देहरादून: उत्तराखंड रोडवेज की कार्यप्रणाली और वित्तीय प्रबंधन को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। टनकपुर-मनाली बस सेवा अगस्त 2018 में बंद होने के बावजूद हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (HRTC) को करीब आठ साल तक निर्धारित दर से भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है।
परिवहन निगम मुख्यालय को टनकपुर डिपो की ओर से भेजी गई गोपनीय रिपोर्ट में 95 महीने के दौरान कुल 25 लाख 76 हजार 875 रुपये के भुगतान का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बस सेवा बंद होने के बाद भी संबंधित परमिट को समय रहते सरेंडर नहीं किया गया। इसके चलते निगम को हर महीने भुगतान करना पड़ता रहा। अब इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के नाम उपलब्ध कराने और आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
2018 में बंद हुई बस सेवा, फिर भी चलता रहा भुगतान
टनकपुर-मनाली बस सेवा 23 अगस्त 2018 से बंद थी। इसके बावजूद परिवहन निगम की ओर से हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम को निर्धारित दर के अनुसार भुगतान जारी रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, बस सेवा बंद होने के बाद यदि संबंधित परमिट को तत्काल सरेंडर कर दिया जाता तो निगम को यह अतिरिक्त राशि नहीं देनी पड़ती। लेकिन परमिट सरेंडर नहीं होने के कारण लंबे समय तक भुगतान जारी रहा।
इस अवधि में कुल 95 महीने का हिसाब सामने आया है। इस आधार पर निगम की ओर से करीब 25.77 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
हर महीने 27,125 रुपये का भुगतान
रिपोर्ट में बताया गया है कि टनकपुर-मनाली बस सेवा बंद होने के बावजूद हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम को हर महीने 27,125 रुपये का भुगतान किया जाता रहा।
इस तरह करीब आठ साल तक बंद सेवा के नाम पर भुगतान जारी रहने से परिवहन निगम को लाखों रुपये का वित्तीय नुकसान होने की बात सामने आई है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब बस सेवा वर्ष 2018 में ही बंद हो गई थी तो संबंधित अधिकारियों ने परमिट समय पर सरेंडर क्यों नहीं किया?
आर्थिक संकट से जूझ रहे रोडवेज में सामने आया मामला
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब उत्तराखंड परिवहन निगम पहले से ही आर्थिक दबाव से गुजर रहा है। निगम को नई बसों की खरीद, पुरानी और खराब बसों को संचालन में लाने के साथ कर्मचारियों के वेतन और अन्य खर्चों को लेकर भी वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसे में एक ऐसी बस सेवा के लिए वर्षों तक भुगतान होते रहना, जो पहले ही बंद हो चुकी थी, निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
परिवहन मंत्री ने जांच और कार्रवाई की बात कही
परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता का मामला है। उन्होंने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की बात कही है।
अब जांच के जरिए यह स्पष्ट होगा कि बस सेवा बंद होने के बाद परमिट सरेंडर क्यों नहीं किया गया, भुगतान किस स्तर से जारी रहा और इस पूरी प्रक्रिया के लिए कौन-कौन अधिकारी जिम्मेदार थे।
25.76 लाख के भुगतान का उठ रहा बड़ा सवाल
टनकपुर-मनाली बस सेवा का संचालन बंद होने के बावजूद 95 महीने तक भुगतान होने का मामला परिवहन निगम के लिए गंभीर वित्तीय सवाल खड़े करता है। विभागीय रिपोर्ट में भी जिम्मेदार अधिकारियों के नाम उपलब्ध कराने और आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।
अब इस मामले में होने वाली जांच और जिम्मेदारी तय होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 25 लाख 76 हजार 875 रुपये के भुगतान की जिम्मेदारी किसकी थी और निगम को हुए नुकसान की भरपाई कैसे होगी।






