- 100 से अधिक किसान, मजदूर और सामाजिक संगठन देश बचाओ मोर्चा के साथ; 19 नवंबर को उत्तराखण्ड में होगी महत्वपूर्ण बैठक, 20 से अधिक राज्यों के प्रतिनिधियों को किया जाएगा आमंत्रित।
हल्द्वानी। किसान मंच उत्तराखण्ड के प्रदेश अध्यक्ष, किसान मकान बचाओ संघर्ष समिति के संस्थापक एवं देश बचाओ मोर्चा उत्तराखण्ड के कार्यक्रम संयोजक किसान पुत्र कार्तिक उपाध्याय ने आज हल्द्वानी में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, किसानों एवं पशुपालकों की आर्थिक सुरक्षा, लोकतांत्रिक अधिकारों तथा देशभर में चल रहे विभिन्न जनआंदोलनों के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अथवा अमेरिकी प्रशासन के किसी भी दबाव में आकर ऐसा व्यापार समझौता नहीं करना चाहिए, जिससे भारत की कृषि व्यवस्था, पशुपालन, डेयरी उद्योग और करोड़ों ग्रामीण परिवारों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका हो।
उपाध्याय ने स्पष्ट कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील से कृषि, पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाना चाहिए। किसान हितों के विरुद्ध किसी भी अंतिम समझौते पर सरकार हस्ताक्षर न करे।
अमेरिकी विदेश मंत्री के ताजा बयान से किसानों की चिंता बढ़ी
उपाध्याय ने कहा कि 20 अक्टूबर 2026 को भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम चरण के करीब बताया। इसके बाद 20–21 अक्टूबर की उच्चस्तरीय वार्ता में भी दोनों देशों ने समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 में घोषित अंतरिम व्यापार ढाँचे में अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं के साथ कुछ कृषि एवं खाद्य उत्पादों, जिनमें पशु आहार से संबंधित उत्पाद, सोयाबीन तेल, मेवे तथा प्रसंस्कृत फल शामिल हैं, पर व्यापारिक रियायतों का उल्लेख किया गया था।
हालांकि भारत सरकार ने डेयरी, अनाज तथा अन्य संवेदनशील कृषि उत्पादों के संरक्षण का आश्वासन दिया है, लेकिन किसान संगठनों की मांग है कि अंतिम समझौते के संपूर्ण प्रावधान सार्वजनिक किए जाएं।
उपाध्याय ने सवाल उठाया कि यदि इस समझौते से भारतीय किसानों और पशुपालकों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं, तो सरकार किसान संगठनों से व्यापक संवाद करके संभावित आयात, शुल्क रियायतों और घरेलू बाजार पर पड़ने वाले प्रभावों का विस्तृत आकलन सार्वजनिक क्यों नहीं करती?
उन्होंने कहा कि अमेरिकी कृषि क्षेत्र और भारतीय छोटे किसानों की परिस्थितियां अलग हैं। भारत के छोटे एवं सीमांत किसान पहले ही बढ़ती लागत, कर्ज, फसलों के उचित मूल्य और बाजार की अनिश्चितता जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में विदेशी कृषि उत्पादों को मिलने वाली अतिरिक्त बाजार पहुंच के प्रभावों की गंभीर समीक्षा आवश्यक है।
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अमेरिका के साथ किसी भी व्यापारिक समझौते में भारत के अन्नदाता और पशुपालकों के हित सर्वोपरि रहें। विदेशी दबाव से ऊपर भारत की आर्थिक संप्रभुता और किसान की आजीविका होनी चाहिए।”
देश बचाओ मोर्चा क्यों बना? 100 से अधिक संगठन एक मंच पर
उपाध्याय ने बताया कि देश में किसान, मजदूर, कर्मचारी, युवा और सामाजिक संगठन लंबे समय से अलग-अलग मुद्दों पर आंदोलन कर रहे हैं। इन आंदोलनों को एक साझा राष्ट्रीय मंच देने तथा देशहित से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर संयुक्त रणनीति बनाने के उद्देश्य से देश बचाओ मोर्चा का गठन किया गया।
उन्होंने बताया कि जून-जुलाई 2026 में चंडीगढ़ के किसान भवन में आयोजित किसान संगठनों की बैठकों से इस राष्ट्रीय पहल की शुरुआत हुई।
मोर्चे के गठन में किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी, सरवन सिंह पंधेर, वी. एम. सिंह, सरजीत सिंह फूल, प्रकाश पोहरे और शिव कुमार कक्का सहित विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
देश बचाओ मोर्चा ने शुरुआत से ही भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, एमएसपी की कानूनी गारंटी, किसानों की कर्जमुक्ति तथा कृषि संकट जैसे सवालों को अपने प्रमुख मुद्दों में शामिल किया।
उपाध्याय ने बताया कि अब तक 100 से अधिक किसान, मजदूर और सामाजिक संगठन मोर्चे के साथ आ चुके हैं। अलग-अलग राज्यों के अनेक अन्य संगठनों से भी संवाद चल रहा है।
चंडीगढ़ से नई दिल्ली तक चार महत्वपूर्ण बैठकें
उपाध्याय ने बताया कि देश बचाओ मोर्चा की अब तक चार महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बैठकें हो चुकी हैं।
25 जून और 1 जुलाई 2026 को चंडीगढ़ में किसान संगठनों के बीच महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ। इसके बाद मोर्चे ने 21 जुलाई को नई दिल्ली के किसान घाट पर व्यापार समझौते के विरोध में किसान महापंचायत और प्रदर्शन का आह्वान किया।
1 सितंबर को नई दिल्ली के गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक बैठक बुलाई गई थी।
इसके बाद 22 अक्टूबर 2026 को पुनः गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब, नई दिल्ली में देश बचाओ मोर्चा की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बैठक आयोजित हुई, जिसमें किसान-मजदूर संगठनों की साझा रणनीति, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते तथा आगामी राष्ट्रीय कार्यक्रमों पर चर्चा की गई।
उपाध्याय ने बताया कि 22 अक्टूबर की बैठक में उन्होंने उत्तराखण्ड का प्रतिनिधित्व किया तथा प्रदेश में आगामी राष्ट्रीय स्तर की बैठक आयोजित करने की जिम्मेदारी स्वीकार की।
लोकतंत्र और जनआंदोलनों की स्वतंत्रता पर उठाए सवाल
