गया और इन अनियमितताओं के खिलाफ कई लोग न्यायालय भी जा चुके हैं। 

विधायक दिलीप रावत ने मुख्यमंत्री से मांग करी है कि उक्त प्रकरण की जांच सीबीआई से कराई जाए। 

हालांकि पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से हरक सिंह रावत के नाम का उल्लेख नहीं किया है लेकिन पिछली सरकार में हरक सिंह रावत श्रम मंत्री थे और विवादों के चलते उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री से श्रम विभाग छोड़ने की मांग भी करी थी।

यहां बता दें कि दिलीप रावत लैंसडाउन विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर भाजपा से ही बागी हरक सिंह रावत की पुत्रवधू अनुकृति रावत को हराकर सदन पहुंचे हैं।

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