- जानकीचट्टी और बड़कोट में उपचार के दौरान गई दो तीर्थयात्रियों की जान, यात्रा सीजन में मृतकों की संख्या 34 पहुंची; यात्रियों को घेरकर सेवा लेने के दबाव की शिकायतों से व्यवस्था पर सवाल
बड़कोट/उत्तरकाशी, 3 अक्तूबर 2026। नीरज उत्तराखंडी
यमुनोत्री धाम की यात्रा को लेकर प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएं चाक-चौबंद होने के दावों के बीच श्रद्धालुओं की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को यमुनोत्री यात्रा पर आए दो श्रद्धालुओं की अलग-अलग स्थानों पर तबीयत बिगड़ने के बाद उपचार के दौरान मौत हो गई। इनमें एक श्रद्धालु की जानकीचट्टी के पास और महिला तीर्थयात्री की बड़कोट में मौत हुई। शुक्रवार को हुई इन दो मौतों के बाद मौजूदा ग्रीष्मकालीन यात्रा सीजन में यमुनोत्री धाम यात्रा मार्ग पर जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 34 पहुंच गई है।
जानकारी के अनुसार कर्नाटक निवासी गंगधार बीशेठी (66) यमुनोत्री धाम की यात्रा पर जा रहे थे। यात्रा के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन और अन्य लोगों की मदद से उन्हें उपचार के लिए जानकीचट्टी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इसी तरह महाराष्ट्र निवासी लक्ष्मी बाई (49), पत्नी नामदेव गतीर, दोबाटा में रुकी हुई थीं। अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें उपचार के लिए बड़कोट अस्पताल लाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
एसआई विक्रम सिंह ने बताया कि दोनों मामलों में पुलिस की ओर से नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।
मौतों के बीच यात्रा व्यवस्था पर भी सवाल
श्रद्धालुओं की लगातार हो रही मौतों के बीच यमुनोत्री यात्रा के प्रमुख पड़ाव जानकीचट्टी में यात्रियों को लेकर अव्यवस्था की शिकायतों ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वाहन से उतरते ही यात्रियों को कुली, मजदूर और घोड़ा-खच्चर संचालक घेर लेते हैं और अपनी सेवाएं लेने के लिए दबाव बनाया जाता है।
शुक्रवार को भी जानकीचट्टी में ऐसी स्थिति देखने को मिलने की बात सामने आई। स्थानीय लोगों के अनुसार वाहन से उतरने वाले यात्रियों और उनके सामान को लेकर कई लोग एक साथ अपनी सेवाएं लेने के लिए उन्हें आकर्षित करने का प्रयास करते हैं। कुछ मामलों में सामान को लेकर खींचतान जैसी स्थिति बनने की शिकायत भी सामने आई है।
स्थानीय निवासी अरविंद सिंह, महावीर पंवार और संदीप राणा आदि ने कहा कि यात्रियों से निर्धारित शुल्क वसूली की व्यवस्था तो है, लेकिन यात्रियों को व्यवस्थित और सम्मानजनक ढंग से सेवाएं उपलब्ध कराने पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि यात्रियों को घेरकर सेवा लेने के लिए दबाव बनाने की शिकायतों पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है।
‘सेवा’ के नाम पर दबाव बना तो कैसे सुधरेगी यात्रा व्यवस्था?
स्थानीय लोगों का कहना है कि देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालु यमुनोत्री धाम की यात्रा के लिए बड़ी उम्मीद के साथ पहुंचते हैं। ऐसे में यात्रा के प्रमुख पड़ाव पर यदि उन्हें उतरते ही घेर लिया जाए और सेवाएं लेने के लिए दबाव बनाया जाए तो इससे यात्रा व्यवस्था की छवि प्रभावित होती है।
उन्होंने जानकीचट्टी में कुली, घोड़ा-खच्चर और अन्य यात्रा सेवाओं के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और व्यवस्थित व्यवस्था बनाने तथा यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की है। उनका कहना है कि यात्रियों को सेवाओं की जानकारी, शुल्क और उपलब्धता स्पष्ट रूप से बताई जानी चाहिए, ताकि अनावश्यक विवाद और खींचतान की स्थिति पैदा न हो।
एसडीएम ने दिए कार्रवाई के निर्देश
मामले में बड़कोट एसडीएम बृजेश कुमार तिवारी ने कहा कि यात्रियों को घेरने और अव्यवस्था से जुड़े मामलों में पुलिस तथा जिला पंचायत को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए संबंधित अधिकारियों को व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं।
लगातार मौतों के बीच मूल सवाल बरकरार
यमुनोत्री यात्रा मार्ग पर इस सीजन में श्रद्धालुओं की मौत का आंकड़ा 34 तक पहुंचना अपने आप में गंभीर चिंता का विषय है। प्रत्येक मामले में मौत के अलग-अलग चिकित्सकीय कारण हो सकते हैं, लेकिन लगातार हो रही घटनाओं के बीच यात्रा मार्ग पर चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता, आपातकालीन प्रतिक्रिया, स्वास्थ्य निगरानी, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं को सुरक्षित यात्रा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
वहीं जानकीचट्टी में यात्रियों को घेरकर सेवाएं लेने के दबाव की शिकायतें यह सवाल भी खड़ा करती हैं कि यात्रा व्यवस्था में केवल संख्या और शुल्क प्रबंधन पर्याप्त है या यात्रियों के अनुभव, गरिमा और सुरक्षा को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जा रही है।
यात्रा सीजन में 34 श्रद्धालुओं की मौत और यात्रा के प्रमुख पड़ाव पर सामने आ रही अव्यवस्था की शिकायतें प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती रखती हैं—श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना और यात्रा सेवाओं को अनुशासित, पारदर्शी तथा यात्री-केंद्रित बनाना।