उपाध्याय ने कहा कि देश बचाओ मोर्चा केवल कृषि और व्यापार समझौते तक सीमित नहीं रहेगा। इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकारों से जुड़े विभिन्न जनसंघर्षों को एक मंच पर लाना भी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश में शांतिपूर्ण आंदोलनों के सामने अनेक प्रकार की प्रशासनिक चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। जनता की आवाज को पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा है और अनेक आंदोलनों को न्याय के लिए सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचना पड़ रहा है।
उन्होंने मुख्य विपक्षी दलों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि संसद से लेकर सड़क तक जनहित के मुद्दों पर प्रभावी जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।
“लोकतंत्र केवल सरकार बनाने का नाम नहीं है। लोकतंत्र का अर्थ जनता को अपनी बात कहने, विरोध करने और अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष करने की स्वतंत्रता भी है। इन अधिकारों की रक्षा करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।”
19 नवंबर को उत्तराखण्ड में देश बचाओ मोर्चा की महत्वपूर्ण बैठक
उपाध्याय ने घोषणा की कि 19 नवंबर 2026 को उत्तराखण्ड में देश बचाओ मोर्चा की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी।
बैठक का आयोजन किसान मंच उत्तराखण्ड करेगा। इसके लिए अस्थायी राजधानी देहरादून अथवा हरिद्वार में से किसी एक स्थान को अंतिम रूप दिया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण बैठक का नेतृत्व किसान मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता तथा टीम अन्ना की कोर कमेटी से जुड़े वरिष्ठ आंदोलनकारी श्री भोपाल सिंह चौधरी करेंगे।
उन्होंने बताया कि बैठक में देश के 20 से अधिक राज्यों के किसान, मजदूर, सामाजिक एवं जनआंदोलनकारी संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा।
विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के प्रतिनिधियों से भी संपर्क किया जाएगा, ताकि वहां की सामाजिक चुनौतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर सुना जा सके।
उत्तराखण्ड की इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में सक्रिय विभिन्न आंदोलनकारी संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करना और देश बचाओ मोर्चा के राज्य स्तरीय संगठनात्मक विस्तार की रूपरेखा तैयार करना होगा।
उत्तराखण्ड के सभी जनआंदोलनों को जोड़ने का अभियान
उपाध्याय ने कहा कि उत्तराखण्ड में स्थायी राजधानी गैरसैंण, किसानों और पशुपालकों के अधिकारों, बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि अधिकारों, पर्यावरण संरक्षण और अन्य जनसमस्याओं को लेकर अनेक संगठन संघर्षरत हैं।
इन संगठनों के अपने-अपने मुद्दे और स्वतंत्र पहचान हैं, लेकिन लोकतांत्रिक अधिकारों तथा जनहित के साझा सवालों पर आपसी समन्वय की आवश्यकता है।
इसी उद्देश्य से प्रदेश के विभिन्न जिलों में सक्रिय संगठनों के पदाधिकारियों से संपर्क स्थापित किया जाएगा। सभी संगठनों की स्वतंत्र पहचान और उनके स्थानीय मुद्दों का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की व्यवस्था विकसित करने का प्रयास होगा।
पहले ट्रेड डील पर स्पष्ट निर्णय, फिर देशव्यापी संयुक्त संघर्ष
उपाध्याय ने बताया कि देश बचाओ मोर्चा की आगामी रणनीति दो प्रमुख चरणों में आगे बढ़ेगी।
प्रथम चरण में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से भारतीय कृषि, पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा। केंद्र सरकार से मांग की जाएगी कि किसान हितों के विरुद्ध किसी अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर न किए जाएं और समझौते की शर्तें सार्वजनिक की जाएं।
द्वितीय चरण में देश के विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक इकाइयों का विस्तार करके अलग-अलग जनआंदोलनों के साझा मुद्दों पर व्यापक राष्ट्रीय स्तर की रणनीति तैयार की जाएगी।
इसके अंतर्गत किसानों की आर्थिक सुरक्षा, फसलों के लाभकारी मूल्य, एमएसपी की कानूनी गारंटी, समान एवं सुलभ शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार, मजदूर अधिकारों तथा अन्य संवैधानिक और जनहित के सवालों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
आगामी एक माह में विभिन्न राज्यों में देश बचाओ मोर्चा की बैठकें आयोजित करने की योजना है। इन बैठकों के माध्यम से राज्यवार संगठनों की समस्याओं, प्राथमिकताओं और साझा मांगों को संकलित किया जाएगा।
संघर्ष की अगली दिशा उत्तराखण्ड से भी तय होगी
उपाध्याय ने कहा कि उत्तराखण्ड में 19 नवंबर की बैठक केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं होगी, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न संघर्षरत संगठनों के बीच संवाद और समन्वय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगी।
“हमारा उद्देश्य किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में संगठन खड़ा करना नहीं, बल्कि किसानों, मजदूरों, युवाओं और आम जनता से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाना है। देशहित में एकजुटता, संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और जनसमस्याओं का समाधान ही हमारी प्राथमिकता है।”
उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न आंदोलनकारी संगठनों से संपर्क कर 19 नवंबर की बैठक में अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।






