- 25 वर्षीय लॉ स्टूडेंट पर मास्टरमाइंड होने का आरोप, हॉस्टलों में रेट कार्ड और स्कूटी से होम डिलीवरी; करोड़ों के आबकारी राजस्व नुकसान की आशंका
देहरादून। नीरज उत्तराखंडी
राजधानी देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र के बिधौली में कॉलेज छात्र-छात्राओं और हॉस्टलों तक कथित तौर पर अवैध शराब पहुंचाने वाले नेटवर्क का आबकारी विभाग ने खुलासा किया है।
इस मामले में 25 वर्षीय लॉ स्टूडेंट गर्वित उर्फ विक्रांत को मुख्य आरोपी बताया गया है। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, शराब की खरीद से लेकर उसकी डिलीवरी, लोकेशन साझा करने और भुगतान तक का कथित नेटवर्क व्हाट्सऐप के माध्यम से संचालित किया जा रहा था।
हॉस्टलों तक पहुंचाए जाते थे रेट कार्ड
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपी दिल्ली और हरियाणा से शराब लाकर बिधौली क्षेत्र के हॉस्टलों और पीजी में रहने वाले छात्र-छात्राओं को सप्लाई करता था। ग्राहकों तक पहुंच बनाने के लिए कथित तौर पर शराब की रेट लिस्ट भी वितरित की जाती थी। ऑर्डर मिलने पर दोपहिया वाहनों के माध्यम से शराब की होम डिलीवरी की जाती थी।
15 हजार रुपये मासिक वेतन पर रखे थे डिलीवरी बॉय
आबकारी विभाग की जांच के हवाले से प्रकाशित खबरों के अनुसार, 18 से 25 वर्ष की आयु के युवाओं को लगभग 15 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पर डिलीवरी के काम में लगाया गया था। उन्हें दोपहिया वाहन उपलब्ध कराए गए थे। व्हाट्सऐप ग्रुप में सुबह और शाम सेल्फी भेजकर हाजिरी लगाने के साथ डिलीवरी की लोकेशन और भुगतान संबंधी जानकारियां साझा की जाती थीं।
25 अगस्त से शुरू हुई कार्रवाई, मुख्य आरोपी ने किया आत्मसमर्पण
रिपोर्टों के अनुसार, 25 अगस्त 2026 की रात आबकारी विभाग की कार्रवाई के दौरान बिधौली क्षेत्र से एक कार और दो स्कूटी जब्त की गई थीं तथा दो आरोपियों को पकड़ा गया था। जांच के दौरान गर्वित उर्फ विक्रांत का नाम कथित नेटवर्क के मुख्य संचालक के रूप में सामने आया। बाद में उसके परिवार से जुड़े एक अन्य सदस्य की गिरफ्तारी की भी खबर सामने आई।
आरोपों के संबंध में दर्ज मुकदमे और जांच के बाद गर्वित ने 7 अक्टूबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आत्मसमर्पण किया। प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत के आदेश पर उसे जेल भेज दिया गया। 8 अक्टूबर को आबकारी टीम ने एक अन्य आरोपी आदित्य कुमार को बिधौली स्थित किराये के कमरे से गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से लगभग 10 पेटी शराब बरामद होने की जानकारी दी गई है।
सरकार को करोड़ों के राजस्व नुकसान की आशंका
आबकारी निरीक्षक के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कथित नेटवर्क के माध्यम से प्रतिदिन 20 से 25 पेटी शराब की बिक्री होती थी। विभाग ने इस गतिविधि से राज्य सरकार को सालाना लगभग पांच से दस करोड़ रुपये तक के आबकारी राजस्व नुकसान की आशंका जताई है। यह आंकड़ा जांच के दौरान सामने आया अनुमान है, अंतिम रूप से प्रमाणित वित्तीय नुकसान नहीं।
अब इन सवालों के जवाब जरूरी
यह मामला केवल अवैध शराब की बिक्री तक सीमित नहीं है। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि शराब किन स्रोतों से खरीदी गई, उसे उत्तराखंड तक लाने के लिए आवश्यक दस्तावेज और परमिट थे या नहीं, बिक्री में किन लोगों की भूमिका थी और कथित नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था।
इसके साथ ही, शराब की वास्तविक मात्रा, बरामदगी का पूरा विवरण, संभावित राजस्व नुकसान की गणना तथा जब्त वाहनों और अन्य संपत्तियों से जुड़े तथ्यों की भी जांच जरूरी है। हॉस्टलों और पीजी तक शराब पहुंचने के दावों के आधार पर संबंधित सप्लाई चैन की पड़ताल भी महत्वपूर्ण होगी।
सवाल सिर्फ एक आरोपी का नहीं, आबकारी निगरानी व्यवस्था का भी है। यदि जांच में इतने बड़े नेटवर्क की पुष्टि होती है, तो यह देखना जरूरी होगा कि अवैध शराब की आपूर्ति लंबे समय तक कैसे चलती रही और संबंधित निगरानी तंत्र को इसकी भनक कब लगी।






