नैनीताल:रिपोर्ट-कमल जगाती
ज्यूलिकोट और आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल की समस्या से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) पर उत्तराखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले में अब तक दिए गए आदेशों के अनुपालन की रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने मॉनिटरिंग कमिटी के निर्णयों से भी अवगत कराने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
पिछले कुछ महीनों से नैनीताल के निचले हिस्सों के कई क्षेत्रों में सीवर और जल स्रोत का पानी मिक्स होने की शिकायत सामने आई थी। इसके चलते गांजा, तल्ला छिंडा, मल्ला छिंडा, वीरभट्टी, ज्यूलिकोट और खुर्पाताल समेत आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल की समस्या सामने आई। याचिका में कहा गया कि दूषित पानी के कारण 500 से अधिक लोग पीलिया, डायरिया आदि से प्रभावित हुए।
इस मामले को अधिवक्ता और याचिकाकर्ता रवि बिष्ट ने जनहित याचिका के रूप में हाईकोर्ट के सामने रखा है।
कोर्ट ने पूछा- मॉनिटरिंग कमिटी ने क्या कार्रवाई की?
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता ने सरकारी अधिवक्ताओं से मॉनिटरिंग कमिटी की कार्रवाई को लेकर जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा कि कमिटी का गठन किए जाने के बाद अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
खंडपीठ ने कहा कि अगली तारीख पर जिलाधिकारी अब तक किए गए आदेशों के अनुपालन की रिपोर्ट पेश करेंगे। साथ ही मॉनिटरिंग कमिटी की ओर से लिए गए निर्णयों से भी कोर्ट को अवगत कराया जाएगा।
सुनवाई के दौरान सीएमओ रश्मि पंत, एसडीएम नवाज़िश ख़लिक, अधिशासी अभियंता अनीश पिल्लई समेत जल निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
सरकार ने कोर्ट को बताया- स्थिति नियंत्रण में
उप महाधिवक्ता शैलेन्द्र सिंह चौहान ने कोर्ट को सरकार की ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पानी की सप्लाई को लेकर रिपोर्ट पहले की तुलना में काफी बेहतर है और क्षेत्र की स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने यह भी बताया कि मरीजों की संख्या में कमी आई है।
कोर्ट को बताया गया कि मॉनिटरिंग कमिटी की बैठक बुधवार को प्रस्तावित है।
वहीं, सीएससी पूरन सिंह रावत ने बताया कि कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर जल संस्थान और जल निगम के तीन-तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है।
याचिकाकर्ता ने उठाए गंभीर सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता रवि बिष्ट ने कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मामले में मुख्य आरोपी जल संस्थान का अधिशासी अभियंता है। याचिकाकर्ता की ओर से दूषित पानी में मिलावट से संबंधित फोटो भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अधिवक्ता आदित्य प्रताप ने कोर्ट को बताया कि नैनीताल शहर से 17 पानी के सैंपल लिए गए थे। उनके अनुसार सभी सैंपलों की रिपोर्ट में राहत की बात सामने आई है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि मंगलवार को खुर्पाताल में भी पेयजल के सैंपल लिए जाएंगे।
29 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले में अब तक दिए गए आदेशों के अनुपालन की रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश करने और मॉनिटरिंग कमिटी के निर्णयों से कोर्ट को अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।


