देहरादून: उत्तराखंड कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल थमता नजर आ रहा है। कांग्रेस हाईकमान की हिदायत के बाद हरीश रावत ने अपनी आगे की धन्यवाद यात्राओं को स्थगित करने का फैसला किया है। रावत ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी और कहा कि उन्होंने आगे 9 धन्यवाद यात्राओं की योजना बनाई थी, जिनके आयोजन की जिम्मेदारी भी लोगों को सौंप दी गई थी, लेकिन अब इन यात्राओं को स्थगित करना पड़ रहा है।
हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में यात्रा स्थगित होने से समर्थकों और आयोजकों को हुई परेशानी के लिए माफी भी मांगी। उन्होंने कहा कि उनकी पूरी कोशिश रहेगी कि पार्टी भी उनकी ओर से किए जा रहे कार्यक्रमों की तर्ज पर कोई जनसंवाद कार्यक्रम बनाए और वह उसमें शामिल हों। फिलहाल उन्होंने पार्टी के अगले कदम का इंतजार करने की बात कही है।
कुमारी सैलजा की चिट्ठी के बाद बढ़ा था विवाद
दरअसल, बीमारी के कारण लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूर रहने के बाद हरीश रावत ने उत्तराखंड लौटकर दोबारा राजनीतिक सक्रियता बढ़ाई थी। इसके तहत उन्होंने हरिद्वार से धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने कुमाऊं क्षेत्र में भी यात्रा की और समर्थकों के साथ लोगों से संवाद किया।
हरीश रावत की यात्रा और उनके बयानों को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा ने आपत्ति जताई थी। सैलजा ने 1 अक्टूबर को रावत को पत्र लिखकर यात्रा रोकने की सलाह दी थी। पार्टी नेतृत्व की ओर से कहा गया था कि चुनाव से पहले पार्टी से अलग समानांतर कार्यक्रम संगठन के हित में नहीं हैं।
कुमारी सैलजा की ओर से हरीश रावत को दिए गए संदेश में पार्टी संगठन के साथ समन्वय बनाकर कार्यक्रम करने पर जोर दिया गया था। साथ ही रावत से ऐसे बयानों से बचने को कहा गया था, जिन्हें पार्टी के लिए नुकसानदायक माना जा सकता है।
हालांकि, शुरुआती दौर में रावत ने यात्रा जारी रखी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यात्रा को जनता से संवाद और उत्तराखंड के मुद्दों को सामने रखने की पहल बताया। इसके बाद मामला कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंच गया।
केसी वेणुगोपाल ने भी दिया था स्पष्ट संदेश
मामला दिल्ली तक पहुंचने के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल ने भी हरीश रावत से बातचीत की। पार्टी की ओर से स्पष्ट किया गया कि उत्तराखंड में चुनावी अभियान सभी नेताओं को साथ लेकर और कांग्रेस के बैनर तले चलाया जाना चाहिए।
पार्टी नेतृत्व का जोर इस बात पर रहा कि व्यक्तिगत या समानांतर अभियान के बजाय संगठन की रणनीति के अनुसार संयुक्त कार्यक्रम किए जाएं। कांग्रेस नेतृत्व की चिंता आगामी विधानसभा चुनावों से पहले संगठन के भीतर समन्वय और एकजुटता बनाए रखने को लेकर बताई गई है।
अब पार्टी के जनसंवाद कार्यक्रम का इंतजार करेंगे रावत
आलाकमान की हिदायत के बाद अब हरीश रावत ने अपनी आगे की 9 धन्यवाद यात्राओं को स्थगित कर दिया है। उन्होंने कहा है कि उनकी कोशिश रहेगी कि पार्टी भी इसी तरह का कोई जनसंवाद कार्यक्रम तैयार करे और वह उसमें शामिल हों।
रावत के इस फैसले को कांग्रेस नेतृत्व और उनके बीच चल रहे विवाद में फिलहाल एक तरह के विराम के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, आने वाले दिनों में पार्टी की ओर से उनके लिए क्या भूमिका तय की जाती है और क्या संयुक्त जनसंवाद कार्यक्रम बनाया जाता है, इस पर नजर रहेगी।






