मेधावी बेटियों के लिए नैनीताल डीएम की अनोखी पहल,-‘कॉफी विथ डीएम”

नैनीताल के जिलाधिकारी सविन बंसल का ‘कॉफी विथ डीएम” कार्यक्रम आजकल प्रदेशभर में काफी लोकप्रिय हो रहा है। आखिर हो भी क्यों न, उन्होंने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” के तहत मेधावी छात्राओं के साथ संवाद कार्यक्रम को ऐसे अंदाज में शुरू किया है कि उनकी सराहना होनी तो बनती ही है।
मेघावी छात्राओं से संवाद करते हुए जिलाधिकारी बताते हैं कि बेटी वह रोशनी हैं, जो दो परिवारों के घर रोशन करती है। अनादिकाल से महिलाओं और बेटियों ने दुर्गा, सीता, मरियम, फातिमा, लक्ष्मीबाई, गार्गी कस्तूरबा के रूप में तत्कालीन समाज को प्रेरित करने का काम किया है। वर्तमान में बेटियां सभी क्षेत्रों में बेटों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम रही हंै। ऐसे में उन्हें लड़कों से कमतर आंकना उचित नहीं है।
जिलाधिकारी आर्थिक कारणों से ड्रॉप आउट कर चुकी बालिका कोमल से बात करते हुए कहते हैं कि होनहार छात्राओं के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले हैं। कोमल को आर्थिक कारण से निराश नहीं होना चाहिए और उसकी शिक्षा और अन्य खर्चे जिला प्रशासन वहन करेगा।
जिलाधिकारी सबिन बंसल कार्यक्रम में मौजूद बालिकाओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने कहा है कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए अनुशासन व साधना के साथ ही संघर्ष भी बहुत जरूरी है। संघर्ष हमें लक्ष्य प्राप्ति की ओर ले जाता है। उन्होंने शिक्षा छोड़ चुकी ड्रॉपआउट बालिकाओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि जीवन में कभी हार न माने। जब हम हार मानते हैं तो लक्ष्य के एकदम नजदीक होते हैं। यदि इस समय अपने संकल्प पर थोड़ा संयम रखा जाए तो मंजिल की प्राप्ति होने से कोई नहीं रोक सकता।
जिलाधिकारी अन्य प्रतिभावान छात्राओं से भी अपील करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की मदद की आवश्यकता हो तो निसंकोच जिलाधिकारी के नंबर पर बात कर सकते हैं। दूरदराज क्षेत्रों से आई बालिकाओं के लिए यह एक सु:खद एहसास था। जाहिर है कि इससे बालिकाओं को अपने लक्ष्य निर्धारित करने में अवश्य मदद मिलेगी।
श्री बंसल ने बालिकाओं की देश की न्यूक्लियर व्यवस्था, कृषि, आन्तरिक्ष, विदेश नीति तथा विभिन्न प्रकार की भारतीय प्रशासनिक सेवाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बालिकाओं द्वारा जिज्ञासा स्वरूप पूछे गए प्रश्नों का भी सहजता से जवाब दिया। श्री बंसल ने बच्चियों से कहा कि वह तन्मयता के साथ अध्ययन करें क्योंकि बिना किताबी ज्ञान के लक्ष्य हासिल करना संभव नही है। शिक्षा व संस्कार का समागम होने से हमारे सुन्दर व्यक्तित्व का निर्माण होता है।

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