उत्तराखंड की लोककला को अलग ही पहचान दे रही ‘ऐंपण गर्ल’ निशू पुनेठा

पिथौरागढ़- विशाल सक्सेना

उत्तराखंड राज्य अपनी विशेष कला और संस्कृति के लिए पहचाना जाता है l पहाड़ी राज्य होने के चलते यहां का रहन-सहन और संस्कृति इसे अन्य राज्यों से अलग बनाती है l

उत्तराखंड की एक ऐसी ही पारंपरिक कला है ऐंपण, जो विशेष रूप से कुमाऊं में हर मांगलिक कार्यों में सफेद और लाल रंग से बनाई जाती हैl आधुनिकता के दौर में यह लोककला सिमटती जा रही है, लेकिन बदलते जमाने के साथ ऐंपण कला को भी विकसित करने का काम किया हैl पिथौरागढ़ की निशू पुनेठा ने जो उत्तराखंड की लोककला को दुनिया के सामने रख रही हैंl

देवभूमि की ऐंपण गर्ल निशू पुनेठा ने लोककला को अलग-अलग चीजों में उतारकर अपनी इस अद्भुत कलाकारी से देश-विदेश में ऐंपण को एक नई पहचान दिलाई हैl निशू के बनाए ऐंपण आर्ट वर्क की डिमांड आज पूरे देशभर से आ रही है, वहीं अन्य लोगों को भी ऐंपण कला से जोड़कर रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही हैं, जिसके लिए उन्होंने ‘वसुधारा’ नाम से समूह बनाया हुआ है l

 उत्तराखंड में पीढ़ी दर पीढ़ी घरों की दहलीज पर शुभ कार्यों और त्योहारों पर लाल रंग की मिट्टी जिसे गेरू कहा जाता है, उसके ऊपर चावल को पीसकर अलग-अलग मांगलिक कार्यों के हिसाब से अलग-अलग ऐंपण की आकृति बनाई जाती है बदलते समय के साथ गेरू और चावल की जगह लाल और सफेद रंग के पेंट ने ले ली वर्तमान में ज्यादातर लोग घरों में पक्के रंगों से ही ऐंपण हैंl

 

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