नैनीताल। कमल जगाती
उत्तराखंड हाईकोर्ट में उप शराब की दुकानों को लेकर दायर जनहित याचिका पर अहम फैसला सामने आया है। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि नई आबकारी नीति के तहत प्रदेश में उप शराब की दुकानें नहीं खोली जाएंगी। इसके साथ ही टिहरी जिले की धनौल्टी तहसील के हटवाल गांव में प्रस्तावित विवादित उप दुकान भी नहीं खुलेगी।
इस आश्वासन के बाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया।
हटवाल गांव में उप शराब की दुकान का ग्रामीणों ने किया था विरोध
याचिकाकर्ता एवं जौनपुर (टिहरी) से जिला पंचायत सदस्य सीता देवी ने जनहित याचिका में कहा था कि धनौल्टी तहसील के हटवाल गांव में उप शराब की दुकान खोले जाने के खिलाफ ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
याचिका में यह भी कहा गया कि नई आबकारी नीति में स्पष्ट प्रावधान है कि प्रदेश में उप शराब की दुकानें नहीं खोली जाएंगी, बल्कि केवल पहले से संचालित दुकानों का ही संचालन जारी रहेगा।
डीएम ने बंद कराया, आबकारी आयुक्त ने दिया था स्टे
ग्रामीणों के विरोध के बाद जिला प्रशासन ने उप दुकान को बंद करने के आदेश जारी किए थे। हालांकि बाद में आबकारी आयुक्त ने इन आदेशों पर रोक (स्टे) लगा दी थी, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने याचिकाकर्ता को आबकारी आयुक्त के स्टे आदेश को चुनौती देने की अनुमति भी दी।
आबकारी आयुक्त ने सभी जिलाधिकारियों को जारी किए निर्देश
सुनवाई के दौरान आबकारी आयुक्त ने न्यायालय को बताया कि आबकारी नीति के प्रावधान 3.14 के तहत सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि प्रदेश में कोई उप शराब की दुकान नहीं खोली जाएगी।
निर्देशों के अनुसार, वर्ष 2024-25 से संचालित दुकानों का ही संचालन जारी रहेगा, जबकि उप दुकानें खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
हाईकोर्ट ने किया जनहित याचिका का निस्तारण
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने की।
सरकार की ओर से उप शराब की दुकानें नहीं खोलने का स्पष्ट रुख सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया।
क्या है फैसले का असर?
इस निर्णय के बाद साफ हो गया है कि धनौल्टी तहसील के हटवाल गांव में उप शराब की दुकान नहीं खुलेगी। साथ ही प्रदेशभर में नई आबकारी नीति के तहत उप शराब की दुकानों के संचालन पर रोक जारी रहेगी।





