कैट का बड़ा आदेश: संजीव चतुर्वेदी के उठाए घोटालों की पत्रावली तलब । प्रमुख सचिव वन की टूर डायरी भी मांगी

देहरादून। भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) में ग्रेडिंग कम किए जाने से जुड़े मामले में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) ने उत्तराखंड सरकार से महत्वपूर्ण दस्तावेज तलब किए हैं। कैट ने संजीव चतुर्वेदी की ओर से उठाए गए कथित वित्तीय अनियमितताओं और घोटालों पर अब तक की गई कार्रवाई […]

देहरादून। भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) में ग्रेडिंग कम किए जाने से जुड़े मामले में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) ने उत्तराखंड सरकार से महत्वपूर्ण दस्तावेज तलब किए हैं।

कैट ने संजीव चतुर्वेदी की ओर से उठाए गए कथित वित्तीय अनियमितताओं और घोटालों पर अब तक की गई कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव वन को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु की टूर डायरी भी मांगी गई है।

19 अगस्त को संजीवा कुमार और राजवीर सिंह वर्मा की खंडपीठ ने संजीव चतुर्वेदी की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।

एसीआर में कम ग्रेडिंग को लेकर कैट पहुंचे थे संजीव चतुर्वेदी

संजीव चतुर्वेदी ने इस वर्ष जून में कैट में याचिका दाखिल कर वर्ष 2024-25 की एसीआर में उनकी ग्रेडिंग कम किए जाने को चुनौती दी थी। उन्होंने प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु पर व्यक्तिगत दुर्भावना के आधार पर उनकी ग्रेडिंग प्रभावित करने का आरोप लगाया था।

मामले की पहली सुनवाई 17 जून को हुई थी। उस दौरान कैट ने प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु को नामजद नोटिस जारी किया था। इसके साथ ही उत्तराखंड के मुख्य सचिव और प्रमुख वन संरक्षक को भी नोटिस जारी किया गया था। अब 19 अगस्त की सुनवाई में मामले से जुड़े दस्तावेज और टूर डायरी तलब करने का आदेश दिया गया है।

मुनस्यारी ईको हट से लेकर मसूरी के सीमा स्तंभों तक उठाए सवाल

अपनी याचिका में संजीव चतुर्वेदी ने दावा किया है कि उनके द्वारा वन विभाग में उठाए गए कई मामलों के कारण उनकी एसीआर में ग्रेडिंग कम की गई। इनमें मुनस्यारी ईको हट प्रकरण, मसूरी वन प्रभाग में हजारों सीमा स्तंभों के गायब होने का मामला और देहरादून-मसूरी वन प्रभागों में बाहर की नर्सरियों से कथित तौर पर ऊंची दरों पर पौधों की खरीद तथा महंगी दरों पर मियावाकी रोपण के प्रस्ताव से जुड़े मामले शामिल हैं।

मुनस्यारी में वर्ष 2019 में ईको हट निर्माण के दौरान करीब 1.70 करोड़ रुपये के कार्य बिना टेंडर कथित तौर पर फर्जी फर्मों के माध्यम से कराए जाने का मामला सामने आया था। संजीव चतुर्वेदी की ओर से इस मामले में तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक को विस्तृत जांच रिपोर्ट भेजे जाने का दावा किया गया है। इसके आधार पर जनवरी 2025 में आपराधिक कार्रवाई के लिए पूरा प्रकरण शासन को भेजा गया था।

इसके बाद जुलाई 2025 में शासन की ओर से पिथौरागढ़ के तत्कालीन प्रभागीय वनाधिकारी विनय भार्गव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। संजीव चतुर्वेदी के अनुसार केंद्र सरकार ने भी वन संरक्षण अधिनियम, 1980 और भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत आपराधिक अभियोजन की कार्रवाई के लिए पिछले वर्ष अगस्त में राज्य सरकार को पत्र भेजा था।

