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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने टिहरी गढ़वाल में अपनी मां, बड़े भाई और गर्भवती भाभी की हत्या के मामले में मृत्युदंड पाए संजय सिंह की फांसी की सजा निरस्त कर दी है।
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि आरोपी का मानसिक उपचार कराया जाए और ठीक होने पर उसे रिहा किया जाए।
यह मामला वर्ष 2014 में हुई तीन हत्याओं से जुड़ा है, जिसमें निचली अदालत ने अगस्त 2021 में संजय सिंह को मृत्युदंड सुनाया था।
मानसिक बीमारी के आधार पर उठे थे सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से न्यायमित्र नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद वशिष्ठ ने अदालत के सामने दलील दी कि संजय सिंह मानसिक रूप से अस्वस्थ है। उनके अनुसार, मेडिकल बोर्ड ने भी आरोपी को मानसिक रूप से बीमार बताया था और कहा था कि वह अपने कृत्य के परिणामों को समझने में सक्षम नहीं था, हालांकि इलाज से उसके ठीक होने की संभावना है।
न्यायमित्र ने दलील दी कि निचली अदालत ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े इन तथ्यों पर उचित ध्यान नहीं दिया और मृत्युदंड की सजा बरकरार रखी।
राज्य सरकार से रिकॉर्ड की जांच करने को कहा था
इस मामले में हाईकोर्ट ने पहले सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से आरोपी के संबंध में प्रस्तुत रिकॉर्ड का अवलोकन करने और यह देखने को कहा था कि क्या घटना के समय वह किसी गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित था।
प्रस्तुत जानकारी के मुताबिक, निचली अदालत ने दोबारा सुनवाई के दौरान आरोपी को स्वस्थचित मानते हुए मृत्युदंड की सजा बरकरार रखी थी। इसके बाद मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
13 दिसंबर 2014 को हुई थीं तीन हत्याएं
मामला टिहरी गढ़वाल के गुमाल गांव का है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 13 दिसंबर 2014 को संजय सिंह ने कथित तौर पर मामूली बात पर अपनी मां, बड़े भाई और गर्भवती भाभी की तलवार से हत्या कर दी थी। इस घटना की रिपोर्ट आरोपी के पिता राम सिंह पवार ने दर्ज कराई थी।
मामले की सुनवाई के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमा पांडेय की अदालत ने अगस्त 2021 में संजय सिंह को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। आरोपी ने इस फैसले को उत्तराखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
इलाज के बाद रिहाई को लेकर अदालत के निर्देश
हाईकोर्ट ने मृत्युदंड को निरस्त करते हुए राज्य सरकार को आरोपी का मानसिक उपचार कराने और ठीक होने पर रिहा करने के निर्देश दिए हैं।






