चमोली: बिजेंद्र सिंह राणा
ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों (VPDO) के वार्षिक तबादलों को लेकर उत्तराखंड में तूफान खड़ा हो गया है। उत्तराखंड ग्राम पंचायत विकास अधिकारी एसोसिएशन ने कई पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि उत्तराखंड लोक सेवक (वार्षिक स्थानांतरण) अधिनियम-2017 के साफ-साफ नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से तबादले किए गए हैं।
एसोसिएशन के अनुसार, सुगम क्षेत्र से दुर्गम और दुर्गम से सुगम क्षेत्रों में बिना किसी आधार के तबादले कर दिए गए। सेवा अवधि, आयु, चिकित्सकीय स्थिति और पिछले रिकॉर्ड को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। कई अधिकारियों ने इसे “अनियमित और पक्षपाती” बताते हुए तुरंत रद्द करने की मांग की है।
जिला अध्यक्ष विपिन सेमवाल सहित कई पदाधिकारियों ने लिखा है कि अधिनियम की धारा 3, 7, 8-11 और 15 का खुला उल्लंघन हुआ है। एसोसिएशन ने जिला पंचायत राज अधिकारी और अन्य उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर चेतावनी दी है कि यदि इन तबादलों को तुरंत सुधारा नहीं गया तो आगे कड़ा संघर्ष किया जाएगा।
कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि सालाना तबादले के नाम पर प्रशासनिक मनमानी चल रही है, जिससे उनके स्वास्थ्य और परिवार बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
प्रधान संगठन ने तबादलों पर विरोध जताते हुए चेतावनी दी है कि सभी पंचायत कर्मचारियों का एक साथ स्थानांतरित किए जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह कदम पंचायत राज व्यवस्था को पूरी तरह ठप कर सकता है।
प्रधानों का आरोप है कि बिना उचित विचार-विमर्श के किए गए इस सामूहिक स्थानांतरण से स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक अराजकता फैलने और विकास योजनाओं में भारी देरी होने की आशंका है। यह मामला उत्तराखंड के पंचायती राज विभाग में गहरी सड़ांध और लापरवाही को उजागर करता है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वे इस विवाद को कितनी जल्दी सुलझाते हैं।





