कच्ची सड़क से त्रस्त ग्रामीणों का एलान: “रोड़ नहीं तो वोट नहीं”

स्टोरी(कमल जगाती, नैनीताल):- ऊत्तराखण्ड में नैनीताल के आसपास के गांव की कच्ची सड़क वहां के ग्रामीणों को दर्द दे रही हैं। तमाम शिकायत कर चुके ग्रामीण अब थक हारकर मोटरमार्ग की मांग के साथ आंदोलन की धमकी दे रहे हैं।

नैनीताल शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर बाजूंन से फगुनियाखेत तक लगभग 4 किलोमीटर मोटरमार्ग की मांग को लेकर ग्रामीण 2006 से आंदोलन करते आए हैं।

उत्तराखंड निर्माण के बाद से ही फगुनियाखेत के ग्रामीण उनके गाँव को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए अपने प्रत्यावेदन सरकार और प्रशासन को देते आए हैं। आरोप है कि चुनाव के वक्त, क्षेत्रीय विधायक और सांसद उनकी मांगों को उच्च स्तर पर रखने का अस्वाशन देते आये हैं, लेकिन जीतने के बाद वो अपने वादे भूल जाते हैं। गाँव के मुख्य मार्ग से नहीं जुड़े होने के कारण मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे छोटे बच्चों को डोली में ले जाया जाता है। गाँव के उदपादन जैसे सब्जी, फल दूध, घी, दही आदि को नजदीकी शहर तक पहुंचाने में समय लग जाता है, जिससे उदपाद खराब या बासी हो जाता है। स्कूली बच्चों को भी हर रोज पैदल ही इन उबड़ खाबड़ पथरीले रास्तों से गुजरकर आना जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक और प्रशासन को प्रत्यावेदन दिया, लेकिन इनकी सुध किसी ने नहीं ली। अब मजबूर होकर ग्रामीण आंदोल की राह जाने की ठान रहे हैं।

बताया गया कि वर्ष 2006 में बजून से फगुनियाखेत तक मोटरमार्ग के निर्माण के लिए 27 हैकटेयर वन भूमि का गैर वानिकी कार्यों के लिए लो.नि.वि.को प्रत्यावर्तन विषयक हस्तान्तरित की गई, जिसमें वन भूमि के सापेक्ष 5.40 है. क्षतिपूरक वृक्षारोपण के लिए संयुक्त निरीक्षण कोटद्वार राजस्व विभाग द्वारा किया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि राज्य बनने के बाद से ही उन्हें मोटरमार्ग नसीब नहीं हुआ है। उन्हें अपने रोजमर्रा के कामों के लिए 4 किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता है। उन्होंने रोड नहीं तो वोट नहीं के नारे के साथ ही मतदान का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है।

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