Uttarakhand News: दीपावली से पहले राशन विक्रेताओं को मिल सकता है लाभांश बढ़ोतरी का तोहफा

देहरादून,  अक्टूबर 2025:
उत्तराखंड सरकार ने राज्य के 9 हजार से अधिक सरकारी राशन विक्रेताओं (Ration Dealers) के लिए दीपावली से पहले बड़ी खुशखबरी दी है।

खाद्य आपूर्ति मंत्री रेखा आर्या ने संकेत दिए हैं कि राज्य खाद्य योजना (State Food Scheme) के तहत मिलने वाले लाभांश को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के बराबर किया जा सकता है। इससे राशन विक्रेताओं को आर्थिक राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।

 राशन विक्रेताओं को मिल सकता है 180 रुपये प्रति क्विंटल का लाभांश

वर्तमान में केंद्र सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत प्रति क्विंटल 180 रुपये का लाभांश दे रही है, जबकि राज्य सरकार राज्य खाद्य योजना (SFY) में केवल 50 रुपये प्रति क्विंटल का लाभांश देती है।

राशन विक्रेताओं की लंबे समय से यह मांग रही है कि दोनों योजनाओं के तहत लाभांश की दर समान (Equal) की जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए खाद्य आयुक्त चंद्रेश कुमार ने शासन को प्रस्ताव भेजा है कि राज्य खाद्य योजना के तहत भी 180 रुपये प्रति क्विंटल लाभांश दिया जाए।

मंत्री रेखा आर्या ने दिए समान लाभांश के निर्देश

खाद्य आपूर्ति मंत्री रेखा आर्या ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राशन विक्रेताओं को मिलने वाला लाभांश दोनों योजनाओं में समान किया जाए। मंत्री ने कहा —

“राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और राज्य खाद्य योजना दोनों के लाभार्थियों के बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। राशन विक्रेताओं को समान मेहनत के लिए समान लाभ मिलना जरूरी है।”

प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है और मंजूरी मिलते ही राशन विक्रेताओं को राज्य खाद्य योजना में भी 180 रुपये प्रति क्विंटल का लाभांश मिलना शुरू हो जाएगा।

वर्तमान लाभांश संरचना

योजना का नामसरकारवर्तमान लाभांश (₹/क्विंटल)प्रस्तावित लाभांश (₹/क्विंटल)
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA)केंद्र सरकार180180
राज्य खाद्य योजना (SFY)राज्य सरकार50180 (प्रस्तावित)

 दीपावली से पहले मिल सकता है तोहफा

अगर शासन से मंजूरी मिल जाती है तो यह फैसला दीपावली से पहले लागू किया जा सकता है। इससे प्रदेशभर के 9,000 से अधिक राशन डीलरों को आर्थिक राहत मिलेगी और उनकी आय में वृद्धि होगी।

 राशन विक्रेताओं की मांग पूरी होने की उम्मीद

राशन विक्रेताओं के संघ लंबे समय से यह मांग उठा रहे थे कि उन्हें दोनों योजनाओं में समान लाभांश दिया जाए, क्योंकि उन्हें वितरण कार्य में समान मेहनत करनी पड़ती है। शासन के इस प्रस्ताव से उनकी यह मांग अब पूरी होती दिख रही है।

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