- मोरी/ उत्तरकाशी। 28 सितंबर 2026,रिपोर्ट -नीरज उत्तराखंडी
- सेब तुड़ान के बाद जरूरी कॉपर दवा के लिए बाजार पर निर्भर मोरी के बागवान
- उद्यान केंद्रों में दवा नहीं, अनुदान का लाभ नहीं मिल रहा; निदेशालय में रेट तय न होने से खरीद अटकी
सेब की फसल तुड़ान के बाद बागों में पेड़ों की देखभाल का महत्वपूर्ण समय चल रहा है, लेकिन मोरी के सेब बागवानों को उद्यान विभाग की ओर से दी जाने वाली ब्लाइटॉक्स (कॉपर) दवा के लिए बाजार का सहारा लेना पड़ रहा है।
उद्यान संचालन दल केंद्रों में दवा उपलब्ध नहीं होने से बागवानों में नाराजगी है। बागवानों का आरोप है कि जिस दवा को उन्हें अनुदान पर मिलना चाहिए, वही दवा अब उन्हें बाजार से महंगे दामों पर खरीदनी पड़ रही है।
सेब बागवान भगवान सिंह रांगड़, भजन सिंह, हाकम सिंह रावत और भगत सिंह राणा ने बताया कि सेब की फसल तुड़ाई के बाद हर वर्ष पेड़ों पर ब्लाइटॉक्स (कॉपर) का छिड़काव किया जाता है। इस समय बागवानों को दवा की आवश्यकता है, लेकिन उद्यान विभाग के संबंधित केंद्रों पर दवा उपलब्ध नहीं है। नतीजतन किसानों को निजी दुकानों से दवा खरीदनी पड़ रही है।
बागवानों का कहना है कि सेब उत्पादन में पहले ही खाद, दवा, मजदूरी, परिवहन और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में यदि सरकारी योजना के तहत मिलने वाली दवा भी समय पर उपलब्ध न हो तो इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ सीधे किसान की जेब पर पड़ता है।
विभाग ने 30 हजार किलो की मांग भेजी, खरीद फिर भी नहीं
मामले में उद्यान विभाग मोरी के प्रभारी चंद्रपाल रिंतूवाल का कहना है कि मोरी ब्लॉक के लिए 30,000 किलो कॉपर की डिमांड भेजी जा चुकी है। लेकिन निदेशालय स्तर पर दवा के रेट निर्धारित नहीं होने के कारण खरीद प्रक्रिया में देरी हुई है।
#विभाग का यह स्पष्टीकरण बागवानों की परेशानी को और गंभीर सवाल के रूप में सामने लाता है—जब सेब तुड़ान के बाद हर वर्ष दवा की जरूरत पहले से तय है तो इसकी खरीद प्रक्रिया फसल तुड़ान के समय तक क्यों नहीं पूरी हो पाई?
रेट तय होने तक किसान बाजार में जेब ढीली करे?
बागवानों का कहना है कि विभागीय प्रक्रिया पूरी होने तक बागवान इंतजार नहीं कर सकता। पेड़ों पर निर्धारित समय पर छिड़काव जरूरी होने के कारण किसान बाजार से दवा खरीदने को मजबूर है। ऐसे में निदेशालय स्तर पर रेट तय होने में देरी का सीधा आर्थिक असर किसान पर पड़ रहा है।
बागवानों ने उद्यान विभाग से मांग की है कि कॉपर दवा की आपूर्ति तत्काल उद्यान केंद्रों पर सुनिश्चित की जाए और अनुदानित दर पर दवा उपलब्ध कराई जाए।
सवाल सिर्फ दवा का नहीं, व्यवस्था की समयबद्धता का भी
मोरी क्षेत्र में बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका सेब बागवानी से जुड़ी है। ऐसे में बागवानों को समय पर कृषि निवेश उपलब्ध कराना उद्यान विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि विभाग को 30 हजार किलो कॉपर की आवश्यकता का अनुमान था तो इसकी खरीद प्रक्रिया पहले से पूरी नहीं होना विभागीय तैयारी पर सवाल खड़े करता है।
#बागवानों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब अनुदान कागजों तक सीमित न रहकर सही समय पर खेत और बाग तक पहुंचे।
मुख्य तथ्य
|मोरी में कॉपर दवा का मामला
– दवा: ब्लाइटॉक्स (कॉपर)
– उपयोग: सेब के पेड़ों पर छिड़काव
– मांग: 30,000 किलो
– मांग भेजने वाला विभाग: उद्यान विभाग, मोरी
– दवा की स्थिति: उद्यान संचालन दल केंद्रों पर उपलब्ध नहीं
– बागवानों की परेशानी: बाजार से महंगी दवा खरीदने की मजबूरी
– विभाग का कारण: निदेशालय स्तर पर रेट निर्धारित नहीं
– बागवानों की मांग: तत्काल आपूर्ति और अनुदानित दर पर दवा
बड़ा सवाल
जब दवा की मांग हर साल रहती है और इस बार 30 हजार किलो की डिमांड भी भेजी जा चुकी है, तो रेट निर्धारण और खरीद प्रक्रिया फसल तुड़ान से पहले क्यों नहीं पूरी की गई?


