बड़ी खबर: खाद्य विभाग में नमक घोटाला। मुकदमा दर्ज, गोदाम सील..

अंत्योदय और गरीब परिवारों को उचित मूल्य पर मिलने वाले आयोडीन युक्त नमक की आपूर्ति में बड़ा घोटाला सामने आया है। उत्तरकाशी के नेताला क्षेत्र के सरकारी गोदाम के लिए गुजरात से भेजा गया 9148 किलो (करीब 365 बैग) नमक चार महीने तक गायब रहा, जबकि डिलीवरी रसीद में गोदाम प्रभारी के हस्ताक्षर और मुहर […]

अंत्योदय और गरीब परिवारों को उचित मूल्य पर मिलने वाले आयोडीन युक्त नमक की आपूर्ति में बड़ा घोटाला सामने आया है। उत्तरकाशी के नेताला क्षेत्र के सरकारी गोदाम के लिए गुजरात से भेजा गया 9148 किलो (करीब 365 बैग) नमक चार महीने तक गायब रहा, जबकि डिलीवरी रसीद में गोदाम प्रभारी के हस्ताक्षर और मुहर मौजूद थी। वहीं, विकासनगर के एक प्राइवेट गोदाम में पांच माह से 25 क्विंटल नमक डंप पड़ा मिला, जिसे गोशाला भेजने की कोशिश की जा रही थी।

मामला कैसे खुला?

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब जनवरी में भेजे गए नमक की आपूर्ति पर स्थानीय उपभोक्ताओं ने सवाल उठाए और मीडिया ने इसे उजागर किया, जिसके बाद खाद्य आयुक्त चंद्रेश कुमार ने संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए। उन्होंने जिला पूर्ति अधिकारी आशीष कुमार को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए तीन दिन में रिपोर्ट तलब की है।

कैसे लापता हुआ नमक?

गुजरात की एक प्राइवेट कंपनी “मेसर्स डायनेमिक ट्रेडलिंक” के माध्यम से 11 जनवरी 2025 को नेताला के सरकारी गोदाम के लिए 9148 किलो आयोडीन युक्त नमक भेजा गया था। डिलीवरी चालान पर गोदाम के पूर्ति निरीक्षक के हस्ताक्षर और मोहर तक मौजूद हैं। मगर नेताला के पूर्ति निरीक्षक मालचंद भंडारी का दावा है कि जनवरी से अप्रैल तक कोई भी नमक प्राप्त नहीं हुआ, केवल मई में 90 क्विंटल नमक मिला, जिसे वितरित किया गया।

दूसरी तरफ, प्राइवेट गोदाम में डंप नमक!

इस बीच, विकासनगर के एक निजी गोदाम में मार्च से ही 25 क्विंटल नमक पड़ा मिला। जब गोदाम मालिक इसे ट्रक में लादकर गोशाला भेजने की तैयारी कर रहा था, तब पुलिस ने नमक और ट्रक को अपनी निगरानी में ले लिया। अब यह नमक भी संदेह के घेरे में आ गया है।

जांच में सामने आया है कि इस नमक की खेप को सरकारी गोदाम में न ले जाकर निजी गोदाम में रखवाया गया था, और इसे गैर-कानूनी रूप से खपाने की कोशिश हो रही थी।

एफआईआर और कार्रवाई की शुरुआत

पूर्ति निरीक्षक राखी ने ठेकेदार तनिष्क गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। आरोप है कि उन्होंने सरकारी नमक को अवैध रूप से निजी गोदाम में रखवाया। अब पुलिस और खाद्य विभाग इस पूरे नेटवर्क की सक्रियता से जांच कर रहे हैं।

पुलिस ने एक्शन लेते हुए तनिष्क गुप्ता के खिलाफ वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया हैं और गोदाम को भी सील कर दिया हैं।

सवालों के घेरे में है पूरा आपूर्ति तंत्र

इस पूरे मामले ने राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

  • डिलीवरी रसीद पर हस्ताक्षर और मुहर फर्जी हैं या नहीं?
  • नमक यदि जनवरी में भेजा गया तो वह मई तक कहां था?
  • प्राइवेट गोदाम में नमक कैसे पहुंचा, किसकी मिलीभगत थी?
  • जब नमक नहीं मिला, तो चार महीने राशन कार्ड धारकों को क्या दिया गया?

आयुक्त ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट

खाद्य आयुक्त चंद्रेश कुमार ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी तथ्यों की गहनता से जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यह जांच सिर्फ लापता नमक की नहीं, बल्कि जनवरी से जून तक नमक वितरण की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करेगी।

यह घोटाला सिर्फ सरकारी आपूर्ति में लापरवाही या भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि गरीबों के हक पर डाका है। ऐसे में जरूरत है कि इस मामले की निष्पक्ष और कड़ी जांच हो, दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, और भविष्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और पारदर्शी बनाया जाए।

Also Read This

ब्रेकिंग: पूर्व IAS बने उत्तराखंड सेवा का अधिकार आयोग के आयुक्त

देहरादून: उत्तराखंड प्रशासनिक सेवा से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। पूर्व आईएएस अधिकारी दीपेंद्र चौधरी को उत्तराखंड सेवा का अधिकार आयोग का आयुक्त...

एसआईआर: 11.90 लाख मतदाताओं की मैपिंग पूरी। 5.47 लाख नोटिस जारी, 3.95 लाख की सुनवाई संपन्न

देहरादून, 21 अगस्त। नीरज उत्तराखंडी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत देहरादून जिले में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम तेजी से आगे बढ़...

Related Posts