घोटाला: फर्जी हस्ताक्षरों से ट्रांसफर। तीन अभियंता अटैच, FIR की अटकलें

देहरादून। उत्तराखंड सिंचाई विभाग में एक सनसनीखेज घोटाला सामने आया है, जहां सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार के फर्जी हस्ताक्षरों से तीन अपर सहायक अभियंताओं का स्थानांतरण कर दिया गया। जब इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ, तो सचिव इस तरह के ट्रांसफर आदेशों से खुद भी हैरान रह गए। उन्होंने तत्काल इन फर्जी आदेशों को […]

देहरादून। उत्तराखंड सिंचाई विभाग में एक सनसनीखेज घोटाला सामने आया है, जहां सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार के फर्जी हस्ताक्षरों से तीन अपर सहायक अभियंताओं का स्थानांतरण कर दिया गया। जब इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ, तो सचिव इस तरह के ट्रांसफर आदेशों से खुद भी हैरान रह गए। उन्होंने तत्काल इन फर्जी आदेशों को निरस्त करने के आदेश दिए।

साथ ही सचिव के आदेश के बाद विभाग के प्रमुख अभियंता सुभाष चंद्र ने तुरंत इन ट्रांसफर आदेशों को रद्द कर दिया और संबंधित अभियंताओं को मूल खंडीय कार्यालय से अटैच कर दिया। अब सवाल उठ रहा है कि क्या इस घोटाले पर FIR होगी या इसे दबाने की कोशिश की जाएगी?

कैसे हुआ फर्जी ट्रांसफर?

सूत्रों के मुताबिक, 31 जनवरी को इन फर्जी आदेशों के तहत तीन अभियंताओं के ट्रांसफर किए गए—

  1. जयदीप सिंहपीएमजीएसवाई सिंचाई खंड चंबा से अवस्थापन खंड उत्तरकाशी
  2. सुमित कुमारपीएमजीएसवाई सिंचाई खंड कोटद्वार से पीएमजीएसवाई सिंचाई खंड श्रीनगर प्रथम
  3. चिरंजी लाल – जमरानी बांध निर्माण खंड-2, हल्द्वानी से सिंचाई खंड हल्द्वानी उपखंड-1

गड़बड़ी का पर्दाफाश कैसे हुआ?

ट्रांसफर के कुछ समय बाद प्रमुख अभियंता सिंचाई की मुलाकात सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार से हुई। बातचीत के दौरान जब प्रमुख अभियंता ने ट्रांसफर की चर्चा की तो सचिव हैरान रह गए और पूछा, “कौन से ट्रांसफर?”

जब प्रमुख अभियंता ने शासन से जारी आदेश दिखाए, तो सचिव ने अपने हस्ताक्षरों को फर्जी बताते हुए कार्यवाही के आदेश दिए । इस खुलासे के बाद विभाग में हड़कंप मच गया और 21 फरवरी को तीनों ट्रांसफर निरस्त कर दिए गए।

बलि का बकरा बना कनिष्ठ सहायक, असली गुनहगार कौन?

जांच में पता चला कि यह गड़बड़ी अनुभाग के अधिकारियों द्वारा की गई थी। हालांकि, किसी बड़े अधिकारी पर कार्रवाई करने के बजाय कनिष्ठ सहायक अमित सेमवाल को बलि का बकरा बनाकर हटा दिया गया। सवाल यह उठ रहा है कि क्या सिर्फ कनिष्ठ सहायक ही जिम्मेदार था, या इसके पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा था?

क्या होगी FIR? अभियंताओं की भूमिका भी संदिग्ध

इस पूरे प्रकरण के बाद अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि विभाग इस मामले में FIR दर्ज कराएगा या इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा

इसके अलावा, फर्जी आदेशों से ट्रांसफर हुए अभियंताओं की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। क्या वे इस गड़बड़ी से वाकिफ थे, या फिर उन्हें भी गुमराह किया गया?

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