पीपीपी मोड :अस्पताल न हुए, आलू प्याज हो गए जो ठेली लगाकर बेचने चल दिये…

अजय रावत अजेय, वरिष्ठ पत्रकार। पौड़ी गढ़वाल। सुना है नागरिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेचने पर आमादा लोकतांत्रिक सरकार को उत्तराखंड में अस्पतालों के खरीददार नहीं मिल पा रहे, लिहाजा दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई में ठेली लगाकर (रोड शो) कर जिला आपताल पौड़ी, सिविल अस्पताल रामनगर, सीएचसी घण्डियाल, पाबौ, बीरोंखाल व भिकियासैंण को बेचने का प्लान तैयार […]

अजय रावत अजेय, वरिष्ठ पत्रकार।

पौड़ी गढ़वाल। सुना है नागरिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेचने पर आमादा लोकतांत्रिक सरकार को उत्तराखंड में अस्पतालों के खरीददार नहीं मिल पा रहे, लिहाजा दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई में ठेली लगाकर (रोड शो) कर जिला आपताल पौड़ी, सिविल अस्पताल रामनगर, सीएचसी घण्डियाल, पाबौ, बीरोंखाल व भिकियासैंण को बेचने का प्लान तैयार किया जा रहा है।

आखिर हो भी क्यूँ नहीं, विश्व बैंक के हेल्थ डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के 900 करोड़ का कद्दू जो कटना है, उसके लिए कुछ भी करेगा, भले ही निरीह प्रजा पीपीपी के पहले फेज़ के प्रयोग से बेज़ार क्यूँ न हो,बौराड़ी(टेहरी) के मामले का धुवां तो अभी छँटा भी नहीं है। हे सरकार बहादुर…! ये जो बड़े बाबू इस नीलामी को आतुर हैं, इनका तो कुछ न बिगड़ेगा, लेकिन आप तो कुछ विवेक से काम लीजिए, आप जन सरोकारों की हिफाज़त के लिए ही इस जिम्मेदारी पर आसीन है, प्रजा आपसे उम्मीदें रखती है, आप पर ऐतबार करती है, इन बाबुओं पर नहीं, ये कद्दू का हिस्सा डकार ले जाएंगे, लेकिन अवाम सवाल सिर्फ आपसे करेगी..
पहाड़ में जब आप ‘सरकार बहादुर’ डॉक्टरों को नहीं रोक पा रहे तो ये कारोबारी क्या खाक रोकेंगे..? बेहतर होता आप मोटी और आकर्षक पगार देकर डॉक्टरों को यहां रोकने की कोशिश करते, पहाड़ के इन अस्पतालों में कोई भी “चतुर बनिया” (अस्पताल कारोबारी) आपसे ज्यादा पगार किसी डॉक्टर को नहीं देगा, तय जानिए जितने डॉक्टर अभी तैनात हैं उतने भी यहां न रहेंगे।
कृपया शातिर “बड़े बाबुओं” की ‘गणित’ के फॉर्मूलों की जगह निरीह अवाम के “जज्बात’ की किताब को पढ़िए।

सरकार को ढूंढने से भी नहीं मिल रहे उत्तराखंड में पार्टनर

सरकारी अस्पतालों को PPP मोड पर संचालित करने के लिए त्रिवेंद्र सरकार को उत्तराखंड में पार्टनर नहीं मिल रहे हैं। अब सरकार पार्टनर कंपनियों की तलाश में मुंबई, दिल्ली, चेन्नई समेत कई बड़े शहरों में रोड शो की तैयारी कर रही है।
गौरतलब है कि विश्व बैंक के हेल्थ डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत राजकीय जिला चिकित्सालय व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को PPP मोड पर सरकार संचालित करना चाहती है। दूसरे चरण में सीएससी पाबौ घंडियाल बीरोंखाल व रामनगर सिविल अस्पताल को देने की योजना है। लेकिन सरकार को इनके लिए उत्तराखंड में कोई उपयुक्त पार्टनर नहीं मिल पा रहा है। अपर सचिव स्वास्थ्य विभाग युगल किशोर पंत का कहना है कि अच्छी कम्पनियों को प्रोत्साहित करने के लिए देश के बड़े शहरों में रोड शो के जरिए किया जाएगा उन्हें स्वास्थ्य क्षेत्र में सेवाएं देने के लिए उत्तराखंड आमंत्रित किया जाएगा। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सके।

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