जांच एजेंसियों और सचिवालय अफसरों को भी है कृषि विभाग में ड्रोन घोटाले की जानकारी । फिर कार्रवाई क्यों नहीं

देहरादून: उत्तराखंड कृषि विभाग में 250 ड्रोन खरीद के कथित अनुबंध को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक निजी कंपनी द्वारा विभाग के साथ ड्रोन आपूर्ति का अनुबंध होने का दावा किए जाने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। वहीं कृषि विभाग का कहना है कि प्रारंभिक जांच में न […]

देहरादून: उत्तराखंड कृषि विभाग में 250 ड्रोन खरीद के कथित अनुबंध को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक निजी कंपनी द्वारा विभाग के साथ ड्रोन आपूर्ति का अनुबंध होने का दावा किए जाने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।

वहीं कृषि विभाग का कहना है कि प्रारंभिक जांच में न कोई अनुबंध मिला, न खरीद का प्रस्ताव, न संबंधित फाइल और न ही किसी प्रकार के भुगतान का रिकॉर्ड। अब पूरे मामले की जांच शासन स्तर पर कराए जाने की तैयारी है।

पर्वतजन के सूत्रों के अनुसार, पुलिस की जांच एजेंसी ऑफ़ द रिकॉर्ड रूप से इस पूरे मामले की जांच कर रही है वही यह भी एक चौंकाने वाली बात है कि चार किसानों को यह ड्रोन दिए भी जा चुके हैं। हालांकि पर्वतजन के सूत्रों के अनुसार उन किसानों के द्वारा कंपनी के खाते में नगद पैसे जमा कराए गये।

नगद पैसे जमा कराए जाने से इस बात की जांच किया जाना मुश्किल हो सकता है कि आखिर वह लाभार्थी कौन थे और कहां के थे। इससे किसानों के वेरिफिकेशन की तस्वीर नहीं हो पा रही है। आमतौर पर यह ड्रोन बड़े किसानों द्वारा प्रयोग किए जाते हैं, इनका प्रयोग कीटनाशक उर्वरक आदि का छिड़काव करने के लिए करते हैं इस ड्रोन की असल कीमत 10 लख रुपए है जबकि कृषि विभाग की यंत्रीकरण परियोजना के अंतर्गत सब्सिडी पर यह ड्रोन किसानों को ढाई लाख रुपए का मिल जाता है।

हालांकि कृषि विभाग के उच्च अधिकारियों के अनुसार, यह भी हो सकता है कि बिचौलियों ने डेढ़ करोड़ रुपए की कमीशन हड़प करने के लिए कंपनी को चार ड्रोन खरीद कर भरोसा दिलाया हो कि कृषि विभाग इन ड्रोन की खरीद कर रहा है, और खरीद प्रक्रिया शुरू हो गई है।

बड़ा सवाल यह है कि जब यह पूरा मामला पुलिस के संज्ञान में है कृषि विभाग के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है और शासन स्तर के अधिकारियों के भी संज्ञान में है तो फिर 1 साल होने के बावजूद इस पर स्थिति साफ क्यों नहीं हो पाई।

250 ड्रोन खरीद के दावे से मचा हड़कंप

नोएडा की गरुड़ा यूएवी सॉफ्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड ने दावा किया है कि इस वर्ष की शुरुआत में कृषि विभाग के साथ 250 ड्रोन की आपूर्ति का अनुबंध हुआ था। कंपनी ने हाल ही में कृषि मंत्री गणेश जोशी को दिए शिकायती पत्र में भी यही दावा दोहराया और कहा कि तत्कालीन कृषि निदेशक के कार्यकाल में यह अनुबंध हुआ था।

विभाग बोला- न अनुबंध, न खरीद का प्रस्ताव

कृषि विभाग की प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। विभाग के अनुसार ड्रोन खरीद से संबंधित कोई प्रस्ताव कभी तैयार ही नहीं किया गया। रिकॉर्ड में न कोई अनुबंध मिला, न फाइल और न ही ड्रोन खरीद के लिए किसी प्रकार का भुगतान जारी किया गया।

कंपनी ने अपने शिकायत पत्र में तत्कालीन निदेशक केसी पाठक और जूनियर क्लर्क सुमित सिंह का नाम लिया था। इसी आधार पर विभाग ने सुमित सिंह को निलंबित कर दिया। वहीं पूर्व निदेशक का नाम सामने आने के बाद विभाग ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए शासन को पत्र भेज दिया है। कृषि निदेशक दिनेश कुमार ने बताया कि शासन से जांच अधिकारी नामित करने का अनुरोध किया गया है, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।

शासन स्तर की जांच में खुलेगा पूरा सच

कृषि विभाग ने सोमवार को शासन को पत्र भेजकर मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। अब शासन द्वारा जांच अधिकारी नियुक्त किए जाने के बाद यह स्पष्ट होगा कि कंपनी का दावा सही है या विभाग का रिकॉर्ड।

मामले में उठ रहे बड़े सवाल

250 ड्रोन खरीद विवाद ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—

  • जब ड्रोन खरीद का कोई प्रस्ताव ही नहीं था तो अनुबंध किसने और किस उद्देश्य से किया?
  • यदि कंपनी का दावा सही है तो विभागीय रिकॉर्ड से अनुबंध और संबंधित फाइलें कहां गायब हो गईं?
  • यदि विभाग सही है तो कंपनी ने अनुबंध का दावा किस आधार पर किया?
  • क्या इतनी बड़ी सरकारी खरीद बिना किसी आधिकारिक प्रक्रिया के संभव है?
  • क्या केवल कंपनी की शिकायत के आधार पर जूनियर क्लर्क के खिलाफ कार्रवाई करना उचित था?
  • क्या विभाग में फर्जी अनुबंध तैयार करने वाले बिचौलियों का नेटवर्क सक्रिय है?

विभागीय कार्यशैली पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने कृषि विभाग की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब सभी की निगाहें शासन स्तर की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सकेगा कि 250 ड्रोन खरीद के कथित अनुबंध के पीछे असली सच्चाई क्या है और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है।

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