हाईकोर्ट ब्रेकिंग: देहरादून डीएम का ये आदेश निरस्त। अब दिए ये निर्देश

ब्रेकिंग न्यूज़(कमल जगाती, नैनीताल):- ऊत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने देहरादून के ‘पिनैकल रैजीडेंसी’ मामले में डी.एम.के फायर एन.ओ.सी.देने के आदेश को किया रद्द, दोबारा सुनवाई के निर्देश। ऊत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने देहरादून के जाखन स्थित ‘पिनैकल रैजीडेंसी’ ग्रुप हाउसिंग कॉम्प्लेक्स मामले में सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार […]

ब्रेकिंग न्यूज़(कमल जगाती, नैनीताल):-

ऊत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने देहरादून के ‘पिनैकल रैजीडेंसी’ मामले में डी.एम.के फायर एन.ओ.सी.देने के आदेश को किया रद्द, दोबारा सुनवाई के निर्देश।

ऊत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने देहरादून के जाखन स्थित ‘पिनैकल रैजीडेंसी’ ग्रुप हाउसिंग कॉम्प्लेक्स मामले में सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने देहरादून के जिलाधिकारी के 18 जनवरी 2023 के उस आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया है, जिसमें मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सी.एफ.ओ.)को बिल्डर(मैसर्स दिशा हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड)को फायर एन.ओ.सी.जारी करने का निर्देश दिया गया था।

न्यायालय ने यह निर्णय ‘पिनैकल रैजीडेंसी अपार्टमेंट्स ओनर्स एसोसिएशन’की जुलाई 2026 रिट याचिका में आदेश दिया और इस पूरे मामले को नए सिरे से नियमानुसार तय करने के लिए जिलाधिकारी देहरादून को वापस भेज दिया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिजय नेगी ने बताया कि जाखन में लगभग 30 मीटर ऊंची पिनैकल रैजीडेंसी नामक इमारतों वाला एक ग्रुप हाउसिंग कॉम्प्लेक्स है। उसमें कुल 86 आवासीय फ्लैट और स्टूडियो अपार्टमेंट हैं। वहां रहने वालों के संगठन ने याचिका दायर कर आरोप लगाया कि बिल्डर ने स्वीकृत भवन योजना के नियमों के विपरीत कुछ ऐसे अवैध निर्माण खड़े कर दिए जो आग लगने की स्थिति में निवासियों के जीवन को खतरे में डालते हैं।

मुख्य अग्निशमन अधिकारी द्वारा आयोजित फायर मॉक ड्रिल की रिपोर्ट में पाया गया कि कॉम्प्लेक्स के प्रवेश द्वार के पास बने एक आर.सी.सी.स्लैब के कारण बड़ी दमकल गाड़ियों और हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म का अंदर जाना असंभव है। इसके अलावा रैंप पर अत्यधिक ढलान, खुले स्थानों को बगीचे में बदलना, सैटबैक क्षेत्र में रखे गए गार्डन प्लांटर्स और मात्र 3.70 मीटर की ऊंचाई पर झूलती बिजली की लाइनें आपातकालीन परिस्थितियों में दमकल वाहनों के रास्ते में बड़ी बाधा पाई गईं।

​ उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि फायर सेफ्टी ऑफिसर एक वैधानिक प्राधिकारी है, जिसकी जिम्मेदारी आग लगने की स्थिति में लोगों के जान-माल की रक्षा करना है, इसलिए उनके द्वारा बताई गई सुरक्षा खामियों को इस तरह सरसरी तौर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

न्यायालय ने कहा कि डी.एम.ने केवल बिल्डर द्वारा दिखाए गए एक डंपर के प्रवेश वाले वीडियो को आधार बनाकर अपील स्वीकार कर ली, जबकि सुरक्षा ऑडिट विशेषज्ञों का काम है और किसी हितधारक द्वारा खुद बनाए गए वीडियो को अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

इसके साथ ही न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2018 में प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ड्राइंग के आधार पर जारी की गई एन.ओ.सी.के जरिए बाद में किए गए अवैध और खतरनाक निर्माणों को वैध नहीं ठहराया जा सकता।

न्यायालय ने याचिका को मंजूर करते हुए जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि वे सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर प्रदान करते हुए कानून के दायरे में इस अपील पर दोबारा निष्पक्ष निर्णय लें।

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