देहरादून। आईटीएम-सनस्टोन में “एआई के साथ शिक्षा का भविष्य निर्माण” विषय पर एक भव्य फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन उत्साह और गरिमा के साथ किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती भूमिका, संभावनाओं और प्रभावों के प्रति शिक्षकों एवं अकादमिक लीडर्स को जागरूक करना था।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता हिमांशु अग्रवाल (ट्रेनर एवं एआई विशेषज्ञ) रहे। अपने प्रेरक संबोधन में उन्होंने कहा कि केवल महंगे गैजेट्स या आधुनिक उपकरण ही सफलता की कुंजी नहीं हैं, बल्कि एआई टूल्स—जैसे एआई प्लेटफॉर्म्स, जेमिनी और चैटजीपीटी—का सही और सटीक उपयोग व्यक्ति की सोच और कार्यशैली को नई दिशा दे सकता है।
उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि एआई से प्राप्त परिणाम पूरी तरह से हमारे द्वारा दिए गए प्रॉम्प्ट या प्रश्न की गुणवत्ता पर निर्भर करते हैं। सही प्रश्न पूछने की क्षमता ही प्रभावी और उपयोगी परिणाम सुनिश्चित करती है।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों और विशेषज्ञों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए एआई के शैक्षणिक उपयोग, शोध कार्य में इसकी भूमिका, तथा शिक्षण पद्धतियों में नवाचार जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की। वक्ताओं ने बताया कि एआई शोध कार्य को गति देने, डेटा विश्लेषण को सरल बनाने और विश्लेषणात्मक सोच को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इस अवसर पर संस्थान के चेयरमैन निशांत थपलियाल, रजिस्ट्रार रुचि थपलियाल, प्रिंसिपल डॉ. अंजू गैरोला थपलियाल, कैंपस हेड डॉ. अमन चड्ढा तथा कैंपस एसोसिएट डायरेक्टर रवि रौशन की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रिंसिपल्स एवं शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह आयोजन शिक्षकों के लिए प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ, जिसने शिक्षा में एआई के प्रभावी उपयोग को लेकर नई संभावनाओं के द्वार खोले।



