उत्तराखंड भाजपा में पद और चुनावी दौड़: नई नीति से नेताओं में हलचल

उत्तराखंड में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है, जिससे कई वरिष्ठ पदाधिकारियों की योजनाओं पर असर पड़ सकता है। संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार में विभिन्न पदों पर नियुक्त होने वाले सदस्यों को आगामी 2027 विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारी नहीं दी जाएगी। इस कदम से उन […]

उत्तराखंड में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है, जिससे कई वरिष्ठ पदाधिकारियों की योजनाओं पर असर पड़ सकता है। संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार में विभिन्न पदों पर नियुक्त होने वाले सदस्यों को आगामी 2027 विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारी नहीं दी जाएगी। इस कदम से उन पदाधिकारियों में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जो दोनों विकल्पों पर विचार कर रहे थे।

 

राज्य प्रशासन में लगभग दो दर्जन से अधिक पद रिक्त हैं, और इनके लिए पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता लगातार प्रयासरत हैं। हालांकि, इन नियुक्तियों में अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है, जिससे अटकलों का बाजार गर्म है। दबाव को कम करने के उद्देश्य से, पार्टी ने एक नई शर्त लागू की है, जिसमें सरकारी जिम्मेदारियों वाले व्यक्तियों को चुनावी मैदान से दूर रखा जाएगा।

 

इस नीति से विशेष रूप से उन पदाधिकारियों की चिंता बढ़ गई है, जिनके पास वर्तमान में सरकारी भूमिकाएं हैं और वे विधानसभा सीटों के लिए प्रयास कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, कई ऐसे व्यक्ति चुनावी तैयारी में लगे हुए हैं, लेकिन अब इस फैसले से उनकी राह में बाधाएं आ सकती हैं। परिणामस्वरूप, उनकी उम्मीदवारी की संभावना स्वतः समाप्त हो जाएगी, जिससे उन्हें पद ग्रहण करने या चुनाव लड़ने के बीच चयन करना पड़ेगा। पार्टी के अंदर इस मुद्दे पर गहन विमर्श चल रहा है।

 

इसके अलावा, संगठन ने इन पदाधिकारियों को नई भूमिकाएं सौंपने का निर्णय लिया है। उनका मुख्य फोकस उम्मीदवारों की सफलता सुनिश्चित करने पर होगा, जिसमें चुनाव प्रबंधन, संगठनात्मक कार्य और अपने इलाकों में चुनावी ड्यूटी शामिल होगी।

 

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा, “टिकट वितरण का अंतिम फैसला केंद्रीय संसदीय बोर्ड द्वारा लिया जाता है। हालांकि, सैद्धांतिक रूप से यह तय किया गया है कि सरकारी पदों पर तैनात व्यक्तियों को चुनाव लड़ने के बजाय उम्मीदवारों की जीत के लिए सहयोग करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।”

 

वर्तमान में पार्टी ने करीब 50 पदाधिकारियों को विभिन्न जिम्मेदारियां दी हैं, लेकिन इस नई व्यवस्था से कई लोगों की योजनाओं पर प्रभाव पड़ सकता है। संगठन के इस कदम से राज्य स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

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