हाईकोर्ट न्यूज़ : खनन को लेकर नया शासनादेश हुआ निरस्त।

अनुज नेगी देहरादून।प्रदेश को सबसे अधिक राजस्व देने वाला खनन विभाग में विभाग में सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। प्रदेश के नेताओं,अफसरों और खनन माफियाओं ने राजस्व को दो सौ करोड़ की चपत लगा दी है। वही अब नैनीताल हाईकोर्ट ने खनन पट्टों के आंवटन में करोड़ों के गोलमाल होने की आशंका जताते हुए […]

अनुज नेगी

देहरादून।प्रदेश को सबसे अधिक राजस्व देने वाला खनन विभाग में विभाग में सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। प्रदेश के नेताओं,अफसरों और खनन माफियाओं ने राजस्व को दो सौ करोड़ की चपत लगा दी है।

वही अब नैनीताल हाईकोर्ट ने खनन पट्टों के आंवटन में करोड़ों के गोलमाल होने की आशंका जताते हुए सरकार के साशनदेश 2021 को रद्द कर दिया। नैनीताल हाईकोर्ट ने इस नीति को मौलिक अधिकारों का हनन मानते हुए यह टिप्पणी की कि यह खनन घोटाला 2जी स्पैक्ट्रम की तर्ज पर हुआ है। सरकार को एक साल में इस नीति से 2000 करोड़ से भी अधिक की चपत लगी है। हाईकोर्ट ने इस मामले में एक माह पहले फैसला दे दिया था, लेकिन पिछले 30 दिन में कोई भी नेता, सामाजिक संगठन, अखबार, चैनल कुछ नहीं बोला। सब मूक हैं मानों सब मर गये। 

नैनीताल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रमेश खुल्बै की बेंच ने 26 सितम्बर 2022 को 28 अक्टूबर 2021 के उस शासनादेश को निरस्त कर दिया, जिसमें सरकार ने उपखनिज संशोधन अधिनियम 2001 में संशोधन किया गया था। दरअसल, अदालत ने यह नियम पूरी तरह से निजी भूमिधारियों को लाभ पहुंचाने के लिए माना है। इसके तहत खनन माफिया, अफसरों और नेताओं का गठजोड़ उजागर हुआ है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की है कि इस नीति से प्रदेश सरकार को 2000 करोड़ से भी अधिक का राजस्व नुकसान हुआ। 

बातादें कि प्रदेश सरकार ने समतलीकरण के नाम पर खनन पट्टों के लाइसेंस जारी किये थे। इसे हल्द्वानी के याचिकाकर्ता सतेंद्र तोमर ने अदालत में चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि इस संशोधन से निजी व्यक्तियेां और स्टोन क्रशर संचालकों को रिसाइकिलिंग का लाभ मिल रहा है। इसमें पट्टाधारकों को निजी खननकर्ताओं के बीच में रेत, बजरी, रोड़ी, कंकरीट, मिट्टी की दरों को लेकर भारी अंतर था। समतलीकरण के नाम निजी भूमिधरी सात रुपये की दर से उपखनिज दे रहे थे तो पट्टाधारकों को 42 रुपये में बेचने पड़ रहे थे। पट्टाधारकों की रॉयल्टी हर साल 10 प्रतिशत बढ़ाने की शर्त भी थी। सीधी सी बात यह है कि खनन माफिया, नेता और अफसर राज्य की कमाई नही चाहते बल्कि खुद की जेब भरते रहे। 

तर्क दिया गया कि नीलामी में बोली लगाने वाले पट्टाधारकों को 460 रुपये आरबीएम बेचना पड़ रहा है। जबकि निजी नाप भूमि के पट्टाधारक 80 से 85 रुपये प्रति टन के हिसान से खनन सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। नैनीताल में 43 पट्टेे लाइसेंस जो कि 360 करोड के दिये गयो। ऊधमसिंह नगर में 160 करोड़ के निजी पट्टे दिये गये।  इस कारण सरकार को 2000 करोड़ के राजस्व की हानि हुई।वही अब प्रदेश सरकार इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा रही है।

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