नैनीताल में रहस्यमयी पत्थरबाजी से दहशत। 11 दिनों से घरों की छतों पर बरस रहे पत्थर, पढ़िए खबर

नैनीताल। स्टोरी कमल जगाती  उत्तराखंड के पर्यटन नगरी नैनीताल में इन दिनों रहस्यमयी पत्थरबाजी की घटनाओं ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। तल्लीताल स्थित जिला पंचायत और जीवाजी लॉज परिसर में पिछले 11 दिनों से लगातार रात के समय घरों की छतों पर पत्थर फेंके जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है […]

नैनीताल। स्टोरी कमल जगाती 

उत्तराखंड के पर्यटन नगरी नैनीताल में इन दिनों रहस्यमयी पत्थरबाजी की घटनाओं ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। तल्लीताल स्थित जिला पंचायत और जीवाजी लॉज परिसर में पिछले 11 दिनों से लगातार रात के समय घरों की छतों पर पत्थर फेंके जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि तमाम कोशिशों के बावजूद अब तक पत्थर फेंकने वाले का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में इस तरह की घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में आज तक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि पत्थरबाजी के पीछे कोई व्यक्ति था या यह केवल अफवाहों और रहस्यमयी परिस्थितियों से जुड़ा मामला था।

रात 8 से 11 बजे के बीच हो रही हैं घटनाएं

स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले 11 दिनों से रोजाना रात 8 बजे से 11 बजे के बीच अचानक घरों की छतों पर पत्थर गिरने लगते हैं। लोगों ने कई बार आसपास निगरानी की, लेकिन किसी संदिग्ध व्यक्ति को नहीं देखा गया। इससे क्षेत्र में भय और असमंजस का माहौल बना हुआ है।

पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं

नैनीताल के बुजुर्गों का कहना है कि शहर में अतीत में भी कई बार इसी तरह की रहस्यमयी पत्थरबाजी की घटनाएं हुई हैं।

स्थानीय निवासी हरीश के अनुसार, वर्ष 2006 में अल्मा लॉज कंपाउंड में भी इसी तरह पत्थरबाजी हुई थी, लेकिन मामले का कभी खुलासा नहीं हो सका।

वहीं मेलविल हॉल निवासी अरुण साह बताते हैं कि वर्ष 1966 में होटल शालीमार के पास भी ऐसी ही घटनाएं हुई थीं। काफी प्रयासों के बावजूद किसी आरोपी की पहचान नहीं हो सकी और कुछ समय बाद घटनाएं स्वतः बंद हो गईं।

1989 और 1975 में भी हुई थीं पत्थरबाजी की घटनाएं

स्थानीय निवासी कैलाश के मुताबिक, वर्ष 1989 में रैम्जे अस्पताल के आसपास भी कई दिनों तक पत्थरबाजी होती रही, लेकिन कोई आरोपी पकड़ में नहीं आया।

इसी तरह आहार विहार/नैनीताल बैंक भवन क्षेत्र में भी पत्थर फेंके जाने की घटनाएं हुई थीं। उस समय कुछ उपद्रवियों पर शक जताया गया था, लेकिन किसी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।

बिड़ला रोड निवासी शोभा ने बताया कि वर्ष 1975 में लेक व्यू एनेक्सी क्षेत्र में आपसी रंजिश के चलते पत्थरबाजी हुई थी, जिसे बातचीत के बाद शांत करा लिया गया था।

कुछ मामलों में पकड़े भी गए आरोपी

हालांकि, सभी घटनाएं रहस्यमयी नहीं रहीं। चार्टन लॉज निवासी भरत के अनुसार, करीब दो वर्ष पहले एक अधेड़ व्यक्ति ने निजी रंजिश के चलते घरों और वाहनों पर पत्थर फेंककर शीशे तोड़ दिए थे। इसके बाद स्थानीय लोगों ने सीसीटीवी कैमरे लगाए और निगरानी बढ़ाई, जिससे आरोपी को पकड़ लिया गया। समझाइश और कार्रवाई के बाद वह क्षेत्र पूरी तरह शांत हो गया।

अंधविश्वास और अफवाहों से बचने की जरूरत

नैनीताल का इतिहास और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि कई लोककथाओं और मान्यताओं से जुड़ी रही है। ऐसे में इस तरह की घटनाओं के बाद कुछ लोग इन्हें अलौकिक कारणों से जोड़ने लगते हैं। हालांकि, अब तक इन घटनाओं को लेकर किसी भी जांच एजेंसी ने किसी अलौकिक कारण की पुष्टि नहीं की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं में अफवाहों से बचते हुए तथ्यों और जांच पर भरोसा करना जरूरी है। पुलिस और प्रशासन भी लोगों से सतर्क रहने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत देने की अपील कर रहे हैं।

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