दिनेशपुर : संवाददाता विशाल सक्सेना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी अमृत सरोवर योजना का उद्देश्य जल संरक्षण, ग्रामीण विकास और महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था। लेकिन ऊधम सिंह नगर जिले के गदरपुर ब्लॉक में इस योजना की तस्वीर दो अलग-अलग रूपों में दिखाई दे रही है।
एक ओर लाखों रुपये की लागत से बना सरोवर उपेक्षा का शिकार है, वहीं दूसरी ओर एक सरोवर महिलाओं की आजीविका का माध्यम तो बना है, लेकिन सुरक्षा के अभाव में लगातार नुकसान झेल रहा है।
बारिराई का अमृत सरोवर बना उपेक्षा की मिसाल
गदरपुर ब्लॉक की बारिराई ग्राम सभा के सुंदरपुर गांव में वर्ष 2022-23 में लगभग 17.71 लाख रुपये की लागत से अमृत सरोवर का निर्माण कराया गया था। उद्घाटन के समय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने इसे ग्रामीण विकास की बड़ी उपलब्धि बताया था।
वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो सरोवर बदहाल दिखाई देता है। चारों ओर झाड़ियां उग आई हैं, रखरखाव के अभाव में परिसर अव्यवस्थित हो चुका है और स्थानीय लोगों का कहना है कि योजना के अनुरूप इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के बाद सरोवर की देखरेख पर ध्यान नहीं दिया गया।
पिपलिया में महिलाओं की मेहनत से आत्मनिर्भरता, लेकिन सुरक्षा की कमी
वहीं पिपलिया ग्राम सभा में लगभग 19 लाख रुपये की लागत से बने अमृत सरोवर की तस्वीर कुछ अलग है। यहां महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं मछली पालन कर रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार इस गतिविधि से प्रतिवर्ष लगभग दो लाख रुपये का कारोबार हो रहा है, जिससे महिलाओं को रोजगार और आय का स्रोत मिला है।
हालांकि इस सरोवर में सुरक्षा व्यवस्था का अभाव चिंता का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूर्व में असामाजिक तत्वों द्वारा तालाब में जहरीला पदार्थ डालने से बड़ी संख्या में मछलियां मर चुकी हैं, जिससे स्वयं सहायता समूह को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
ग्रामीणों ने उठाईं ये प्रमुख मांगें
ग्रामीणों, महिला समूहों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि—
- सरोवर के चारों ओर तारबाड़ (फेंसिंग) कराई जाए।
- सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।
- सोलर लाइट, बैठने की व्यवस्था और सौंदर्यीकरण कराया जाए।
- बारिराई के सरोवर का नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर निगाह
एक ही ब्लॉक में अमृत सरोवर योजना की दो अलग-अलग तस्वीरें कई सवाल खड़े कर रही हैं। एक ओर लाखों रुपये की लागत से बना सरोवर बदहाली का शिकार है, जबकि दूसरी ओर सफल मॉडल को सुरक्षा के अभाव में नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग और जिला प्रशासन इन दोनों मामलों में क्या कदम उठाते हैं।
“हमने अमृत सरोवर की बदहाल स्थिति को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों और ब्लॉक प्रशासन से शिकायत की है, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
लाखों रुपये की लागत से बना यह सरोवर आज उपेक्षा का शिकार है। हमारी मांग है कि इसकी तत्काल सफाई, मरम्मत और सौंदर्यीकरण कराया जाए, ताकि योजना का लाभ ग्रामीणों को मिल सके और सरकारी धन का सही उपयोग हो।”
“हमारे गांव का अमृत सरोवर महिला स्वयं सहायता समूह के लिए रोजगार का बड़ा माध्यम बन चुका है। यहां मछली पालन से महिलाओं को अच्छी आय हो रही है।
अगर सरोवर के चारों ओर सौंदर्यीकरण, फेंसिंग, सोलर लाइट और अन्य सुविधाएं विकसित कर दी जाएं, तो यहां पर्यटन जैसी गतिविधियां भी बढ़ेंगी और महिलाओं की आय दोगुनी हो सकती है। इससे पूरे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।”






