पेंशन पर सरकार को झटका, हाईकोर्ट ने 16 जनवरी के आदेश पर लगाई रोक

  देहरादून। उत्तराखंड हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग के नियमित एवं वर्कचार्ज कर्मचारियों को पेंशन लाभ से वंचित करने संबंधी वित्त विभाग के 16 जनवरी के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। यह आदेश वर्ष 2016 के बाद नियमित किए गए कर्मचारियों की […]

 

देहरादून। उत्तराखंड हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग के नियमित एवं वर्कचार्ज कर्मचारियों को पेंशन लाभ से वंचित करने संबंधी वित्त विभाग के 16 जनवरी के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। यह आदेश वर्ष 2016 के बाद नियमित किए गए कर्मचारियों की पेंशन पर प्रभाव डाल रहा था, साथ ही पहले से पेंशन प्राप्त कर रहे कार्मिकों के भुगतान को भी बंद करने की कार्रवाई की गई थी।

 

इससे पूर्व शीतकालीन अवकाश के दौरान न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की पीठ ने भी कुछ कर्मचारियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इसी आदेश पर अंतरिम रोक लगाई थी। हालांकि बाद में वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने तत्काल स्थगन देने से इनकार करते हुए सरकार से जवाब तलब किया था।

 

सोमवार को सिंचाई विभाग के नियमित वर्कचार्ज कर्मचारी गुलाब सिंह तोमर ने मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि वित्त विभाग के 16 जनवरी के कार्यालय आदेश के तहत 1 अक्टूबर 2005 के बाद नियमित हुए वर्कचार्ज कर्मचारियों को पेंशन व्यवस्था से बाहर कर दिया गया है।

 

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने Prem Singh v. State of Uttar Pradesh मामले में स्पष्ट किया था कि वर्कचार्ज सेवा अवधि को नियमित सेवा में जोड़ते हुए संबंधित कर्मचारियों को पेंशन सहित अन्य लाभ प्रदान किए जाएं। इसके बावजूद राज्य सरकार ने नया आदेश जारी कर पेंशन भुगतान तत्काल प्रभाव से रोक दिया। साथ ही, वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के दायरे में लाने की बात कही गई है।

 

राज्य सरकार ने अपने आदेश के समर्थन में वर्ष 2023 में सुप्रीम कोर्ट के Udayraj Singh v. State of Bihar फैसले का हवाला दिया। हालांकि बाद में शीर्ष अदालत ने यह स्पष्ट किया था कि 2018 का प्रेम सिंह प्रकरण तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा तय किया गया था, जबकि 2023 का निर्णय दो न्यायाधीशों की पीठ से आया है। ऐसे में पूर्ववर्ती बड़ा पीठ निर्णय ही मान्य रहेगा।

 

खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद वित्त विभाग के 16 जनवरी के आदेश के अमल पर रोक लगाते हुए मामले में अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।

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