बड़ी खबर: CAU के उपाध्यक्ष धीरज भंडारी की सदस्यता निरस्त..

देहरादून: क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (CAU) में लंबे समय से चल रहे अंदरूनी विवाद का अंत हो गया है। एसोसिएशन के ओंबड्समैन और एथिक्स ऑफिसर ने उपाध्यक्ष रहे धीरज भंडारी की सदस्यता निरस्त कर दी है। यह निर्णय 8 अप्रैल को जारी आदेश के तहत लिया गया, जिसमें कहा गया है कि धीरज भंडारी की गतिविधियां एसोसिएशन के खिलाफ गंभीर किस्म की मानी गईं, और वे अपने पद के दुरुपयोग, गोपनीय जानकारी लीक करने व संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाने के दोषी पाए गए।

गोपनीय दस्तावेजों का लीक, लीगल नोटिस और पुलिस शिकायतें बनीं बर्खास्तगी का कारण
धीरज भंडारी पर आरोप है कि वे लंबे समय से एसोसिएशन के गोपनीय दस्तावेजों को थर्ड पार्टी से लीक कर रहे थे। इसके अलावा उन्होंने एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों को बदनाम करने के लिए कानूनी नोटिस, पुलिस शिकायत जैसे कदम उठाए, जिससे संगठन की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा।

अपेक्स काउंसिल ने भेजा था मामला ओंबड्समैन को

एसोसिएशन के कई पदाधिकारियों ने इन गतिविधियों की शिकायत अपेक्स काउंसिल से की थी। काउंसिल ने पूरे मामले को ओंबड्समैन और एथिक्स ऑफिसर के पास अंतिम निर्णय के लिए भेज दिया था। ओंबड्समैन ने धीरज भंडारी के आचरण को अनुशासनहीनता और कदाचार की श्रेणी में रखते हुए उनकी सदस्यता समाप्त कर दी।

कानूनी सलाहकार बीएस नेगी और सचिव माहिम वर्मा ने की थी गंभीर शिकायतें
क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के कानूनी सलाहकार व वरिष्ठ अधिवक्ता बीएस नेगी ने शिकायत में बताया कि धीरज भंडारी ने उन्हें जानबूझकर नीचा दिखाने के उद्देश्य से पत्र लिखा और उनके कानूनी ओपिनियन को चुनौती दी, जबकि उन्हें इसका कोई अधिकार नहीं था। वहीं सचिव माहिम वर्मा ने शिकायत में बताया कि धीरज भंडारी ने बाहरी विशेषज्ञों से सलाह ली और गोपनीय दस्तावेज साझा किए, जो संगठन के नियमों का उल्लंघन था।

माहिम वर्मा ने आगे कहा कि भंडारी ने पुलिस में फंड के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लगाकर शिकायत दर्ज करवाई, जबकि एसोसिएशन की नियमावली के अनुसार पहले अपेक्स काउंसिल और फिर ओंबड्समैन से संपर्क करना आवश्यक होता है। ऐसा न कर सीधे पुलिस में शिकायत करने से संगठन की छवि को आघात पहुंचा।

अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष भी हुए थे निशाने पर
एसोसिएशन के अध्यक्ष गिरीश गोयल और कोषाध्यक्ष मानस मेघवाल ने भी शिकायत की कि धीरज भंडारी ने उन्हें बदनाम करने के उद्देश्य से कानूनी नोटिस भेजा। इसी तरह सीईओ मोहित अग्रवाल ने भी शिकायत की कि भंडारी ने उन पर भी झूठे आरोप लगाए और छवि धूमिल करने का प्रयास किया।

भंडारी ने किया बचाव, बताया खुद पर लगे आरोपों को निराधार
धीरज भंडारी की ओर से उनकी कानूनी प्रतिनिधि चित्रांजलि नेगी ने ओंबड्समैन के सामने बचाव में कहा कि सभी आरोप निराधार हैं और यह एक सोची-समझी साजिश है उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा भेजे गए नोटिस एसोसिएशन के हित में थे।

ओंबड्समैन का सख्त रुख, गंभीर कदाचार माना गया
जस्टिस एम.एन. भंडारी (पूर्व मुख्य न्यायाधीश), जो ओंबड्समैन और एथिक्स ऑफिसर हैं, ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि धीरज भंडारी, जो खुद एक पदाधिकारी हैं, उनसे संगठन के नियमों का पालन करने की अपेक्षा अधिक थी, लेकिन उन्होंने उल्टे सहयोगियों को कानूनी नोटिस भेजे और गोपनीय दस्तावेज बाहरी विशेषज्ञों से साझा किए। इससे विवाद हल होने के बजाय संगठन में अविश्वास और असहयोग का माहौल बना।

गंभीर आरोपों के आधार पर सदस्यता निरस्त
ओंबड्समैन ने यह भी कहा कि भंडारी द्वारा संगठन के वित्तीय दस्तावेज थर्ड पार्टी को भेजना, कानूनी स्वीकृति के बिना थर्ड पार्टी ओपिनियन लेना और संगठन के अन्य पदाधिकारियों को बिना आधार के आरोपित करना गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए उनकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी गई।

भविष्य में दोबारा सदस्य बनने के लिए स्वतंत्र
हालांकि, ओंबड्समैन ने यह भी स्पष्ट किया कि धीरज भंडारी भविष्य में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड की नई सदस्यता के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें नियमानुसार प्रक्रिया का पालन करना होगा।

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