उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की मांग तेज

उत्तराखंड, जिसे देवभूमि के रूप में जाना जाता है, यहां हजारों प्राचीन और पौराणिक मंदिर स्थित हैं। इनमें से कई स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने की मांग हाल के दिनों में जोर पकड़ रही है।

 

हरिद्वार के हर की पैड़ी घाट पर यह मुद्दा सबसे पहले उभरा, जहां गंगा सभा ने गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है। संगठन ने ब्रिटिश काल के 1916 के नगर निगम नियमों का हवाला देते हुए इसकी वकालत की है। हिंदूवादी संगठनों और स्थानीय लोगों के समर्थन से यह मांग अब प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों तक फैल गई है।

 

इस बीच, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। समिति के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि बदरीनाथ, केदारनाथ सहित बीकेटीसी के अधीन आने वाले लगभग 52 मंदिरों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह वर्जित किया जाएगा। इस संबंध में आगामी बोर्ड बैठक में एक प्रस्ताव पारित करने की योजना है, जिससे इन पवित्र स्थलों की धार्मिक मर्यादा और पवित्रता की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार का रुख स्पष्ट है। प्रदेश के सभी धार्मिक, पौराणिक स्थल और देवस्थान विभिन्न संगठनों जैसे तीर्थ सभा, गंगा सभा, केदार सभा, बदरी-केदार मंदिर समिति तथा संत समाज द्वारा संचालित होते हैं। इन संस्थाओं की राय और सुझावों के आधार पर ही सरकार आगे की कार्रवाई करेगी।

 

उन्होंने आगे बताया कि ये स्थान अत्यंत प्राचीन महत्व रखते हैं। इसलिए, पहले से मौजूद संबंधित कानूनों और नियमों का गहन अध्ययन किया जा रहा है। उसी के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा।

 

यह मांग उत्तराखंड की धार्मिक पहचान और परंपराओं को संरक्षित रखने के उद्देश्य से उठाई जा रही है, जिस पर अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा हो रही है।

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