बड़ी खबर: 6 साल बाद हरिद्वार के घाटों से भिखारियों की भीड़ में मिला लापता रिटायर्ड कर्मचारी

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में अक्सर ऐसे लोग पहुंच जाते हैं जो परिस्थितियों का शिकार होकर अपने परिवार से बिछड़ जाते हैं। कई लोग गंगा घाटों पर भिखारियों की भीड़ में गुम हो जाते हैं, तो कुछ का कोई सुराग तक नहीं मिल पाता। इसी बीच एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने एक परिवार की […]

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में अक्सर ऐसे लोग पहुंच जाते हैं जो परिस्थितियों का शिकार होकर अपने परिवार से बिछड़ जाते हैं। कई लोग गंगा घाटों पर भिखारियों की भीड़ में गुम हो जाते हैं, तो कुछ का कोई सुराग तक नहीं मिल पाता।

इसी बीच एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने एक परिवार की छह साल पुरानी तलाश को आखिरकार खत्म कर दिया।

हरियाणा के अंबाला जिले के जंडली निवासी 72 वर्षीय रिटायर्ड कर्मचारी अजमित सिंह को छह साल बाद हरिद्वार के गंगा घाटों से सकुशल बरामद कर लिया गया। उन्हें अंबाला पुलिस ने भिखारियों की भीड़ के बीच खोज निकाला और परिवार से मिलाया।

परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने शुरू किया अभियान

अजमित सिंह के परिजनों ने अंबाला के सेक्टर-9 थाना पुलिस से शिकायत की थी कि उनके पिता पिछले छह वर्षों से लापता हैं। हाल ही में उनके हरिद्वार में होने की सूचना मिलने पर परिवार ने पुलिस से उन्हें खोजने की गुहार लगाई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की और शिकायत मिलने के महज सात दिनों के भीतर हरिद्वार पहुंचकर गंगा घाटों पर तलाश अभियान चलाया।

हरिद्वार के घाटों से सकुशल बरामद हुए अजमित सिंह

पुलिस की लगातार कोशिशों के बाद अजमित सिंह हरिद्वार के घाटों पर भिखारियों की भीड़ के बीच मिले। उनकी पहचान की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने उन्हें सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया और परिवार को सूचना दी।

पिता को देखकर भावुक हुआ परिवार

छह वर्षों बाद अपने पिता को सकुशल देखकर परिवार की आंखें नम हो गईं। घर में खुशी का माहौल है। परिजनों ने अंबाला पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए मिठाई खिलाकर उनका सम्मान किया और कहा कि पुलिस की तत्परता के कारण उनका परिवार फिर से एक हो सका।

हरिद्वार में बढ़ रहे ऐसे मामलों ने बढ़ाई चिंता

हरिद्वार देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं का प्रमुख तीर्थ स्थल है, लेकिन यहां कई ऐसे लोग भी पहुंच जाते हैं जो मानसिक, सामाजिक या पारिवारिक परिस्थितियों के कारण अपने परिवार से बिछड़ जाते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस और सामाजिक संस्थाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण साबित होती है।

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