गढ़वाल: उत्तराखंड की गढ़वाल यूनिवर्सिटी में शिक्षा व्यवस्था का अजब गजब हाल।

रिपोर्ट: जयप्रकाश नोगाई

परीक्षाओं में 90 प्रतिशत तक प्रश्न सेलेब्स से बाहर के पूछे जा रहे हैं। प्रश्न पत्र पर पेपर कोड गलत लिखा होना आम बात हो गई है।

अब इसे लेकर छात्रसंघ अध्यक्ष सुधांशु थपलियाल के नेतृत्व में गढ़वाल यूनिवर्सिटी छात्र संघ ने संघर्ष का ऐलान कर दिया।

छात्र संघ ने आरोप लगाए हैं। कि अगर कोई छात्र इस समस्या को लेकर परीक्षा नियंत्रक या उप कुलसचिव के पास जा रहा है तो उसे उनके द्वारा डराया धमकाया जा रहा है, समस्या का निवारण तो बहुत दूर की बात रही।

पेपर में 90% प्रश्न आउट ऑफ सिलेबस
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में छात्रों ने बीए चतुर्थ सेमेस्टर की संस्कृत विषय की परीक्षा को दोबारा करवाए जाने की मांग उठाई है। जिसके लिए बृहस्पतिवार 27 जून को छात्रों ने आक्रोश में आकर विवि की कुलपति से ऑफिस के बाहर प्रदर्शन किया, छात्रों का आक्रोश देखकर कुलपति ने इस विषय पर चिंतन कर बैठक की।

जानकारी के अनुसार 29 मई को बीए चतुर्थ सेमेस्टर के छात्रों को जो संस्कृत विषय का पेपर दिया गया था उसमें मिस प्रिंट और आउट ऑफ़ स्लेबस प्रश्न पूछे गए थे, छात्रों का कहना है कि परीक्षा में 10 में से 9 प्रश्न “आउट ऑफ सिलेबस” थे, जिस कारण छात्रों ने परीक्षा का बहिष्कार किया।

दोबारा परीक्षा कराने की मांग
कुलपति से वार्ता के दौरान HNB Garhwal Central University के छात्रों ने गढ़वाल विवि की कार्यशैली पर रोष व्यक्त किया। छात्रों ने सेमेस्टर परीक्षा आयोजित करने, प्रश्न पत्रों में गड़बड़ी, परीक्षा कॉपियों की गुणवत्ता और विवि के अधिकारियों की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े किए।

छात्रों ने विवि प्रशासन से दोबारा परीक्षा कराने की मांग की है छात्रसंघ अध्यक्ष सुधांशु थपलियाल ने बताया कि परीक्षा के दौरान छात्रों को कई तरह की दिक्कतों झेलनी पड़ती हैं। पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्न परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र में दिए जा रहे हैं, कई बार तो परीक्षाओं में पेपर कोड गलत दे दिया जाता है। जिसके चलते छात्रों को परीक्षा का बहिष्कार करना पड़ रहा है।

बोर्ड पर लिखकर बदलवाए जाते हैं प्रश्न: छात्रसंघ अध्यक्ष सुधांशु थपलियालसु धांशु थपलियाल ने विवि प्रशासन के परीक्षा अनुभाग पर प्रत्यक्ष आरोप लगाते हुए कहा कि कई बार परीक्षा शुरू होने के समय पर ही प्रश्नपत्र प्रिंट किए जाते हैं। जिससे पेपर में मिसप्रिंट हुआ रहता है। प्रश्न पत्रों में त्रुटि होने के कारण बोर्ड पर लिख कर प्रश्न बदलवाए जाते हैं, जब छात्र अपनी समस्याओं को लेकर परीक्षा नियंत्रक या परीक्षा उप कुलसचिव के पास जाते हैं, तो छात्रों को डराया धमकाया जाता है। छात्रों ने ऐसे करप्ट कर्मचारियों, अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाने की भी मांग की है।

पीएचडी प्रवेश परीक्षा में धांधली के आरोप

धरने पर बैठे छात्रों ने आरोप लगाया की, विवि द्वारा करवाई गई पीएचडी प्रवेश परीक्षा 2024 में धांधली की आसंका है। पीएचडी के प्रश्न पत्र नगर क्षेत्र के ही किसी प्रिंटिंग प्रेस में प्रिंट किए गये थे। जिनकी खरीद फरोख्त हुई है। परीक्षा से पहले ही पेपर लीक हो चुका था। छात्रों को पेपर बांटा जा रहा था। उन्होंने पूरे मामले में विवि के अधिकारियों के संलिप्त होने की बात कहीं। उन्होंने विवि की कुलपति से जल्द से छात्रों की परीक्षा दोबारा करवाने, पीएचडी प्रवेश में हुई धांधली की जांच करने,कॉपियों की गुणवत्ता ठीक करने, सहायक कुलसचिव (परीक्षा) पद से हटाने की मांग कर रहे है।

प्रति कुलपति पर लगाये गंभीर आरोप

गढ़वाल विवि में धरने पर बैठे के छात्रों ने प्रति कुलपति की नियुक्ति नियम विरोध किये जाने, परीक्षाओं और नियुक्तियों में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2009 में गढ़वाल विवि को केंद्रीय विवि में परिवर्तित होने के बाद 2011 से नियुक्तियों और परीक्षाओं में भारी पैमाने पर अनियमितताएं व भ्रष्टाचार व्याप्त है। समय-समय पर इसकी जानकारी यूजीसी, शिक्षा मंत्रालय एवं उच्च अधिकारीयों को समय-समय दी जाती रही है, किन्तु शिकायतें नियमानुसार जांच करने के बजाय विवि के प्रति कुलपति को ही प्रेषित कर दी जाती हैं। जिनके संरक्षण में यह अनियमितताएं की जा रही हैं। गढ़वाल विवि में व्याप्त भ्रष्टाचार और परीक्षा में अनियमितताओं की जांच किये जाने के साथ ही प्रति कुलपति को सेवानिवृत्त के बाद नियमविरुद्ध तरीके से प्रतिकुलपति पद पर नियुक्ति के आदेश निरस्त करने की मांग की।

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