- मोहना गांव में राजस्व रिकॉर्ड पर बड़ा सवाल, न्यायालय से राहत के बाद भी कब्जे की कोशिश का आरोप
- पुत्र से मारपीट, धमकी और जातिसूचक गाली-गलौज का भी आरोप
चकराता/देहरादून, 4 सितंबर 2026। नीरज उत्तराखंडी
जिस महिला के नाम पर जमीन थी, वही महिला अगर सरकारी कागजों में मृत हो जाए और उसकी जमीन दूसरे लोगों के नाम चढ़ जाए तो इसे महज जमीन का विवाद कहा जाए या फिर सरकारी अभिलेखों के दुरुपयोग का गंभीर मामला? जनजातीय क्षेत्र चकराता के मोहना गांव में सामने आया जमीन विवाद ऐसे ही कई असहज सवाल खड़े कर रहा है।
मोहना गांव निवासी दलित महिला रुणी देवी पत्नी स्वर्गीय केशरू ने आरोप लगाया है कि उनके जीवित रहते कुछ लोगों ने उन्हें कागजों में मृत दर्शाकर उनकी पैतृक जमीन अपने नाम करा ली।
इसके बाद कथित तौर पर जमीन को अन्य लोगों को भी बेच दिया गया। परिवार के अनुसार, विवाद को लेकर न्यायालय की शरण ली गई, जहां फैसला रुणी देवी के पक्ष में आने की बात कही जा रही है,लेकिन कथित तौर पर कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
कागजों में मौत, हकीकत में जमीन पर कब्जा!
मामले का सबसे गंभीर पहलू यही है कि यदि रुणी देवी के आरोप सही हैं तो आखिर एक जीवित महिला को सरकारी दस्तावेजों में मृत दिखाया कैसे गया?
- किस दस्तावेज के आधार पर उनकी मृत्यु दर्ज हुई?
- किसने मृत्यु प्रमाणपत्र अथवा संबंधित अभिलेख प्रस्तुत किए?
- राजस्व रिकॉर्ड में नाम परिवर्तन किस अधिकारी या कर्मचारी के स्तर पर हुआ?
- दस्तावेजों का सत्यापन किसने किया?
- और सबसे अहम—यदि महिला जीवित थी तो उसकी पैतृक जमीन का हस्तांतरण किस आधार पर हुआ?
ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब केवल पुलिस जांच से नहीं, बल्कि राजस्व अभिलेखों की भी गहन जांच से सामने आ सकता है।
न्यायालय का फैसला, फिर भी विवाद क्यों?
पीड़ित परिवार का कहना है कि जमीन को लेकर न्यायालय में मामला चला और फैसला रुणी देवी के पक्ष में आया। इसके बावजूद अब जमीन पर दोबारा कब्जे की कोशिश किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है।
परिवार के अनुसार, विवादित भूमि पर वर्तमान में रुणी देवी का कब्जा है। जमीन पर पुराने सेब के पेड़ भी मौजूद हैं। परिवार इन्हें लंबे समय से भूमि के उपयोग और कब्जे से जोड़कर देखता है।
ऐसे में सवाल यह भी है कि यदि न्यायालय के आदेश के बाद भी विवादित जमीन पर कब्जे को लेकर तनाव पैदा हो रहा है तो संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी स्थिति स्पष्ट करने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं?
जमीन विवाद ने लिया टकराव का रूप
परिवार का आरोप है कि जमीन पर कब्जे की कोशिश के दौरान रुणी देवी के पुत्र के साथ मारपीट की गई। उसके साथ गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के भी आरोप लगाए गए हैं।
इतना ही नहीं, पीड़ित पक्ष ने विवाद के दौरान जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अनुसूचित जाति से जुड़े व्यक्ति के साथ कथित उत्पीड़न का मामला भी बन सकता है।
एसडीएम के दरबार में पहुंचा परिवार
लगातार बढ़ते विवाद के बीच रुणी देवी अपने परिवार के साथ एसडीएम कालसी प्रेमलाल के कार्यालय पहुंचीं और पूरे मामले की शिकायत की।
बताया गया है कि एसडीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना चकराता पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। पीड़ित पक्ष के अनुसार पुलिस स्टाफ ने शिकायत ले ली है।
अब असली परीक्षा पुलिस जांच की है।
सिर्फ मारपीट और धमकी की शिकायत दर्ज करना पर्याप्त नहीं होगा। यदि शिकायत में लगाए गए जमीन संबंधी आरोप भी जांच के दायरे में हैं तो राजस्व रिकॉर्ड से लेकर कथित नामांतरण और जमीन की बिक्री तक पूरी कड़ी की पड़ताल जरूरी होगी।
जांच का केंद्र बने राजस्व अभिलेख
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज राजस्व रिकॉर्ड हो सकते हैं। रुणी देवी को किस तारीख और किस आधार पर मृत दर्शाया गया, उसके बाद भूमि किसके नाम दर्ज हुई और फिर उसका हस्तांतरण किन लोगों के पक्ष में हुआ—इन सभी कड़ियों को जोड़ने पर कथित जमीन हड़पने की पूरी कहानी सामने आ सकती है।
यदि रिकॉर्ड में किसी जीवित व्यक्ति को मृत दर्शाए जाने की पुष्टि होती है तो यह बेहद गंभीर मामला होगा। ऐसी स्थिति में केवल जमीन पाने वाले व्यक्ति ही नहीं, बल्कि दस्तावेज तैयार करने, प्रस्तुत करने, सत्यापित करने और रिकॉर्ड में प्रविष्टि करने की पूरी प्रक्रिया की जांच आवश्यक होगी।
सवाल सिर्फ रुणी देवी की जमीन का नहीं
मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि आरोप एक दलित महिला की पैतृक जमीन से जुड़े हैं। पहाड़ के दूरस्थ गांवों में भूमि ही परिवारों की सबसे बड़ी आर्थिक और सामाजिक पूंजी होती है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को कथित तौर पर कागजों में मृत दिखाकर उसकी जमीन का हस्तांतरण कर दिया जाए तो यह सिर्फ एक परिवार के अधिकार का सवाल नहीं, बल्कि राजस्व व्यवस्था में भरोसे का सवाल भी बन जाता है।
अब देखना यह होगा कि पुलिस और राजस्व विभाग इस मामले को सामान्य पारिवारिक या भूमि विवाद मानकर आगे बढ़ते हैं या फिर दस्तावेजों की तह तक जाकर यह पता लगाते हैं कि आखिर रुणी देवी की कथित ‘कागजी मौत’ किसने लिखी और उस मौत से जमीन का मालिक कौन बन गया।
फिलहाल पीड़ित परिवार प्रशासन से न्याय की मांग कर रहा है और पुलिस के स्तर पर कार्रवाई की प्रतीक्षा है। मामले में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच, राजस्व अभिलेखों और न्यायालयीन दस्तावेजों की जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगीए


