वीडियो : अस्पताल की फीस से बचने के लिए अपहरण का आरोप, ब्लैकमेलिंग की आशंका ।

कमल जगाती, नैनीताल उत्तराखण्ड के हल्द्वानी में एक निजी अस्पताल द्वारा मरीज का कथित अपहरण करने का वीडियो फेसबुक में अपलोड करने के पीछे अस्पताल की फीस नहीं चुकाने की बात सामने आ रही है। अस्पताल प्रबंधन ने इसकी शिकायत थाने में की है और इलाज के बकाए रुपयों का हिसाब मीडिया को जारी किया […]

कमल जगाती, नैनीताल

उत्तराखण्ड के हल्द्वानी में एक निजी अस्पताल द्वारा मरीज का कथित अपहरण करने का वीडियो फेसबुक में अपलोड करने के पीछे अस्पताल की फीस नहीं चुकाने की बात सामने आ रही है। अस्पताल प्रबंधन ने इसकी शिकायत थाने में की है और इलाज के बकाए रुपयों का हिसाब मीडिया को जारी किया है।

देखिए वीडियो (बाईट : जे.एस.खुराना, अस्पताल स्वामी)

https://youtu.be/oV_KVzXuui4

 

नैनीताल जिले के हल्द्वानी में प्रतिष्ठित कृष्णा अस्पताल की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया है। इसके पीछे घायल महिला के इलाज का भारी भरकम बकाया बिल बताया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि सड़क हादसे में घायल महिला के इलाज के लिए अस्पताल ने परिजनों की स्वीकृति के बाद इलाज शुरू किया। लगभग एक माह तक चले इलाज के बाद बीती दो अगस्त को महिला को डिस्चार्ज कर दिया गया। मरीज व उसके परिजनों से जब फीस की धनराशि जमा करने को कहा गया तो पहले उन्होंने कुछ दिन आज-कल आज-कल कहकर निकाल दिए और फिर अचानक ब्लैक मेल करने के मकसद से अपहरण का आरोप लगाते हुए एक वीडियो फेसबुक पर अपलोड कर दिया। वीडियो अपलोड होते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

अस्पताल प्रबंधन को जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने थाना भोटिया पड़ाव को इसकी सूचना दी और आई.टी.एक्ट की सम्बंधित धाराओं में कार्यवाही करने की मांग की।
अस्पताल के स्वामी डॉक्टर जे.एस.खुराना ने बताया कि एक माह पूर्व उनके अस्पताल में सड़क हादसे में घायल एक महिला आई थी, जिसके बाहरी और अंदरूनी शरीर में गंभीर चोटें थी।

अस्पताल प्रबंधन ने उनके परिजनों को इलाज में लगने वाले समय और खर्चे के बारे में बताया और इलाज कर 21 दिनों में डिस्चार्ज भी कर दिया। उन्होंने बताया कि महिला व उनके साथियों ने रुपये मंगवाने की बात कहकर कुछ दिन निकाल दिए और अब अस्पताल की फीस देने के बजाए फेसबुक पर भ्रामक सूचना अपलोड कर दी।  खुराना ने बताया कि उनकी लीगल सैल ने थाने को सूचित कर दिया है और महिला को बंधक बनाने की बात निराधार है।

महिला मजे से अस्पताल में मौजूद है और अपने बिस्तर में भोजन कर रही है। उन्होंने ये भी कहा कि वर्ष 1988 में अस्पताल खोलने के वक्त उन्होंने ये प्रण लिया था कि पहले मरीज का इलाज करेंगे और फिर उससे फीस लेंगे, आज इस तरह से सोशियल मीडिया में बदनाम करने से उस मुहिम को धक्का लगा है।

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