मसूरी में 12 हजार में से करीब 7 हजार सीमा स्तंभ गायब होने का मामला

मसूरी वन प्रभाग से जुड़े मामले में संजीव चतुर्वेदी ने कार्ययोजना निर्धारण के दौरान हुई गणना का हवाला देते हुए दावा किया कि करीब 12 हजार सीमा स्तंभों में से लगभग 7 हजार सीमा स्तंभ गायब पाए गए थे।

इस मामले में उन्होंने तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक से पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई या एसआईटी से कराने का अनुरोध किया था। इसके अलावा मसूरी के तत्कालीन प्रभागीय वनाधिकारी की ओर से वर्ष 2021 से 2024 के बीच खरीदी गई करोड़ों रुपये की संपत्तियों की जांच की अनुशंसा किए जाने का भी याचिका में उल्लेख किया गया है।

ये भी पढ़े :

‘संज्ञेय अपराध पर एफआईआर जरूरी’, ललिता कुमारी फैसले का दिया हवाला

अपने प्रार्थना पत्र में संजीव चतुर्वेदी ने सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के ललिता कुमारी मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया है। उनका तर्क है कि यदि किसी मामले में संज्ञेय अपराध के तत्व सामने आते हैं तो नियमानुसार तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। उनका आरोप है कि उनके द्वारा उठाए गए विभिन्न मामलों में पर्याप्त समय बीतने के बावजूद कार्रवाई लंबित रखी गई है।

प्रमुख सचिव वन की टूर डायरी पर भी उठाया सवाल

कैट के समक्ष दाखिल प्रार्थना पत्र में संजीव चतुर्वेदी ने प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु की वित्तीय वर्ष 2024-25 की पूरी टूर डायरी तलब किए जाने की मांग की थी। उन्होंने दावा किया कि इस अवधि में प्रमुख सचिव वन की ओर से उनके कार्यक्षेत्र का कोई भौतिक निरीक्षण नहीं किया गया और न ही उनके साथ किसी प्रकार की बैठक हुई।

इसी आधार पर चतुर्वेदी ने प्रमुख सचिव वन की ओर से दी गई ग्रेडिंग को बिना भौतिक आधार के बताते हुए उसे निरस्त किए जाने योग्य बताया है। अब कैट द्वारा टूर डायरी तलब किए जाने से एसीआर में की गई ग्रेडिंग के आधार और प्रक्रिया की भी जांच का रास्ता खुल गया है।

लंबित मामलों की पूरी पत्रावली भी होगी तलब

नोटिस जारी होने के बाद संजीव चतुर्वेदी ने कैट के समक्ष एक और प्रार्थना पत्र दाखिल किया। इसमें प्रमुख सचिव वन और प्रमुख वन संरक्षक, उत्तराखंड के कार्यालयों में लंबित इन मामलों से संबंधित पूरी पत्रावलियां तलब करने की मांग की गई।

इस प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए कैट ने उत्तराखंड सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 26 अक्टूबर 2026 को होगी। ऐसे में आगामी सुनवाई में सरकार की ओर से दाखिल जवाब और तलब किए गए दस्तावेज इस विवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

Also Read This

एक्शन : पुलिस मुठभेड़ में पकड़े गए शराब कैंटीन संचालक की हत्या के आरोपी,एक आरोपी घायल 

रुड़की। हरिद्वार जिले के रुड़की में शराब कैंटीन संचालक अमन हत्याकांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। सिविल लाइन कोतवाली क्षेत्र के ढंडेरा...

हादसा : 17 यात्रियों से भरा टेंपो ट्रेवेल्स हाईवे पर ब्रेक फेल होने से पलटा

उत्तरकाशी।नीरज उत्तराखंडी गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोनगाड के पास रविवार को उस समय बड़ा हादसा टल गया, जब यात्रियों से भरा एक टेंपो ट्रेवल्स वाहन...
Parvatjan Team
Parvatjan Team
Parvatjan Team is dedicated to delivering the latest, accurate, and reliable news from Uttarakhand. We cover local issues, administrative updates, public interest stories, and breaking news in a clear and simple manner.

Related Posts