आबकारी विभाग में बियर घोटाला

सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के जीरो टॉलरेंस वाले आबकारी महकमे में लॉकडाउन में जो कुछ हुआ, वो किसी से छिपा नहीं है और शायद वो कभी होगा भी नहीं। सेनेटाइजर बेचे जाने से लेकर ठेके आवंटन में जल्दबाजी निजी हितों के चलते ईडीपी पर कुंडली एएफलटू से माल निकासी में देरी समेत कई ऐसी घटनाएं हैं, जो सीधे सीधे कई सवाल पैदा करती है। दुर्भाग्य यह कि विपक्ष में बैठी कांग्रेस ने मित्रता के सारे रिकार्ड तोड़ दिया है। आबकारी के मसले पर कांग्रेस की रहस्मयी चुप्पी सवाल पैदा करती है।
कोटद्वार बियर शाप बंद माल शिफ्ट कर दिया
गढवाल मंडल के सबसे ताकतवर जिले, जहां से राज्य की राजनीति में तीन-तीन मंत्री सत्तासीन हैं। उस जिले के जिला आबकारी अधिकारी की अवशेष स्टाक रिपोर्ट गंभीर खुलासा कर रही है। 31 मार्च से बंद हो चुकी कोटदार नगर की बियर शाप की बियर नई खुली देवी मोटर मार्ग स्थित शराब दुकान में भेज दी गई।
डीईओ राजेंद्र लाल की मुख्यालय को भेजी गई अवशेष स्टाक रिपोर्ट में ये जानकारी चौंकाने वाला खुलासा कर रही है। नियमत: ये दुकान बंद होने पर अवशेष स्टाक यानि ठेके में बची बियर सीधे एफएलटू को पहुंचाई जानी चाहिए थे, लेकिन जब आबकारी मुख्यालय के ताकतवर साहब का साथ है, फिर चिंता की क्या बात है। ये नियमों का उल्लंघन के साथ ही सीधे ठेकेदारों के दबाव प्रभाव व निजी फायदे की ओर इशारा भी है।


इंस्पेक्टर सस्पेंड फिर डीईओ को संरक्षण क्यों
बीते दिनों पौड़ी जिले के कोटद्वार आबकारी इंस्पेक्टर पहले अटैच फिर निलंबित कर दिए गये थे। वजह दो पेटी शराब को लेकर कई चर्चाएं रही थी। फिर डीईओ पौड़ी राजेंद्र लाल जो इतने बड़े स्टॉक को शिफ्ट करा गए, वो कैसे बचे हुए।
मुख्यालय में अवशेष स्टाक की रिपोर्ट तो आबकारी आयुक्त तक पहुंची होगी। ऐसी चर्चाएं है कि आबकारी मुख्यालय में बैठे एक ताकतवर अफसर ने इन्हें फुल पावर दे दी है।


शासन पहली बार इतना कमजोर
राज्य के आबकारी मुख्यालय पर भले ही तमाम आरोप लगते रहो हो, लेकिन शासन में जिम्मेदार अफसरो ने सदैव न्यायोचित कार्य किया व आरोपों पर सख्त एक्शन किया है। पहली बार ऐसा दिख रहा है कि हर मसले पर शासन खामोश व लाचार है।

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