देहरादून: उत्तराखंड में NEET UG 2025 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर MBBS में प्रवेश के मामले की जांच कर रही SIT ने पहली दो गिरफ्तारियां की हैं। SIT ने मामले में रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया है। दोनों को पूछताछ के लिए देहरादून के रायपुर थाने बुलाया गया था, जहां पूछताछ और सामने आए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
इस मामले की जांच के लिए 10 सदस्यीय SIT टीम हरिद्वार भी पहुंची थी। टीम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम पर बने कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए MBBS और BDS में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों से जुड़े मामले की जांच कर रही है।
NEET UG फर्जी सर्टिफिकेट मामले में पहली गिरफ्तारी
देहरादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान SSP प्रमेंद्र डोबाल और SIT ने मामले में हुई पहली गिरफ्तारियों की जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में रूपेश पंडित और अरविंद कुमार शामिल हैं।
SIT के अनुसार फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए MBBS में दाखिला दिलाने के लिए प्रति एडमिशन 45 लाख रुपये तय किए गए थे। तीन अभ्यर्थियों के परिजनों से एडवांस के तौर पर 20-20 लाख रुपये लिए जाने की बात जांच में सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक, अरविंद कुमार ने अपनी बेटी के MBBS में दाखिले के लिए रूपेश पंडित से संपर्क किया था। अरविंद की बेटी के साथ उसके दो परिचितों के बच्चों को भी MBBS में दाखिला दिलाने की बात हुई थी।
फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र से एडमिशन का आरोप
SIT के मुताबिक, रूपेश पंडित और उसके साथियों ने तीनों अभ्यर्थियों के कथित कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाए।
इन प्रमाणपत्रों के आधार पर तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में MBBS कोर्स में दाखिला प्राप्त किया।
पुलिस के मुताबिक, एडमिशन और क्लास शुरू होने के बाद बाकी रकम देने की बात तय हुई थी।
दस्तावेजों की जांच में सामने आए अभ्यर्थियों के मूल पते
SSP प्रमेंद्र डोबाल के मुताबिक, SIT ने मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों को कब्जे में लेकर साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई की। जांच के दौरान संदिग्ध अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते गलत पाए गए।
इसके बाद SIT ने संबंधित शिक्षण संस्थानों में जाकर मामले से जुड़े दस्तावेज कब्जे में लिए। इन दस्तावेजों की जांच के दौरान अभ्यर्थियों के मूल पतों की जानकारी सामने आई।
इसी जांच और सामने आए साक्ष्यों के आधार पर रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को पूछताछ के लिए रायपुर थाने लाया गया था। पूछताछ के बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
रूपेश पंडित पर कमीशन पर एडमिशन दिलाने का आरोप
SIT के मुताबिक पूछताछ में सामने आया कि रूपेश पंडित अपने साथियों के साथ पिछले 5 वर्षों से एजुकेशन कंसल्टेंसी का काम कर रहा था।
पुलिस के अनुसार, वह मेरठ में MECODO पाठशाला नाम से कंपनी संचालित कर रहा था। इस कंपनी के माध्यम से विभिन्न प्राइवेट यूनिवर्सिटीज और विदेशों में MBBS, BTech, BCA, BBA, BCom समेत अन्य कोर्सों में कमीशन पर एडमिशन दिलाने का काम किए जाने की जानकारी सामने आई है।
SSP प्रमेंद्र डोबाल के मुताबिक, भारत समेत अन्य देशों में भी रूपेश द्वारा बनाए गए कथित फर्जी सर्टिफिकेट के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है।
तीन बच्चों के MBBS एडमिशन के लिए तय हुए थे 45-45 लाख रुपये
पुलिस के अनुसार, अरविंद कुमार रूपेश पंडित का पुराना परिचित था और पिछले 2-3 वर्षों से उसे जानता था। अपनी बेटी के MBBS में दाखिले के लिए अरविंद ने रूपेश से संपर्क किया।
इसके बाद अपनी बेटी के साथ दो अन्य परिचितों के बच्चों को भी MBBS में दाखिला दिलाने की बात हुई। पुलिस के मुताबिक, रूपेश और उसके साथियों ने तीनों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से एडमिशन दिलाने की बात कही।
इसके लिए प्रत्येक एडमिशन के एवज में 45 लाख रुपये लेने की बात तय हुई। पुलिस के मुताबिक तीनों अभ्यर्थियों के परिजनों से एडवांस के तौर पर 20-20 लाख रुपये लिए गए और बाकी रकम MBBS में दाखिले तथा क्लास शुरू होने के बाद देने की बात तय हुई।
12 अन्य संदिग्ध पुलिस के रडार पर
SIT के मुताबिक इस मामले में 12 अन्य आरोपी अभी संदिग्ध हैं और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। इसके अलावा e-District सेंटर और CSC सेंटरों से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले समय में मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
क्या है उत्तराखंड का MBBS फर्जी सर्टिफिकेट मामला?
यह मामला NEET UG काउंसलिंग के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित और अन्य स्थानीय आरक्षण कोटे का कथित तौर पर गलत तरीके से लाभ उठाकर मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने से जुड़ा है।
आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों ने मृत या अन्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के फर्जी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाकर राज्य कोटे की आरक्षित MBBS और BDS सीटों पर प्रवेश हासिल किया।
जांच में सामने आने का दावा किया गया है कि प्रशासनिक रिकॉर्ड में एक ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम और कथित जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अलग-अलग अभ्यर्थियों ने खुद को उनका पोता या आश्रित बताकर कोटे का लाभ लिया। कथित फर्जी प्रमाणपत्रों पर AI-generated तस्वीरों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस प्रशासन ने SP ग्रामीण जया बलूनी के नेतृत्व में SIT का गठन किया है। SIT द्वारा SDM और पटवारी कार्यालयों से जुड़े दस्तावेजों तथा सरकारी प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
संदिग्ध प्रमाणपत्रों को निरस्त करने और मामले में संलिप्त लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करने की कार्रवाई भी शुरू की गई है।


