भाजपा नेता की हार, भूली सरकार सड़क का करार

हाल ही में हिमाचल प्रदेश में संपन्न विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत हिमाचल की रोहड़ू विधानसभा में भाजपा के लिए वोट मांगने गए। ये वो सीट है जहां से पांच बार कांग्रेस के वीरभद्र सिंह विधायक रहे। इस बार भारतीय जनता पार्टी को यकीन था कि मोदी लहर को भुनाने में वो इस बार कामयाब रहेगी। चूंकि यह विधानसभा उत्तराखंड से लगती हुई है, इसलिए भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के प्रत्याशी को हराने के लिए एक बड़ी घोषणा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से रोहडू़ में करवाई। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने घोषणा की कि वर्षों से इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी की जीत के कारण विकास नहीं हुआ है और यदि रोहडू़ के लोग भाजपा प्रत्याशी को जिताते हैं तो वे उत्तराखंड सीमा से लगी धौला-डोडरा-क्वार की १२ किमी. सड़क बना देंगे। जिससे रोहडू़ विधानसभा के लोगों को भारी फायदा होगा।
त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राहडू़ के लोगों को यकीन दिलाया कि इस सड़क के बनने के बाद हिमाचल के लोग हरकीदून से लेकर अपने उत्पादों का बेहतर व्यापार करने में सक्षम होंगे। त्रिवेंद्र सिंह रावत की इस घोषणा को भाजपा ने रोहडू़ में घर-घर जाकर सुनाया, किंतु जब चुनाव परिणाम आया तो भाजपा प्रत्याशी १० हजार वोटों से इस सीट पर चुनाव हार गए।
प्रचंड बहुमत के बावजूद रोडहू़ की सीट की हार से न सिर्फ हिमाचल में हलचल है, बल्कि लोगों को अब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की उस घोषणा का भी धरातल पर आने का इंतजार है। यह पहला अवसर है कि जब एक राज्य के मुख्यमंत्री ने दूसरे राज्य के चुनाव में घोषणा कर वोट इकट्ठे करने की जुगत लगाई, किंतु वह फलीभूत नहीं हो पाया।

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