ई-रवन्ना की वैधता खत्म होने पर कटने वाले ई-चालान से राहत, उत्तराखंड में शुरू हुई WhatsApp हेल्पलाइन

देहरादून: उत्तराखंड में खनिज वाहन स्वामियों को ई-रवन्ना (e-Ravanna) से जुड़ी समस्याओं से राहत देने के लिए नई हेल्पलाइन व्यवस्था शुरू की गई है। अब यातायात जाम, नो-एंट्री, वीआईपी मूवमेंट या वाहन खराब होने जैसी आकस्मिक परिस्थितियों में ई-रवन्ना की वैधता समाप्त होने पर वाहन स्वामी WhatsApp के जरिए तत्काल सूचना दर्ज करा सकेंगे। भूतत्व […]

देहरादून: उत्तराखंड में खनिज वाहन स्वामियों को ई-रवन्ना (e-Ravanna) से जुड़ी समस्याओं से राहत देने के लिए नई हेल्पलाइन व्यवस्था शुरू की गई है। अब यातायात जाम, नो-एंट्री, वीआईपी मूवमेंट या वाहन खराब होने जैसी आकस्मिक परिस्थितियों में ई-रवन्ना की वैधता समाप्त होने पर वाहन स्वामी WhatsApp के जरिए तत्काल सूचना दर्ज करा सकेंगे।

भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय, उत्तराखंड की ओर से यह जानकारी 8 अक्टूबर 2026 को MDTSS योजना के तहत आयोजित कार्यों की समीक्षा बैठक के बाद दी गई। बैठक की अध्यक्षता निदेशक राजपाल लेघा ने की।

इन परिस्थितियों में खत्म हो जाती है ई-रवन्ना की वैधता

खनिज वाहनों के संचालन के दौरान कई बार ऐसी परिस्थितियां सामने आती हैं, जिनमें वाहन समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाता। ट्रैफिक जाम, नो-एंट्री, VVIP मूवमेंट और वाहन खराब होने जैसी वजहों से ई-रवन्ना की निर्धारित वैधता अवधि समाप्त हो सकती है।

ऐसी स्थिति में वाहन का ई-चालान कटने की समस्या सामने आती है। निदेशालय ने इसी समस्या को देखते हुए तत्काल सूचना दर्ज कराने की सुविधा शुरू की है।

इन नंबरों पर WhatsApp करें सूचना

खनिज वाहन स्वामी आकस्मिक स्थिति में निम्न हेल्पलाइन नंबरों पर WhatsApp के जरिए सूचना भेज सकते हैं:

📲 8192802345
📲 8192802320

सूचना भेजते समय वाहन स्वामी को:

  • 🚛 वाहन की नंबर प्लेट की फोटो
  • 📍 वाहन की GPS Coordinates/लोकेशन

WhatsApp के माध्यम से भेजनी होगी।

इससे आकस्मिक परिस्थिति की सूचना तत्काल दर्ज की जा सकेगी और ई-रवन्ना की वैधता से जुड़ी समस्या के समाधान में मदद मिलेगी।

अवैध खनन की शिकायत भी कर सकेंगे

नई हेल्पलाइन का इस्तेमाल केवल ई-रवन्ना से जुड़ी समस्याओं के लिए ही नहीं किया जा सकेगा। अवैध खनन, अवैध परिवहन, अवैध भंडारणअथवा खनन से संबंधित किसी भी गतिविधि की शिकायत या सूचना भी इन्हीं हेल्पलाइन नंबरों पर दर्ज कराई जा सकती है।

निदेशालय के मुताबिक इस पहल का उद्देश्य जनसुविधा, पारदर्शिता और डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देना है।

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